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क्या आप जानते हैं : वर्षा की पूर्व सूचना देते हैं पशु-पक्षी, माह के कैसे पड़े नाम !

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आज के आधुनिक युग में वर्षा की पूर्व सूचना प्राप्त करने के लिये कई आधुनिक यंत्र हैं, लेकिन एक समय ऐसा था जब ये आधुनिक यंत्र नहीं थे। उस समय लोग प्रकृति के सहारे वर्षा का अनुमान लगाते थे, लेकिन प्रकृति की गोद में कुछ पशु-पक्षी, पर्वत, झीलें, वृक्ष ऐसे भी हैं जो वर्षा की पूर्व सूचना देते हैं जैसे-

  • नेपाल के जंगली क्षेत्रों में ‘ब्रेना’ नस्ल की काली भेड़ के कान जब सीधे तन जाते हैं तो वर्षा आने की पूरी संभावना रहती है।
  • साइबेरिया के जंगलों में एक सतरंगी चिड़िया पायी जाती है। यह चिड़िया जब उल्टी होकर उड़ने लगती है तो निश्चित रूप से बारिश होती है।
  • दक्षिण अफ्रीका के जंगलों में ‘मेरिस’ नस्ल की कोयल ऊँचे-ऊँचे वृक्षों पर रहती हैं। जब यह अपनी मधुर तान छेड़ती है तो बारिश आती है।
  • अमेरिका के जंगलों में खरगोश के कान जब काले पड़ने लगते हैं, तब बहुत तेज बारिश होती है।
  • अमेरिका के जंगलों में एक लाल रंग की जंगली बिल्ली पायी जाती है। वह बारिश आने से पूर्व जोरों से चिल्लाने लगती है।

वर्ष के महीनों के नाम कैसे पड़े ?

  1. जनवरी 31 दिन- द्विमुखी रोम देवता जैनस के नाम से निकला है, जिसके दो मुख भूत और भविष्य में देखते थे। यह कार्यों के आरम्भ को प्रभावित करता था। वर्ष के प्रथम महीने को ‘जनवरी’ कहकर उसे सम्मान दिया गया।
  2. फरवरी 28 दिन या 29 दिन- फ्रेबुला से, शुचिता का यह रोमन त्यौहार 15 फरवरी को मनाया जाता था।
  3. मार्च 31 दिन- मार्स या मंगल से यह रोम वालों का युद्ध देवता था। एंग्लो सैक्शन लोग, दिनों के लम्बा होने के कारण मार्च को ‘लम्बा होने वाला महीना’ कहते थे।
  4. अप्रैल 30 दिन- ठीक व्युत्पत्ति अनिश्चित है। यह शायद इस क्रिया ‘एपेरिर’ खुलने से निकला है। इस महीने में बसन्त में वनस्पतियाँ खिलती हैं।
  5. मई 31 दिन- ‘मइया’ से यह रोम वालों की वृद्धि की देवी है।
  6. जून 30 दिन- ठीक व्युत्पत्ति अनिश्चित है। एक सम्भावना स्वर्ग की रानी देवी जूनों से है। यह जूनियस नाम से भी निकला हो सकता है
  7. जुलाई 31 दिन- जूनियस सीजर के नाम से वह जुलाई में पैदा हुआ।
  8. अगस्त 31 दिन- रोमन सम्राट आक्टेवियस ऑगस्टल के नाम से उसने इस महीने में अनेक विजय प्राप्त की थी।
  9. सितम्बर 30 दिन- लेटिन ‘सेप्टम’ अर्थात सात से पुराने रोमन कैलेण्डर में सितम्बर सातवां महीना था, स्विट्जरलैण्ड वाले इसे फसल का त्योहार कहते हैं।
  10. अक्टूबर 31 दिन- लेटिन ‘आक्टो अर्थात आठ से’ स्लाव लोग अक्टूबर को ‘पीला’ महीना कहते हैं। इन दिनों पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं।
  11. नवम्बर 30 दिन- लेटिन ‘नावेम’ अर्थात नौ से उसके ऐंग्लो सेक्सन नाम ‘हेलिग’ यानी ‘आँधी मास’ ‘खत मास’ है।
  12. दिसम्बर 31 दिन- लेटिन नाम ‘डेसेन’ अर्थात दस से। इसका पुराना सेक्शन नाम ‘हेलिग मोनात’ यानी पवित्र क्रिसमस का महीना है।
  13. क्या आप जानते हैं ?

प्र. 1. भारत में डाक सूचक पिन कोड अंक प्रणाली कब से प्रारम्भ हुई ?

प्र. 2. बंगलादेश में गंगा नदी को किस नाम से पुकारा जाता है ?

प्र. 3. भारत का ‘इलेक्ट्रानिक नगर’ किसे कहा जाता है ?

प्र. 4. एशिया में नोबल पुरस्कार पाने वाले पहले व्यक्ति कौन हैं ?

प्र. 5. गोदावरी नदी का उद्गम स्थल कहां है ?

उत्तर – 1. 1972 ईं., 2. पद्मा, 3. बंगलोर/कर्नाटक, 4. रवींद्रनाथ ठाकुर, 5. त्रयंबकेश्वर/महाराष्ट्र

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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