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उपलब्धि: कविता श्रृंखलाओं में प्रो. शेखर जोशी ने जोड़ी ‘सेवा में सृजन’

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—अनुभवों से जागृत भावनाओं को कविताओं में पिरोया
—कुलपति प्रो. भंडारी ने रचनात्मकता को सराहा
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा
चित्रकला में नामी प्रो. शेखर चंद्र जोशी ने कविता श्रृंखलाओं में एक और नाम जोड़ दिया है—’सेवा में सृजन’। दरअसल, उन्होंने इस काव्य संग्रह का प्रका​शन किया है, जो बेहद प्रेरणादायी है। जिसमें जीवन के अनुभवों, कला जगत तथा देश व समाज में घटित घटनाओं से जागृत भावनाओं को उन्होंने कविताओं के ​रूप में पिरोया है। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता शैक्षिक प्रो. शेखर चंद्र जोशी की काव्य संग्रह ‘सेवा में सृजन’ में सरदार बल्लभ पटेल, कल्पना की बलि, अतृप्त भूख, कला, मां, मां का ऋण, प्रकृति के रंग, जीवन, हिन्दुस्तानी, सेवा से सृजन, आजादी, परमाणु विस्फोट, आशा, जिंदगी, लोक कलाएं व क्राफ्ट आदि—आदि शीर्षकों से प्रकाशित 51 कविताओं का समावेश है। ये कविताएं सामाजिक समस्याओं पर चिंतन करने की सोच पैदा करने वाली हैं। इनमें कला को आत्मा से जोड़ने का प्रयास किया गया है। कला से ताल्लुक रखने वाली कई कविताएं इस संग्रह में शुमार हैं।
कुलपति ने की प्रशंसा

प्रो. शेखर चंद्र जोशी ने सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेंद्र सिंह भंडारी से मुलाकात की और उन्हें अपनी काव्य संग्रह ‘सेवा से सृजन’ भेंट की। कुलपति ने उनके रचनात्मक कार्य की प्रशंसा की और काव्य संग्रह के प्रकाशन के लिए बधाई दी। इस मौके पर कवि प्रो. शेखर चंद्र जोशी ने कहा कि सेवा में सृजन का जीवन से गहरा ताल्लुक रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्वजों की प्रेरणा से प्रेरित होने के बाद ही उनकी सेवा सदैव सृजन की ओर रही है, जिसे उन्होंने चित्रकारी व लेखन के जरिये परिवार, समाज व देश सेवा की ओर उन्मुख करने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि सृजन का समावेश सर्वांगीण विकास की ओर अग्रसर होता है। ऐसी ही प्रेरणा देने के उद्देश्य से उन्होंने इस काव्य संग्रह का प्रकाशन किया है। उन्होंने कहा कि यह काव्य संग्रह सभी के लिए प्रेरणादायी होगा, ऐसा उन्हें विश्वास है।

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