रघु राय और निर्मल पुर्जा को दी श्रद्धांजलि, ‘तपोवन–गंगोत्री’ स्लाइड शो ने खींचा ध्यान
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर उदय शंकर फोटोग्राफी अकादमी, अल्मोड़ा की ओर से 19 अगस्त को हिमालय जैफर गैलरी में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। फोटोग्राफी के प्रति समर्पित इस आयोजन में अकादमी के सदस्यों के अलावा नगर के नागरिकों, प्रकृति प्रेमियों और छायांकन में रुचि रखने वाले लोगों ने भागीदारी की।

कार्यक्रम का शुभारंभ अकादमी के सचिव जयमित्र सिंह बिष्ट ने किया। इस दौरान विश्वविख्यात छायाकार रघु राय और प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। दोनों के योगदान और उपलब्धियों को याद करते हुए उनके कार्यों पर चर्चा हुई।


जयमित्र सिंह बिष्ट ने रघु राय की फोटोग्राफी की विशिष्टताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी तस्वीरों ने भारतीय समाज और जीवन के अनेक रंगों को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। वहीं, नेपाल मूल के पर्वतारोही निर्मल पुर्जा के साहसिक अभियानों और पर्वतारोहण के क्षेत्र में बनाए गए कीर्तिमानों को भी याद किया गया। पाकिस्तान क्षेत्र में ब्रॉड पीक के समीप हिमस्खलन की घटना में निर्मल पुर्जा की मृत्यु पर उपस्थित लोगों ने शोक व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी महज तस्वीर खींचने की कला नहीं है, बल्कि यह समाज, संस्कृति, प्रकृति और पर्यावरण को समझने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण धरोहरों को सुरक्षित रखने का सशक्त माध्यम भी है।

हिमालय और ग्लेशियरों की बदलती तस्वीर पर चिंता
अकादमी के अध्यक्ष डॉ. महेंद्र सिंह मिराल ने हिमालयी क्षेत्र में अपने लंबे साहसिक पर्यटन एवं फोटोग्राफी अनुभवों को साझा किया। उन्होंने हिमालय के ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि बदलते पर्यावरणीय हालात हिमालयी क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।
उन्होंने हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता को कैमरे में दर्ज करने के साथ-साथ उसके संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
‘तपोवन–गंगोत्री’ स्लाइड शो रहा आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण अकादमी के उपाध्यक्ष चेतन कपूर द्वारा प्रस्तुत ‘तपोवन–गंगोत्री’ स्लाइड शो रहा। इसमें गंगोत्री घाटी से तपोवन तक की यात्रा को तस्वीरों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
स्लाइड शो में हिमालयी परिदृश्य, प्राकृतिक सौंदर्य, दुर्गम रास्तों और यात्रा के दौरान सामने आए विभिन्न अनुभवों को आकर्षक छायाचित्रों के जरिए दर्शाया गया। तस्वीरों के माध्यम से दर्शकों को हिमालय के बदलते और विविध रूपों से रूबरू होने का अवसर मिला।
तस्वीरों और कविताओं से हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंतिम चरण में देवेश बिष्ट ने हिमालयी छायाचित्रों के माध्यम से प्रकृति के विभिन्न रूप प्रस्तुत किए, जबकि वीरेंद्र सिंह सिजवाली की कविताओं ने आयोजन को साहित्यिक रंग दिया। छायाचित्र और कविता के इस मेल ने कार्यक्रम को भावपूर्ण बना दिया।
गोष्ठी के दौरान उत्तराखंड में पर्यटन की वर्तमान स्थिति पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने हिमालयी क्षेत्रों में तेजी से हो रहे सड़क निर्माण और उसके कारण प्रकृति एवं पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की। हिमालय के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में सारांश मंगोली, डॉ. महेंद्र सिंह मिराल, देवेश बिष्ट, वीरेंद्र सिंह सिजवाली, भारत साह, क्रांति जोशी, भूपेन्द्र मोहन पंत, मयंक कपकोटी, हेम रौतेला, गोकुल शाही, रमीज खान, वैभव जोशी सहित अकादमी के सदस्य और अन्य लोग मौजूद रहे।










