HomeUttarakhandAlmoraअल्मोड़ा: ठगी की आरोपी महिला को मिली जमानत, जानिए पूरा मामला !

अल्मोड़ा: ठगी की आरोपी महिला को मिली जमानत, जानिए पूरा मामला !

कोर्ट में किया था सरेंडर

​अधिवक्ता मनोज पंत की सशक्त पैरवी

CNE REPORTER, अल्मोड़ा। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय (SSJ University) के शिक्षकों को विनियमितीकरण (पक्का करने) का झांसा देकर लाखों की ठगी करने के मामले में नामजद अभियुक्ता प्रतीक्षा मधुकर को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अल्मोड़ा की अदालत ने जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया है।

अल्मोड़ा की अदालत ने फौजदारी वाद संख्या 379/2025 (राज्य बनाम प्रतीक्षा मधुकर) में अहम आदेश पारित करते हुए परिस्थितियों को देखते हुए अभियुक्ता की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला दिसंबर 2023 का है, जब एसएसजे परिसर अल्मोड़ा के कंप्यूटर विज्ञान विभाग में कार्यरत सहायक प्राध्यापक रवीन्द्र नाथ पाठक ने कोतवाली अल्मोड़ा में एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी । एफआईआर के अनुसार, वर्ष 2020 में विश्वविद्यालय बनने के बाद अस्थाई शिक्षकों ने विनियमितीकरण की मांग की थी।

आरोप है कि इसी दौरान साथी शिक्षक अरविंद पांडेय के माध्यम से उनकी मुलाकात श्रीमती प्रतीक्षा मधुकर और अधिवक्ता महेंद्र सिंह से हुई । महेंद्र सिंह ने खुद को उच्च न्यायालय का वरिष्ठ अधिवक्ता और शासन-प्रशासन में ऊंची पहुंच वाला व्यक्ति बताया । आरोप है कि उन्होंने शिक्षकों को पक्का करवाने के नाम पर प्रति व्यक्ति 6 लाख रुपये की मांग की ।

लाखों की ठगी और बाउंस हुए चेक

शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिक्षकों ने किश्तों में भारी धनराशि इन लोगों को दी । जब काफी समय बीतने के बाद भी काम नहीं हुआ, तो शिक्षकों ने पैसे वापस मांगे। दबाव बनाने पर प्रतीक्षा मधुकर ने रवीन्द्र नाथ पाठक के नाम पर 10-10 लाख रुपये के तीन चेक (सिंडिकेट बैंक) जारी किए। हालांकि, बैंक विलय के तकनीकी कारणों और अन्य वजहों से वे चेक कैश नहीं हो सके। इसके बाद आरोपियों द्वारा पैसे लौटाने के बजाय टालमटोल की जाने लगी और शिक्षकों को मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

कोर्ट की कार्यवाही और जमानत

पुलिस ने इस मामले में धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

सरेंडर: लंबे समय से चल रही विवेचना के बाद, अभियुक्ता प्रतीक्षा मधुकर ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अल्मोड़ा की अदालत में आत्मसमर्पण (Surrender) किया

अभियुक्ता प्रतीक्षा मधुकर पत्नी प्रवेश चंद सिमवाल, निवासी जवाहर ज्योति बेड़ीखत्ता, दमुआढूंगा, हल्द्वानी (जिला नैनीताल) ने न्यायालय में आत्मसमर्पण प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। इसके बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में लिया गया। तत्पश्चात उनके अधिवक्ता मनोज कुमार पंत द्वारा जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया।

बचाव पक्ष की दलीलें

बचाव पक्ष (अधिवक्ता मनोज कुमार पंत) ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि अभियुक्ता को मामले में झूठा फंसाया गया है और प्राथमिकी मनगढ़ंत तथ्यों पर आधारित है। अधिवक्ता ने कहा कि न तो अभियुक्ता द्वारा कोई धोखाधड़ी की गई और न ही किसी प्रकार का अवैध लाभ अर्जित किया गया। यह भी बताया गया कि विवेचना के दौरान अभियुक्ता को धारा 41(क) दंड प्रक्रिया संहिता का लाभ दिया गया था और उनकी गिरफ्तारी नहीं की गई थी। साथ ही अभियुक्ता ने जांच में पूर्ण सहयोग किया।

न्यायालय का अवलोकन

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पाया कि अभियुक्ता की गिरफ्तारी विवेचना के दौरान नहीं हुई थी, आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है और मामला मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा विचारणीय है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना यह माना कि प्रथम दृष्टया इस स्तर पर अभियुक्ता को जमानत दिए जाने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं।

न्यायालय का निर्णय: मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दया राम ने मामले की परिस्थितियों और यह देखते हुए कि आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल हो चुका है, अभियुक्ता को 30,000 रुपये के व्यक्तिगत बंध-पत्र और दो विश्वसनीय जमानती प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए।

जमानत स्वीकृत, ये हैं शर्तें

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दया राम ने अभियुक्ता प्रतीक्षा मधुकर की जमानत अर्जी स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि उन्हें 30,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र तथा समान राशि के दो सक्षम व विश्वसनीय जमानती प्रस्तुत करने पर, वाद की अवधि के दौरान जमानत पर रिहा किया जाए।

क्यों अहम है यह फैसला ?

यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आरोप पत्र दाखिल हो जाने और अभियुक्ता के सहयोगात्मक रवैये को देखते हुए, हिरासत की आवश्यकता नहीं है। साथ ही यह फैसला जमानत के सिद्धांतों—व्यक्तिगत स्वतंत्रता और न्यायिक संतुलन—को रेखांकित करता है।

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