बागेश्वर: दिनेश चंद्र भट्ट मृत्यु प्रकरण में पत्नी बरी

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अभियुक्त दोषमुक्त
अभियुक्त दोषमुक्त

अदालत बोली— आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हुए

सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर। ढाई वर्ष पुराने बहुचर्चित दिनेश चंद्र भट्ट मृत्यु प्रकरण में जिला एवं सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मृतक की पत्नी दया भट्ट को हत्या और साक्ष्य मिटाने के सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। सत्र न्यायाधीश पंकज तोमर की अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष भारतीय दंड संहिता की धारा 304 तथा 201 के तहत लगाए गए आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने में पूरी तरह असफल रहा।


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न्यायालय ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य, गवाहों के बयान और चिकित्सा संबंधी साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन की कहानी विश्वसनीय रूप से स्थापित नहीं हो सकी। ऐसे में अभियुक्ता को दोषी ठहराने का कोई ठोस आधार नहीं बनता।

क्या था पूरा मामला

यह मामला गरुड़ क्षेत्र के गोलू मार्केट में दिनेश चंद्र भट्ट की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु से जुड़ा है। घटना के बाद मृतक के भाई ने 28 मार्च 2024 को बैजनाथ थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि पारिवारिक विवाद के दौरान दया भट्ट ने अपने पति के साथ मारपीट की, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि घटना के बाद खून से सने कपड़ों को जलाकर साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया गया।

इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी, जिसके बाद प्रकरण सत्र न्यायालय में विचाराधीन रहा।

अदालत ने किन तथ्यों को माना महत्वपूर्ण

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि घटना की जानकारी परिजनों को पहले से होने के बावजूद एफआईआर लगभग नौ से दस दिन बाद दर्ज कराई गई। इस विलंब का संतोषजनक कारण अभियोजन प्रस्तुत नहीं कर सका।

मामले में जिन लोगों को अभियोजन ने प्रत्यक्षदर्शी गवाह बताया था, उन्होंने अदालत में अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं किया। एक प्रमुख गवाह ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसने पति-पत्नी के बीच हत्या जैसी कोई घटना नहीं देखी थी तथा दया भट्ट को अच्छे स्वभाव की महिला बताया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सक की गवाही भी बनी अहम

मामले में पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक की गवाही भी अदालत के निर्णय में महत्वपूर्ण साबित हुई। चिकित्सक ने स्वीकार किया कि मृतक के सिर पर आई चोटें गिरने के कारण भी संभव हो सकती थीं। इससे अभियोजन के हत्या संबंधी आरोपों को निर्णायक समर्थन नहीं मिला।

वहीं विवेचना अधिकारी की गवाही से यह तथ्य भी सामने आया कि घटना के तुरंत बाद दया भट्ट और परिवार के अन्य सदस्य स्वयं दिनेश चंद्र भट्ट को उपचार के लिए अस्पताल लेकर गए थे। न्यायालय ने इसे अभियोजन की उस कहानी के विपरीत माना, जिसमें अभियुक्ता पर जानबूझकर हत्या करने का आरोप लगाया गया था।

गवाहों के विरोधाभास और कमजोर परिस्थितिजन्य साक्ष्य बने आधार

मामले में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता हरीश जोशी ने अदालत के समक्ष दलील दी कि अभियोजन कोई ऐसा ठोस एवं विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया, जिससे आरोप संदेह से परे सिद्ध हो सकें।

अदालत ने भी अपने निर्णय में माना कि गवाहों के बयानों में परस्पर विरोधाभास है, एफआईआर दर्ज कराने में असामान्य विलंब हुआ और परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी पर्याप्त मजबूत नहीं हैं। इन सभी तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने अभियोजन का मामला संदेह से परे सिद्ध न मानते हुए दया भट्ट को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 एवं 201 के तहत लगाए गए सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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