शिवालिक कंपनी पर गंभीर आरोप
सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के तहसील काफलीगैर क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के साथ ही विवादों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। यहाँ शिवालिक कंपनी द्वारा गांव के बिल्कुल समीप स्थापित किए जा रहे डामर और क्रशर प्लांट ने ग्रामीणों के जीवन को दूभर कर दिया है। बार-बार विरोध के बावजूद कंपनी की हठधर्मिता के चलते अब ग्रामीणों ने प्रशासन से आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
धूल के गुबार में गुम होता बचपन और बुढ़ापा
ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट से उड़ने वाली बारीक धूल अब उनके घरों के भीतर तक पहुँच चुकी है। स्थिति इतनी विकराल है कि:
- दैनिक जीवन प्रभावित: घरों में रखे बर्तन, कपड़े और खाने-पीने की चीजों पर धूल की परत जम रही है।
- खेती-किसानी पर संकट: धूल के कारण खेत-खलिहान और पेड़-पौधे पूरी तरह सफेद हो चुके हैं।
- पशुपालन पर मार: चारागाहों पर धूल जमने से पशुओं को चारा नहीं मिल पा रहा है। धूल युक्त घास खाने से मवेशी बीमार पड़ रहे हैं, जिससे ग्रामीणों की आजीविका पर सीधा प्रहार हो रहा है।
“कंपनी की जिद, पर्यावरण का विनाश”
क्षेत्रवासियों का कहना है कि शिवालिक कंपनी को कई बार मौखिक और लिखित चेतावनी दी गई कि प्लांट को आबादी क्षेत्र से दूर शिफ्ट किया जाए। इसके बावजूद, कंपनी नियमों को ताक पर रखकर गांव के नजदीक ही संचालन की तैयारी कर रही है। इससे न केवल स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है, बल्कि क्षेत्र का प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) भी तबाह हो रहा है।
“विकास के नाम पर विनाश स्वीकार्य नहीं है। प्रशासन को यह समझना होगा कि एक कंपनी के मुनाफे के लिए पूरे गांव की सेहत और आजीविका को दांव पर नहीं लगाया जा सकता।” — स्थानीय ग्रामीण
प्रशासन तक पहुँचा मामला, वीडियो साक्ष्य प्रस्तुत
इस गंभीर मुद्दे पर अधिवक्ता पीसी टम्टा ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने जिलाधिकारी (DM) बागेश्वर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
अधिवक्ता टम्टा के मुख्य बिंदु:
- प्लांट का स्थानांतरण: डामर और क्रशर प्लांट को तत्काल आबादी और संवेदनशील पर्यावरण क्षेत्रों से दूर ले जाया जाए।
- डिजिटल साक्ष्य: प्रशासन को प्रदूषण और कंपनी की लापरवाही के वीडियो साक्ष्य भेजे गए हैं।
- कानूनी कार्रवाई: यदि प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाया, तो ग्रामीणों को आंदोलन के लिए विवश होना पड़ेगा।
क्या होगा अगला कदम?
काफलीगैर के ग्रामीणों को अब जिला प्रशासन से उम्मीद है कि वे मौके का मुआयना करेंगे और प्रदूषण फैला रही इकाइयों पर नकेल कसेंगे। क्या प्रशासन विकास की इस अंधी दौड़ में ग्रामीणों की सांसों की रक्षा कर पाएगा? यह आने वाला समय ही बताएगा।

