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UOU जल्द शुरू करेगा कई नवीन पाठ्यक्रम : कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी

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ऑटो-जेनरेटेड सुविधाओं के जरिए एक क्लिक में मिलेगी पूरी जानकारी

मीडिया से मुखातिब हुए नव नियुक्त कुलपति

सीएनई रिपोर्टर, हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (UOU) के नवनियुक्त कुलपति प्रो नवीन चंद्र लोहनी (Vice Chancellor Prof Naveen Chandra Lohani) ने कहा कि हम एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करने जा रहे हैं, जहां हर बच्चे तक विश्वविद्यालय की पहुंच हो। प्रयास है कि यदि विद्यार्थी कोई जानकारी चाहे तो कुछ ऐसी ऑटो-जेनरेटेड सुविधाएं मिलें कि बस एक क्लीक में उसे मुक्त विश्वविद्यालय से संबंधित तमाम जरूरी जानकारी मिल जाए।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में जल्द कुछ नवीन पाठ्यक्रमों का संचालन शुरू किया जायेगा। खास तौर पर क्षेत्रीय बोली—भाषाओं को संरक्षित रखने में मुक्त विश्वविद्यालय किस तरह से काम कर सकता है, इस पर मंथन किया जा रहा है। प्रो. लोहनी यहां विश्वविद्यालय के सेमीनार कक्ष में मीडिया से मुखातिब थे।

प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि कुलपति का दायित्व ग्रहण करना उनके लिए न केवल गर्व का विषय है, बल्कि एक बड़ा उत्तरदायित्व भी है। कुलपति प्रो नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि विश्वविद्यालय में जो कार्यक्रम पूर्व से संचालित हैं उन्हें आगे बढ़ाया जायेगा और यदि कोई कमी रही है तो उसे ठीक करने का प्रयास होगा।

उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से उत्तराखंड के प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुंच बनाना, शैक्षिक नवाचार को बढ़ावा देना और विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित बनाना उनकी प्राथमिकताएं हैं। भावी योजनाओं और दृष्टिकोण पर भी नव नियुक्त कुलपति ने विस्तार से प्रकाश डाला।

कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी

डिजिटल प्‍लेटफार्मों का करेंगे उपयोग

कुलपति प्रो नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि डिजिटल युग में विश्‍वविद्यालय के प्रचार-प्रसार के लिए जहां एक ओर सोशल मीडिया व अन्‍य डिजिटल प्‍लेटफार्मों का उपयोग किया जायेगा वहीं, प्रत्‍येक क्षेत्रीय कार्यालय पर जाकर क्षेत्रीय निदेशकों के सहयोग से सुगम से दुर्गम तक विश्‍वविद्यालय की शैक्षिक गतिविधियों का प्रचार–प्रसार किया जायेगा और विश्‍वविद्यालय के घ्‍येय वाक्‍य ‘उच्‍च शिक्षा आपके द्वार’ को धरातल पर लाने का प्रयास किया जायेगा ।

कुलपति ने क्षेत्रीय अध्ययन केंद्रों का सशक्तिकरण करने की बात कही। कहा कि राज्य के दूरदराज़ क्षेत्रों में मौजूद अध्ययन केंद्रों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित स्टाफ और बेहतर समन्वय के साथ पुनर्गठित किया जाएगा ताकि स्थानीय विद्यार्थियों को समय पर सहायता मिल सके।

इसके अलावा डिजिटल लर्निंग को सुदृढ़ बनाया जायेगा। ई-लर्निंग व्यवस्था को और सशक्त होगी, जिससे विद्यार्थियों को उन्नत, इंटरएक्टिव और सुलभ पाठ्यसामग्री उपलब्ध हो सके। वर्चुअल लैब, ऑडियो-विजुअल कंटेंट और MOOC आधारित कोर्सेज़ की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।

कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, हम रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों को प्रोत्साहित करेंगे। कौशल आधारित कार्यक्रम, इंटर्नशिप्स और इंडस्ट्री-एकेडमिक सहयोग को प्राथमिकता दी जाएगी। शोध की गुणवत्ता को सुधारने के लिए ‘अनुसंधान प्रोत्साहन नीति’ बनाई जाएगी। स्थानीय मुद्दों—जैसे पर्यावरण, पलायन, पर्यटन, जैव विविधता, भाषा और संस्कृति—को केंद्र में रखते हुए अनुसंधान कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। शिक्षार्थी शिकायत निवारण प्रणाली को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाएगा। परामर्श सत्रों पर विशेष जोर दिया जायेगा और साथ ही, करियर काउंसलिंग की सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी।

कुलपति प्रो लोहनी ने संस्कृति व भाषा संरक्षण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की लोकभाषाओं और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण हेतु विशेष शैक्षणिक पहल की जायेगी। यह विश्वविद्यालय राज्‍य का एक मात्र मुक्‍त विश्‍वविद्यालय है तथा देश में इग्‍नू के बाद सर्वाधिक कार्यक्रम संचालित करने वाला मुक्‍त विश्‍वविद्यालय है। यह केवल एक शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि उत्तराखंड के हजारों विद्यार्थियों की आशा का केंद्र है। मेरा प्रयास होगा कि हम सब मिलकर इसे एक ऐसे उत्कृष्ट विश्वविद्यालय में रूपांतरित करें, जो ज्ञान, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व का उदाहरण बने।

उत्तराखंड के साहित्यकारों को कैसे पहचानेगी भावी पीढ़ी !

एक सवाल के जवाब में कुलपति प्रो नवीन चंद्र लोहनी ने कहा कि उत्तराखंड के साहित्य व साहित्यकार तथा राज्य आंदोलनकारियों के विषय में मौजूदा पीढ़ी को जानकारी होनी चाहिए। कुमाऊं विश्वविद्यालय से वह इस विषय में चर्चा करेंगे।

प्रेस वार्ता के दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. खेमराज भट्ट, प्रो. गिरिजा पाण्डेय निदेशक क्षेत्रीय सेवाएं, प्रो. पी डी पंत निदेशक अकादमिक, परीक्षा नियंत्रक प्रो सोमेश कुमार, वित्त नियंत्रक एस पी सिंह एवं निदेशक पत्रकारिता एवं मीडिया अध्ययन प्रो. राकेश चंद्र रयाल मौजूद रहे।

जानिए, कौन हैं नव नियुक्त कुलपति प्रो. लोहनी

उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के नव नियुक्त कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी कीशिक्षा जगत में एक प्रशासक के रूप में अलग पहचान है। उनकी नियुक्ति से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक इकाई का सुधार होगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है।

सं​क्षेप में प्रो. लोहनी के निम्न विशेष उपलब्धियां व योगदान रहा —

  • उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) के नवनियुक्त कुलपति प्रो नवीन चंद्र लोहनी ने देश-विदेश में हिंदी भाषा के उत्थान और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • नई सदी के उपन्यास, पांच लाख का हिंदी मास्टर, खड़ी बोली की साहित्यिक विधाएं और व्यंग संग्रह जैसी उनेह 12 पुस्तकें और 85 शोध आलेख प्रकाशित।
  • उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के गांव पचार के मूल निवासी हैं प्रो.लोहनी।
  • साढ़े तीन दशक से अधिक लंबे अनुभव में स्विटजरलैंड के लौजान विश्वविद्यालय में रबींद्रनाथ टैगोर चेयर और चीन के शंघाई अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विवि के आइसीसीआर चेयर में विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे।
  • चीन में वह विदेश मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की प्रतिनियुक्ति पर गए थे।
  • 19 फरवरी, 1990 को एनआरईसी कालेज खुर्जा से शिक्षण सेवा शुरू करने वाले प्रो लोहनी 14 मई, 2002 से चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जुड़े हैं।
  • चौधरी चरण सिंह विवि में कार्यरत रहने के साथ ही प्रो. लोहनी राजकीय महाविद्यालय जेवर के प्रोफेसर इंचार्ज, उत्तराखंड भाषा संस्थान के सदस्य के साथ ही साहित्यिक सांस्कृतिक परिषद के संयोजक भी रहे।
  • अंतरराष्ट्रीय प्रेमचंद आलोचना सम्मान व उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान ने शब्द शिल्पी सम्मान से अलंकृत।
  • हिंदी की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति व शैक्षणिक कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में प्रवासी साहित्य पाठ्यक्रम के रूप में वर्ष 2009-10 से प्रारंभ किया।
  • स्थानीय भाषा व साहित्य को महत्व देने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सहयोग से वृहद शोध परियोजनाओं को पूरा किया।

    पूर्व प्रकाशित समाचार —
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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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