तीन दशकों का संघर्ष सफल, बसाए जाएंगे 120 परिवार
सीएनई रिपोर्टर, रामनगर
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित चुकुम गांव के लिए एक नई उम्मीद जगी है। 30 साल से विस्थापन का इंतजार कर रहे ग्रामीणों को आखिरकार एक नई जमीन पसंद आ गई है। प्रशासन ने हाल ही में रामनगर के हाथीडंगर क्षेत्र में लगभग 40 हेक्टेयर भूमि दिखाई है, जिस पर गांव के 120 परिवार बसने को तैयार हैं।
ग्रामीणों को पसंद आई हाथीडंगर की जमीन
नैनीताल जिले के रामनगर तहसील से करीब 24 किलोमीटर दूर स्थित आपदा प्रभावित चुकुम गांव के विस्थापन की प्रक्रिया में आखिरकार तेज़ी आती दिख रही है। तीन दशकों से सुरक्षित ठिकाने की तलाश कर रहे ग्रामीणों को प्रशासन द्वारा दिखाई गई नई ज़मीन पसंद आ गई है, जिससे उनके स्थायी पुनर्वास की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

रामनगर तराई पश्चिमी वन प्रभाग के आमपोखरा रेंज के अंतर्गत आने वाले हाथीडंगर क्षेत्र में प्रशासन ने 40 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की थी। शनिवार को जब ग्रामीणों को यह ज़मीन दिखाई गई, तो उन्होंने इस पर सहमति जताई। अगर सबकुछ योजना के अनुसार रहा, तो जल्द ही चुकुम गांव के लगभग 120 परिवारों को इस जगह पर स्थायी रूप से बसाया जा सकता है।
तीन दशक लंबा संघर्ष और चुनौतियाँ
चुकुम गांव के लोग 1993 से लगातार विस्थापन की मांग कर रहे हैं। यह गांव एक संवेदनशील वन क्षेत्र में स्थित है और हर साल बरसात में भारी मुश्किलों का सामना करता है।
जान का जोखिम: बारिश के मौसम में गांव बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाता है। ग्रामीणों, खासकर स्कूली बच्चों को, अपनी जान जोखिम में डालकर कोसी नदी पार करनी पड़ती है।
स्वास्थ्य और शिक्षा का अभाव:
गांव में न तो कोई स्वास्थ्य केंद्र है और न ही अच्छी सड़कें। बच्चों को पढ़ाई के लिए 3 किलोमीटर दूर स्थित मोहान इंटर कॉलेज तक पहुंचने के लिए कोसी नदी पार करनी पड़ती है, और बीमार होने पर 25 किलोमीटर दूर रामनगर जाना पड़ता है।
पिछली कोशिशें हुईं नाकाम
विस्थापन की कोशिशें पहले भी कई बार हो चुकी हैं, लेकिन वे सफल नहीं हो पाईं। 2016 का सर्वे: 2016 में एक सर्वे हुआ था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
जसपुर और आमपोखरा: जसपुर के केलाखेड़ा और फिर आमपोखरा में ज़मीन चिन्हित की गई, लेकिन ग्रामीणों ने मना कर दिया क्योंकि केलाखेड़ा की ज़मीन उन्हें पसंद नहीं आई, जबकि आमपोखरा में पहले ही पौधरोपण हो चुका था।
अब प्रशासन ने हाथीडंगर के प्लॉट नंबर 50 में नई भूमि चिन्हित की है, जिसे देखकर सभी ग्रामीण संतुष्ट हैं।
क्या कहते हैं ग्रामीण ?
ग्रामीणों ने इस फैसले पर खुशी जाहिर की है।
मोहन सिंह ने कहा, “हम लंबे समय से भटक रहे थे, लेकिन हाथीडंगर की ज़मीन देखकर हम सभी संतुष्ट हैं। हम यहीं बसने को तैयार हैं।”
महिला ग्रामीण लीला रावत ने बताया, “1993 से हम सिर्फ वादे सुन रहे थे। प्रशासन ने यह ज़मीन दिखाकर हमारी दशकों पुरानी मांग को गंभीरता से लिया है।”
युवा सौरभ कुमार ने कहा, “सभी ग्रामीण ज़मीन से संतुष्ट हैं। अगर यह जगह हमें मिलती है, तो हम निश्चित रूप से यहां बसेंगे।”
आगे की प्रक्रिया
उपजिलाधिकारी प्रमोद कुमार के अनुसार, अब प्रशासन सभी ग्रामीणों से शपथ पत्र लेकर एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करेगा। इस प्रस्ताव में ज़मीन के साथ-साथ पानी, सड़क, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था का भी खाका होगा। यह प्रस्ताव जल्द ही शासन को भेजा जाएगा। राज्य सरकार से अनुमति मिलते ही विस्थापन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
यह कदम चुकुम गांव के उन लोगों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है, जो तीन दशक से बेहतर और सुरक्षित जीवन की उम्मीद लगाए बैठे थे।
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