सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा : बग्वालीपोखर में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय ऐतिहासिक बग्वाली मेले (बग्वाई कौतिक) का शनिवार को भव्य समापन हो गया।

मेले के अंतिम दिन मीना बाजार में स्थानीय लोगों और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने जमकर खरीदारी की, जिससे पूरे बाजार में खासी रौनक देखने को मिली। इस वर्ष भी बाहरी राज्यों से आए व्यापारियों ने मेले में अपनी दुकानें लगाकर व्यापार को बढ़ावा दिया।
ऐतिहासिक महत्व पर जोर:
बग्वाली मेले का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व विधायक महेश नेगी ने किया था। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि बग्वाली कौतिक का ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व है और यह पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने मेला समिति की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से यह मेला नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
अतिथियों ने बढ़ाया मान:
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद ब्लाक प्रमुख आरती किरौला ने अपने बचपन की यादें साझा करते हुए कहा कि इस मेले को वह वर्षों से देखती आ रही हैं, और आज एक ब्लॉक प्रमुख के रूप में इसमें शामिल होना उनके लिए और भी अधिक गर्व का विषय है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नवीन पांडे ने ऐसे आयोजनों को प्रेरणादायक और उत्साहवर्धक बताया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम:
बग्वाली मेले का मुख्य आकर्षण यहाँ के मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे। झंकार लोक कला समिति बागेश्वर और नव हिमालयन कला केंद्र अल्मोड़ा के कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से मेले में समां बांध दिया। कलाकारों ने झोड़ा, चांचरी, न्योलिक और छपेली जैसे पारंपरिक लोक नृत्यों के साथ-साथ प्रसिद्ध कुमाऊनी-गढ़वाली गीतों, जिनमें ‘हिट दगड़ी कमला’ और ‘अल्मोड़ा में मेरो बंगला…’ जैसे गीत शामिल थे, पर एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी। विभिन्न विद्यालयों के बच्चों और क्षेत्रीय कलाकारों ने भी अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन कर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी।
मेला को सफल बनाने में मेला समिति अध्यक्ष सूबेदार मेजर हरी सिंह भंडारी, सचिव प्रमोद जोशी, सांस्कृतिक सचिव डॉ. दीपक मेहता, संयोजक संतोष बिष्ट, त्रिभुवन बिष्ट, विनोद अधिकारी, जीवन अधिकारी, राजेन्द्र किरौला, घनश्याम भट्ट, केएस मेहता, हरीशरण शर्मा, शिवदत्त पांडे, कुंदन भंडारी, हेम जोशी, पंकज बिष्ट, आशुतोष शाही, प्रमोद तिवारी, मोहन सिंह बिष्ट, भूपाल भरड़ा, मनोहर सिंह भंडारी आदि ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।

