नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर। देवभूमि के एक और वीर सपूत ने राष्ट्र की वेदी पर अपने प्राणों की आहुति दे दी। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकियों से लोहा लेते हुए वीरगति को प्राप्त हुए हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया का पार्थिव शरीर जब मंगलवार को उनके गृह जनपद बागेश्वर पहुँचा, तो मानों पहाड़ की हवाएं भी गमगीन हो उठीं। कपकोट की माटी अपने लाडले के स्वागत के लिए गर्व और आंसू, दोनों के साथ खड़ी थी।

जैसे ही सैन्य हेलीकॉप्टर शहीद का पार्थिव शरीर लेकर पीजी कॉलेज ग्राउंड उतरा, पूरा क्षेत्र “भारत माता की जय” और “शहीद गजेंद्र सिंह अमर रहें” के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। अपने लाल को तिरंगे में लिपटा देख माता चंद्रा देवी और पिता धन सिंह का कलेजा फट पड़ा, लेकिन आंखों में आंसुओं के साथ चेहरे पर बेटे की शहादत का गौरव भी साफ झलक रहा था। पत्नी लीला देवी की सुबकियों ने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं।

पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ दी गई विदाई
शहीद के अंतिम संस्कार से पूर्व सेना की 19 सिख रेजिमेंट की टुकड़ी ने उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया। सैन्य अधिकारियों ने हवलदार गजेंद्र सिंह के अदम्य साहस को नमन करते हुए कहा कि उनका यह सर्वोच्च बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और देश की आने वाली पीढ़ियां उनके शौर्य से प्रेरणा लेंगी।
शहीद का अंतिम संस्कार सरयू–खीरगंगा संगम पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। अंतिम विदाई के समय शहीद के पिता धन सिंह, माता चंद्रा देवी, पत्नी लीला देवी सहित परिजनों की आंखें नम थीं, लेकिन सीना गर्व से चौड़ा था। बीथी गांव सहित समूचे क्षेत्र ने अपने वीर सपूत को नम आंखों और गर्व के साथ अंतिम सलामी दी।
लोगों ने एक स्वर में कहा कि हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए देशभक्ति और साहस की अमिट प्रेरणा रहेगा।
इस अवसर पर जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे, पैरा लेफ्टिनेंट कर्नल हरी लुइस, विधायक सुरेश गड़िया, दर्जा राज्य मंत्री शिव सिंह विष्ट, उपजिलाधिकारी अनिल चनयाल, सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल विजय मनराल सहित जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, सेना के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

