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शिक्षक दिवस पर कविता

गुरु वो है जो जीना सिखा दे ,
हर मुश्किल को आसान बना दे, अगर डगमगाए कदम हमारे ,
तो हमें सही पथ दिखा दे ,मिट्टी के पुतले में ज्ञान का भंडार भर दें ,
व जीवन का सही अर्थ बता दे|
गुरु वो है………

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सोचो कभी गुरु नहीं होते, तो ज्ञान नहीं होता ,अंधकार भरे जीवन में प्रकाश नहीं होता, समाज का कोई कल्याण नहीं होता, बिना गुरु के कोई ज्ञान नहीं होता , गुरु ही है जो मंजिल की सही राह दिखा दे , चुभते कांटो को पुष्प बना दे|
गुरु वो है……..

नन्ही सी कली में जान डाल देते हैं, उसको महकते फूल का आकार देते हैं ,क्या कहने ऐसे रचनाकार के जो बिन सुगंध के पुष्प को सुगंध प्रदान कर दे |
गुरु वो है जो जीना सिखा दे,
हर मुश्किल को आसान बना दे।


प्रदीप दुम्का
दौलिया नं- 1 हल्दूचौड

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