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..मैं पुष्कर सिंह धामी शपथ लेता हूं कि ! तो क्या तोड़ पायेंगे स्व. एनडी तिवारी का रिकार्ड

सीएनई डेस्क

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उत्तराखंड के 12वें मुख्यमंत्री के रूप में युवा नेता पुष्कर सिंह धामी ने शपथ ले ली है। उन्हें राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री धामी की टीम में सतपाल महाराज, सौरभ बहुगुणा, प्रेम चंद अग्रवाल, गणेश जोशी, चंदन रामदास, सुबोध उनियाल, रेखा आर्य और धन सिंह रावत को जगह मिली है। धामी के दोबारा सीएम बनने के बाद अब आगे यही देखना है कि उत्तराखंड प्रदेश के इतिहास में राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर सबसे अधिक दिन तक नेतृत्व करने वाले स्व. एनडी तिवारी का रिकार्ड मौजूदा सीएम रिकार्ड तोड़ पायेंगे या नहीं।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2000 में उत्तराखंड के यूपी से अलग होने के बाद बीजेपी ने नित्यानंद स्वामी के सिर मुख्यमंत्री ताज पहनाया था। उन्होंने कुछ समय के लिए अंतरिम सरकार को संभाला भी, लेकिन फिर एक साल पूरा होने से पहले ही उनकी जगह भगत सिंह कोश्यारी को मुख्यमंत्री बना दिया गया था।

बताया जाता है कि तब 2002 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने ये बड़ा फैसला लिया था। यह अलग बात है कि पार्टी का यह दांव उलटा पड़ा और तब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार बनाने में कामयाब हो गई। ज्ञात रहे कि साल 2002 में संपन्न पहले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की सरकार जब बनी तो पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेता नारायण दत्त तिवारी को मुख्यमंत्री बनाया था।

तिवारी ने तब 5 साल का कार्यकाल पूरा किया। हालांकि उन्हें उस दौरान काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कहा जाता है कि तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हरीश रावत ने कई दफा उनके खिलाफ मोर्चा खोला था। यह बात अलग है कि तब तमाम भीतरी विरोधों के बावजूद एनडी तिवारी ने बड़ी कुशलता से अपनी सरकार बचायी और पूरे पांच साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया।

इसके बाद वर्ष 2007 में हुए चनाव में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की उत्तराखंड में वापसी हुई। तब सीएम के रूप में मेजर जनरल बीसी खंडूरी को चुना गया। यह अलग बात है कि खंडूरी भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। 834 दिनों तक सत्ता संभालने के बाद भाजपा में खंडूरी के खिलाफ बगावत हो गई।

जिसके बाद भाजपा ने रमेश पोखरियाल निशंक को राज्य का 5वां सीएम बनाया गया। निशंक भी शेष बचे कार्यकाल को पूरा नहीं कर पाए और फिर राज्य की बागडोर बीसी खंडूरी को सौंप दी गई।

इसके बाद वर्ष 2012 एक बार फिर कांग्रेस का दौर आया। तब हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा से कांग्रेस ने सत्ता छीन ली और कांग्रेस ने विजय बहुगुणा को सीएम बनाया। इसके बावजूद बहुगुणा का कार्यकाल भी राजनीतिक अस्थिरता की भेंट चढ़ गया। कहा जाता है कि 2013 की केदारनाथ में आई भयानक बाढ़ सीएम विजय बहुगुणा को भी बहा ले गई। तब बहुगुणा के खिलाफ नाराजगी को देख कांग्रेस ने हरीश रावत को उत्तराखंड की बागडोर सौंपी, लेकिन हरीश रावत के लिए सीएम की कुर्सी स्थाई नहीं रही। 02 साल बाद पार्टी नेताओं ने उनके खिलाफ बगावत कर दी। उनसे नाराज चल रहा एक धड़ा सीधे बीजेपी से जा मिला और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने जरूर हरीश रावत को उस मामले में राहत दी, लेकिन उन्हें उनकी किस्मत का ज्यादा साथ नहीं मिला।

2017 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को फिर भारी बहुमत मिला। 57 विधायकों के साथ तब त्रिवेंद्र रावत की सरकार बन गई, लेकिन फिर भाजपा में अस्थि​रता का दौर चला और त्रिवेंद्र की बजाए तीरथ रावत सीएम बने। मात्र 116 दिन के बाद तीरथ ने भी इस्तीफा दे दिया। भले ही तब तीरथ के इस्तीफे के पीछे संवैधानिक संकट का हवाला दिया गया, लेकिन तब जो अस्थिरता का दौर था उससे सभी वाकिफ हैं। फिर बारी आई पुष्कर सिंह धामी की। धामी ने 04 जुलाई 2021 से 23 मार्च 2022 तक यानी 260 दिन तक प्रदेश का नेतृत्व किया, लेकिन अब पुन: प्रचंड बहुमत से भाजपा की वापसी के साथ उन्हें मुख्यमंत्री का पद सौंप दिया गया है। पूरे प्रदेश की जनता को उनसे बहुत उम्मीदे हैं। जनता यह भी जानना चाह रही है कि क्या इस बार सीएम धामी अपना कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा कर पायेंगे। या फिर ​किसी कारणवश प्रदेश को पुन: अस्थिरता के दौर से गुजरना पड़ेगा।

आइये, जानते हैं ​अब तक पृथक राज्य गठन के बाद से किस मुख्यमंत्री का कितना कार्यकाल रहा है —

  • नित्यानंद स्वामी- 354 दिन (9 नवंबर 2000-29 अक्तूबर 2001)
  • भगत सिंह कोश्यारी- 122 दिन (30 अक्तूबर 2001-01 मार्च 2002)
  • एनडी तिवारी- पांच साल पांच दिन (02 मार्च 2002-07 मार्च 2007)
  • जनरल बीसी खंडूड़ी- दो साल 111 दिन (07 मार्च 2007-26 जून 2009)
  • डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक- दो साल 75 दिन(27 जून 2009-10 सितंबर 2011)
  • मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी (सेनि)- 184 दिन(11 सितंबर 2011-13 मार्च 2012)
  • विजय बहुगुणा- एक साल 324 दिन(13 मार्च 2012-31 जनवरी 2014)
  • हरीश रावत- दो साल 55 दिन(01 फरवरी 2014-27 मार्च 2016)
  • राष्ट्रपति शासन- 25 दिन(27 मार्च 2016-21 अप्रैल 2016)
  • हरीश रावत- एक दिन(21 अप्रैल 2016-22 अप्रैल 2016)
  • राष्ट्रपति शासन- 19 दिन(22 अप्रैल 2016-11 मई 2016)
  • हरीश रावत – 311 दिन(11 मई 2016-18 मार्च 2017)
  • त्रिवेंद्र सिंह रावत- तीन साल 357 दिन(18 मार्च 2017-10 मार्च 2021)
  • तीरथ सिंह रावत- 116 दिन(10 मार्च 2021-04 जुलाई 2021)
  • पुष्कर सिंह धामी- 260 दिन(04 जुलाई 2021-23 मार्च 2022)
  • पुष्कर सिंह धामी — 23 मार्च, 2022 दोबारा शपथग्रहण

धामी सबसे युवा, एनडी सबसे बुजुर्ग सीएम

मौजूदा सीएम पुष्कर सिंह धामी सबसे कम 45 साल में सीम बने। वहीं स्व. एनडी तिवारी ने उत्तराखंड प्रदेश की बागडोर 73 साल की आयु में सम्भाली थी। बताया जाता है कि 02 मार्च 2002 को उत्तराखंड में सीएम पद की शपथ लेने के दिन एनडी 76 साल चार महीने 15 दिन थी। वहीं दूसरे सबसे बुजुर्ग पहली अंतरिम सरकार के सीएम नित्यानंद स्वामी थे, जो 73 साल चार माह की उम्र में सीएम बने थे।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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