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धौलछीना : अव्यवस्थाओं का गढ़ बनी एसबीआइ की धौलछीना शाखा, कभी भी फूट सकता है दबा गुस्सा, एक अदद पासबुक के लिए तक काटने पड़ रहे चक्कर

दरबान रावत, धौलछीना (अल्मोड़ा)
तिथि : 11 सितंबर, 2020

जहां एक ओर कोरोनाकाल में लोग परेशान चल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विकासखंड भैसियाछाना के धौलछीना क्षेत्र के लोग बैंक संबंधी दिक्कतों से आजिज आ चुके हैं। वजह है कि स्टेट बैंक की धौलछीना शाखा अव्यवस्थाओं का गढ़ बन गया है। न तो कर्मचारी पूरे, न एटीएम व प्रिंटर ठीक। आरोप है कि सुविधाएं तो दूर, व्यवहार तक ठीक नहीं हो रहा है। गत जून माह में ताला जड़ने के बावजूद सुधार नहीं आया। अब​​ स्थिति ये है कि जनता में दबा गुस्सा कभी भी फूट सकता है।
घिसी—पिटी सेवाओं को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले भारतीय स्टेट बैंक की शाखा धौलछीना का हाल ये है कि तीन महीनों से प्रिंटर खराब है। जिससे ग्राहक भारी फजीहत उठा रहे हैं। स्थिति ये है कि ग्राहकों की नई पासबुक नहीं बन पा रही है। वर्तमान में सरकार की विभिन्न डिजिटल योजनाओं के लिए आनलाइन बैंक पासबुक की छायाप्रति मांगी जा रही है, लेकिन बैंक शाखा में प्रिंटर खराब होने से वह भी नसीब नहीं हो पा रही है। ग्रामीण दूरदराज से हर रोज पासबुक बनवाने व नई पासबुक बनवाने के लिए बैंक शाखा में पहुंच रहे हैं। मगर हर बार उन्हें प्रिंटर खराब होने की बा​त करके दुत्कार कर वापस भेज दिया जाता है। लोग मायूस लौट जाते हैं। हालत ये है कि पिछले तीन महीनों में करीब साढ़े सात सौ से अधिक स्कूली बच्चों समेत ग्राह पासबुक के इंतजार में हैं। मगर बैंक प्रबंधन घिसी पिटी व्यवस्था से काम चलाने पर अडिग है। बैंक में कभी प्रिंटर मशीन, तो कभी कंप्यूटर खराब हो जाना आम बात है। अर्से से खराब पड़ा एटीएम आज तक ठीक नहीं हो पाया। बैंक में लगी पासबुक एंट्री मशीन अक्सर खराब ही रहती है।
इस बैंक शाखा में करीब साढ़े चार हजार से अधिक उपभोक्ता जुड़े हैं। बैंक शाखा में कर्मचारियों के पद भी रिक्त हैं। बैंक शाखा सिर्फ बैंक मैनेजर समेत 2 कर्मचारी व एक कैशियर के सहारे चल रहा है। इसी सप्ताह कैश ऑफिसर का भी तबादला हो चुका है। टोकन की व्यवस्था नहीं होने से ग्राहकों को घंटों चेक व पासबुक हाथ में लेकर लाइन में इंतजार करना पड़ता है। कई बार तो खड़े खड़े बुजुर्ग उपभोक्ता गश खाकर गिर पड़ते हैं। ग्राहकों के बैठने और पानी की उचित व्यवस्था तक नहीं है। वर्तमान में कोरोनाकाल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन संभव नहीं हो रहा है। उपभोक्ताओं की मौखिक शिकायतें हैं कि बैंक स्टाफ का ग्राहकों के प्रति व्यवहार भी ठीक नहीं रहता। यहां उल्लेखनीय है कि बैंक की अव्यवस्थाओं को लेकर व्यापार मंडल धौलछीना एवं प्रधान संगठन भैंसियाछाना ने स्थानीय लोगों व ग्राहकों के साथ 29 जून, 2020 को बैंक शाखा में तालाबंदी कर दी थी। तब एसबीआई के रीजनल ऑफिसर अल्मोड़ा तथा बैंक के उच्चाधिकारियों ने आश्वासन दिया कि दो—तीन माह के अंदर बैंक की व्यवस्था ठीक कर ली जाएगी। लिखित आश्वासन के बाद बैंक में जड़ा ताला खुला था, लेकिन दो माह बीत गए, स्थिति बद से बदतर होते जा रही है। बदलाव सिर्फ इतना हुआ कि शाखा प्रबंधक बदल दिए गए।
क्या कहते हैं शाखा प्रबंधक :— एसबीआई के शाखा प्रबंधक गुलशन कुमार कहते हैं कि खराब प्रिंटर को ठीक करवाने के लिए भिजवाया है और नये प्रिंटर के लिए मांग की गई है। जल्द ही समस्या दूर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि एटीएम ठीक कराने की प्रक्रिया चल रही है और कुछ समस्याएं बैंक के स्टाफ की कमी के चलते बनी हुई है। जिन्हें सुधारा जाएगा।
अब आंदोलन की चेतावनी :— व्यापार मंडल धौलछीना के अध्यक्ष डीएस रावत तथा प्रधान संगठन के अध्यक्ष चंदन सिंह मेहरा ने बैंक शाखा पर आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से बैंक ने ग्राहक गोष्टी तक नहीं कराई है। उन्होंने कहा कि अब बैंक की अव्यवस्थाओं को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा जाएगा और फिर आंदोलन किया जाएगा।
ये हैं ग्राहकों की शिकायतें :— (मामला—1) ग्राम उटियां की महिला रीता नेगी का कहना है कि उन्होंने लगभग एक माह पूर्व अपना खाता खुलवाया और वह गर्भवती हैं। उनसे आंगनबाड़ी केंद्र द्वारा खाता नंबर मांगा जा रहा है। इसके लिए वह कई बार बैंक के चक्कर काट चुकी हैं, मगर अभी तक उन्हें पासबुक नहीं मिली। (मामला—2) ग्राम खाकरी निवासी आरती तिवारी बताती हैं कि डेढ़ महीना पहले खाता खुलवाया है और गौरा देवी कन्या धन योजना के लिए पासबुक की छायाप्रति चाहिए। वह 4—5 बार बैंक के चक्कर काट चुकी हैं, लेकिन अभी तक पासबुक नहीं मिल पाई है। वह कहती हैं कि एक बार उन्हें बैंक तक आने—जाने में 100 रूपये खर्च करने पड़ते हैंं। (मामला—3) ग्राम कलौन निवासी माया देवी ने बताया कि उन्होंने गत जून में खाता खुलवाया था, तब से अब तक कितनी बार पासबुक के लिए बैंक आ चुकी हैं। हर बार प्रिंटर का बहाना बनाकर वापस भेज दिया गया। (मामला—4) ग्राम दियारी निवासी आनंद सिंह बताते हैं कि गत जुलाई में उन्होंने बैंक में खाता खुलवाया था। तब से अब तक तीन किस्त भी जमा कर चुके हैं, मगर पासबुक अभी तक नहीं मिली।
ऐसे ही तरह—तरह की परेशानियां लोग बताते रहते हैं। मगर कोई सुनने वाला नहीं हैं। मानो बैंक प्रबंधन को जनसरोकारों से कोई लेना—देना नहीं रह गया है।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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