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फागोत्सव–2026: लोक संस्कृति, कला और एकता का भव्य संगम

CNE REPORTER, अल्मोड़ा/रानीखेत। Ministry of Culture, Government of India एवं उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, पटियाला के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित छह दिवसीय फागोत्सव–2026 का भव्य आयोजन 10 फरवरी 2026 से 15 फरवरी 2026 तक सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा के विभिन्न प्रमुख स्थलों पर सम्पन्न हुआ। महोत्सव का समापन शिव मंदिर धर्मशाला, रानीखेत में अत्यंत उत्साहपूर्ण और उल्लासपूर्ण वातावरण के बीच संपन्न हुआ।

यह सांस्कृतिक महोत्सव क्षेत्र में लोक परंपराओं के संरक्षण, सांस्कृतिक एकता के संवर्धन और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। छह दिनों तक चले इस आयोजन ने अल्मोड़ा एवं रानीखेत सहित पूरे कुमाऊं क्षेत्र को लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया।


अल्मोड़ा के प्रमुख स्थलों पर हुआ आयोजन

फागोत्सव–2026 के अंतर्गत ग्राम सत्यो, लक्ष्मी भंडार हुक्का क्लब अल्मोड़ा, शारदा पब्लिक स्कूल अल्मोड़ा, मेडिकल कॉलेज पड़ेखोला अल्मोड़ा तथा स्प्रिंग डेल्स स्कूल अल्मोड़ा सहित अनेक स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। प्रत्येक स्थल पर दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों को खूब सराहा गया।


देशभर की लोक कलाओं ने मोहा मन

फागोत्सव–2026 में देश के विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों ने अपनी पारंपरिक नृत्य एवं गायन प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

  • जम्मू-कश्मीर के कलाकारों ने वच नगमा एवं रूफ नृत्य प्रस्तुत कर कश्मीर की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक दिखाई।
  • पंजाब के लोक कलाकारों ने भांगड़ा एवं जिन्दुवा नृत्य की ऊर्जावान प्रस्तुति से वातावरण को जोश और उमंग से भर दिया।
  • हरियाणा के कलाकारों ने फाग, घूमर एवं शिव स्तुति प्रस्तुत कर दर्शकों को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभूति कराई।
  • राजस्थान के प्रसिद्ध भवाई कलाकार सुरेश व्यास ने भवाई नृत्य की शानदार प्रस्तुति से सभी को अचंभित कर दिया।
  • उत्तर प्रदेश (मथुरा) से आए कलाकारों ने मयूर नृत्य एवं बरसाने की प्रसिद्ध लठमार होली का सजीव मंचन कर दर्शकों को रोमांचित किया।
  • उत्तराखंड के स्थानीय कलाकारों ने छपेली नृत्य एवं पारंपरिक लोकगीतों से अपनी सांस्कृतिक पहचान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

लोकगीतों ने रचा मधुर समां

उत्तराखंड के लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत मधुर लोकगीतों ने पूरे वातावरण को लोकमय बना दिया। इस दौरान नवीन पाठक, महिपाल मेहता, रुचि आर्या, कल्याण बोरा एवं ज्योति कोहली की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया और देर तक तालियों की गूंज सुनाई देती रही।


सशक्त मंच संचालन और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

मंच संचालन ललित मोहन बिष्ट द्वारा किया गया। समापन समारोह में सहायक निदेशक रवीन्द्र शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ पटियाला से आए सुशील कुमार एवं भान सिंह ने भी कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।

इसके अतिरिक्त प्रकाश बिष्ट, जनार्दन उप्रेती, पान सिंह बिष्ट, अमर सिंह बोरा, मनोज कनवाल, जगदीश अग्रवाल एवं रमेश भंडारी सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति ने समापन समारोह को और भी भव्य बना दिया।


स्थानीय नागरिकों एवं दर्शकों ने फागोत्सव–2026 की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए इसे सांस्कृतिक एकता, लोक परंपराओं के संरक्षण और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने वाला ऐतिहासिक आयोजन बताया। लोगों ने भविष्य में इस महोत्सव को और अधिक भव्य एवं दिव्य स्वरूप में आयोजित करने की अपेक्षा भी व्यक्त की।


लोक संस्कृति की अमिट छाप छोड़ गया फागोत्सव–2026

छह दिवसीय यह सांस्कृतिक महोत्सव “विविधता में एकता” का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा और अपने भव्य समापन के साथ लोक संस्कृति की अमिट छाप जनमानस के हृदय में छोड़ गया। आयोजकों ने सभी कलाकारों, सहयोगियों एवं क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया।

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