हत्या के बाद आरोपी छात्र ने भी कर लिया सुसाइड
CNE DESK/तरनतारन | पंजाब के तरनतारन से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने न केवल शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि ‘एकतरफा प्यार’ के उस भयानक चेहरे को भी उजागर किया है जो खून का प्यासा हो जाता है। एक लॉ कॉलेज के भीतर, जहां छात्रों का भविष्य गढ़ा जाना था, वहां चंद पलों में मौत का खूनी खेल खेला गया।
वह सपना जो क्लासरूम में ही दम तोड़ गया
मृतका संदीप कौर (20), जो लॉ फर्स्ट ईयर की छात्रा थी, सोमवार सुबह हमेशा की तरह अपने सुनहरे भविष्य के सपने लेकर कॉलेज पहुंची थी। सीसीटीवी फुटेज में सुबह 9:16 बजे तक सब कुछ सामान्य दिख रहा था। संदीप अपनी सहेली के साथ पिछली बेंच पर बैठी थी। तभी उसके साथ पढ़ने वाला प्रिंसराज सिंह वहां पहुंचता है। कुछ ही पलों की बातचीत के बाद, प्रिंसराज अपने बैग से पिस्टल निकालता है और संदीप के सिर में गोली मार देता है। संदीप के गिरने के तुरंत बाद, उसने खुद को भी खत्म कर लिया।
“बेटी को चोट लगी है…” — मां का कलेजा छलनी करने वाला झूठ
संदीप की मां हरजिंदर कौर का विलाप पत्थर को भी पिघला दे। उन्होंने बताया कि उन्हें कॉलेज से फोन आया कि “बेटी का छोटा सा झगड़ा हुआ है और उसे चोट लगी है।” लेकिन जब वह बदहवास होकर कॉलेज पहुंचीं, तो वहां उनकी लाडली खून से लथपथ निर्जीव पड़ी थी। 6 बहनों और एक छोटे भाई के भविष्य की उम्मीद संदीप, उस सिस्टम की बलि चढ़ गई जहां हथियारों की जांच के लिए कोई गेट कीपर नहीं था।
जागरूकता संदेश: क्या हमारे शिक्षण संस्थान सुरक्षित हैं? एक छात्र बैग में हथियार लेकर क्लासरूम तक पहुंच जाता है और किसी को भनक तक नहीं लगती। यह केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है।
इंकार की सजा मौत: क्यों युवाओं में घट रहा है धैर्य?
पुलिस जांच के अनुसार, मामला एकतरफा प्यार और सिरफिरेपन का है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने 8 फरवरी (वेलेंटाइन वीक) को संदीप को प्रपोज किया था, जिसे उसने ठुकरा दिया था क्योंकि उसकी सगाई हो चुकी थी।
यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है:
- सहमति का सम्मान: “ना” का मतलब “ना” होता है, इसे स्वीकार करना युवाओं को सिखाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
- मानसिक स्वास्थ्य: क्या हम अपने बच्चों को हार या इनकार बर्दाश्त करना सिखा पा रहे हैं?
- सुरक्षा में चूक: कॉलेज परिसर में हथियार का पहुंचना यह दर्शाता है कि प्रबंधन केवल फीस लेने तक सीमित है, बच्चों की जान की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता में नहीं है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
एसीपी जगबीर सिंह के अनुसार, पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि हथियार कहां से आया? क्या वह अवैध था या घर का लाइसेंसी हथियार? कॉलेज को सील कर दिया गया है और परिजनों की मांग पर प्रबंधन की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।

