HomeCrimeकुख्यात संजय यादव रहस्यमयी हालात में ढेर, नाखून उखड़े, सड़क किनारे लाश

कुख्यात संजय यादव रहस्यमयी हालात में ढेर, नाखून उखड़े, सड़क किनारे लाश

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9 दिन तक पुलिस और शहर को छकाने वाला हिस्ट्रीशीटर संजय यादव सड़क किनारे लहूलुहान मिला — नाखून उखड़े, शरीर पर गहरी चोटें, मौत रहस्यमयी

लखनऊ में स्कूटी पर लात मारने वाले स्नेचर संजय यादव की हत्या

लखनऊ को हिला देने वाली चेन स्नेचिंग और कारोबारी अतुल जैन की मौत के बाद, पुलिस जिसकी तलाश में दिन-रात खाक छान रही थी, वह हिस्ट्रीशीटर संजय यादव सोमवार सुबह सीतापुर की सड़क किनारे झाड़ियों में मृत पड़ा मिला।

शरीर पर चोटों के गहरे निशान थे। पैरों के नाखून तक उखड़े हुए थे। चेहरा विकृत, नाक-मुँह से झाग निकल रहा था। साफ है—संजय की मौत किसी सामान्य हादसे से नहीं, बल्कि बेरहमी से की गई हत्या है।

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9 दिन से फरार, अब लाश में तब्दील

20 सितंबर को लखनऊ के गुडंबा इलाके में कारोबारी अतुल जैन की जान लेने वाली चेन स्नेचिंग का मास्टरमाइंड यही संजय यादव था। घटना के बाद से वह पुलिस और इलाके दोनों के लिए सिरदर्द बना हुआ था।

संयुक्त पुलिस आयुक्त (जेसीपी) बबलू कुमार तक ने संजय पर 1 लाख के इनाम का प्रस्ताव भेज दिया था। लखनऊ पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही थीं। पर हर बार संजय हाथ से निकल जाता।

लेकिन 9 दिन बाद, पुलिस की गिरफ़्त से बचने वाला वही बदमाश रहस्यमयी हालात में सीतापुर के नीलगांव में लाश बनकर पड़ा मिला।


वह वारदात जिसने शहर को हिला दिया था

20 सितंबर की सुबह। कारोबारी अतुल जैन जिम से लौट रहे थे। तभी अपाचे बाइक पर सवार संजय यादव और उसका ममेरा भाई अरविंद वर्मा सामने आए। चेन छीनी और फरार होने लगे।

अतुल ने हिम्मत दिखाई और स्कूटी से पीछा किया। स्पीड 80 किमी/घंटा। तभी बाइक के पीछे बैठे संजय ने बेरहमी से अतुल की स्कूटी पर लात मारी।

बदमाश द्वारा इस तरह मारे गए थे कारोबारी अतुल जैन
बदमाश द्वारा इस तरह मारे गए थे कारोबारी अतुल जैन

स्कूटी बेकाबू हुई। अतुल 20 मीटर दूर खड़े पिकअप से टकराए। सिर फट गया। वहीं स्कूटी 50 मीटर तक घिसटती चली गई। सड़क पर खून बहता रहा और कुछ ही देर में कारोबारी ने दम तोड़ दिया।

CCTV सामने आया तो पूरा शहर सन्न रह गया।


भाई पकड़ा गया, संजय भाग निकला

25 सितंबर को जानकीपुरम में चेकिंग के दौरान संजय और अरविंद पुलिस के हत्थे चढ़ने ही वाले थे। मुठभेड़ हुई। अरविंद गोली खाकर गिरफ्तार हुआ। लेकिन संजय अंधेरे का फायदा उठाकर फिर भाग निकला।

तभी से पुलिस के लिए यह गिरफ्तारी एक चुनौती बन गई थी।


सड़क किनारे मिला लहूलुहान शव

सोमवार सुबह सीतापुर पुलिस को सूचना मिली—नीलगांव के पास झाड़ियों में एक शव पड़ा है। मौके पर पहुंचे अफसरों ने देखा, पास में बाइक खड़ी है। शिनाख्त हुई तो वह संजय यादव निकला।

ASP दक्षिणी दुर्गेश सिंह ने बताया—

“शरीर पर गंभीर चोटें हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मौत का कारण साफ होगा।”

लेकिन हालत देखकर साफ था, यह कोई साधारण मौत नहीं।


पांच महीने पहले ही जेल से निकला था

बख्शी का तालाब (लखनऊ) का रहने वाला संजय यादव पहले से ही 18 से ज्यादा मुकदमों में वांछित था। लूट, चोरी, मारपीट—उसके खिलाफ लंबी चार्टशीट थी। थाने में हिस्ट्रीशीटर दर्ज।

पाँच महीने पहले ही जेल से छूटा था और बाहर आते ही खौफ़नाक वारदात को अंजाम दे बैठा।


घरवालों का इंकार, बहन ने हाथ जोड़ लिए

संजय की मौत की खबर जैसे ही उसके घर पहुँची, वहां सन्नाटा पसर गया। रिश्तेदारों ने तक उससे नाता तोड़ लेने की बात कही।

बहन ने पुलिस और मीडिया से कहा—

“हमारा उससे कोई संबंध नहीं है… कृपया चले जाइए।”


सवाल कई, जवाब कहीं नहीं

  • क्या संजय की हत्या किसी गैंगवार का नतीजा है?
  • या कारोबारी की मौत से नाराज़ लोगों ने बदला लिया?
  • या फिर पुलिस ने चुपचाप निपटा दिया?

संजय यादव अब जिंदा नहीं, लेकिन उसके साथ जुड़ी रहस्यमयी मौत ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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