ईओ को प्रत्येक वार्ड क्षेत्र में सफाई अभियान चलाने के निर्देश
सीएनई रिपोर्टर, नैनीताल। ब्रिटिशकालीन 62 नालों से हटाए जायेंगे अतिक्रमण, सूची तलब। डीएम वंदना सिंह ने नैनीताल शहर अंतर्गत ब्रिटिश कालीन 62 नालों में अतिक्रमण के संबंध में आयोजित बैठक में अतिक्रमणकारियों की सूची तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में गठित की गई टीमों को 15 दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।
पर्यटन नगरी नैनीताल में ऐतिहासिक नालों पर किए गए अतिक्रमणों को जल्द ही हटाया जायेगा। यह बात जिलाधिकारी की बैठक में तय हुई। बैठक में डीएम द्वारा नालों में अतिक्रमित किये गये क्षेत्र के अतिक्रमणकारियों की सूची तैयार कर 15 दिवस के भीतर उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिये। इस हेतु उन्होंने राजस्व, लोनिवि, राजकीय सिंचाई, नगर पालिका व अर्थ एवं संख्या विभाग के अधिकारियों की एक टीम गठित की गई है।
टीम द्वारा नैनीताल शहर अंतर्गत ब्रिटिशकालीन 62 नालों का जी.आई.एस. जी.पी.एस., ड्रोन एवं बन्दोबस्ती नक्शे के आधार पर सर्वे कार्य कर अतिक्रमणकारियों की सूची तैयार कर उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने गठित टीम को निर्देशित किया जाता है कि ब्रिटिश कालीन 62 नालों की सर्वे कार्य पूर्ण कर अतिक्रमणकारियों की सूची/सर्वे रिपोर्ट 15 दिवस के भीतर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, ताकि रिपोर्ट के अनुसार कार्यवाही की जा सके।
हर वार्ड में चलाएं सफाई अभियान : डीएम
नैनीताल नगर की सफाई व्यवस्था के दृष्टिगत जिलाधिकारी वंदना ने अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद, नैनीताल को प्रत्येक वार्ड क्षेत्र में सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए। इस आशय की जानकारी देते हुए अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद, नैनीताल द्वारा यह अवगत कराया गया कि नैनीताल नगर के प्रत्येक वार्ड में दिनांक 14 जुलाई से 28 जुलाई, 2025 तक रोस्टर तैयार कर सघन स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। इस सफाई अभियान को सफल बनाने और इसके निरीक्षण के लिए सुमित कुमार मुख्य सफाई निरीक्षक को नोडल अधिकारी व कमल सिंह सफाई निरीक्षक और दिनेश कटिहार सफाई दरोगा को निरीक्षण अधिकारी नामित किया गया है।
जानिए, नैनीताल में कैसे हुआ था 62 नालों का निर्माण
साल 1880 में नैनीताल में भीषण भूस्खलन हुआ, जिसने पूरे ब्रिटिश शासन को झकझोर कर रख दिया था। बारिश के बाद हुए इस भूस्खलन में करीब 151 लोगों की जान चली गई थी। इसका मुख्य कारण था बरसाती पानी की निकासी का अभाव। पानी को कोई मार्ग न मिलने के कारण, भारी बारिश का सारा बहाव शेर का डंडा पहाड़ी से मल्लीताल क्षेत्र की ओर आया और भारी मलबा साथ लाया, जिससे जन-धन की भारी हानि हुई।
इस भयावह आपदा के बाद, ब्रिटिश सरकार ने नैनीताल की भौगोलिक संरचना और जल प्रवाह प्रणाली का गहन अध्ययन कराया। प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर अजय रावत बताते हैं कि सन् 1880 से पहले भी 1867 में नैनीताल में भूस्खलन हुआ था। हालांकि, उसमें कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ था, उसी वर्ष एक हिल साइड सेफ्टी कमेटी का गठन किया गया जिसने अध्ययन के बाद निष्कर्ष निकाला कि झील के जलागम क्षेत्र में पानी की समुचित निकासी नहीं होने से भूस्खलन हो रहा है, लेकिन 18 सितम्बर 1880 की त्रासदी ने प्रशासन को फिर से चेता दिया।
इसके समाधान के रूप में, ब्रिटिश इंजीनियरों द्वारा 1880 से 1885 के बीच लगभग 75 किलोमीटर लंबी जल निकासी प्रणाली विकसित की गई। इसके अंतर्गत झील के चारों ओर 62 प्रमुख नालों का निर्माण किया गया। इन नालों को इस तरह डिज़ाइन किया गया कि बरसात का पानी नियंत्रित रूप से झील तक पहुंचे या शहर से बाहर निकल जाए। इस ऐतिहासिक कार्य का श्रेय तत्कालीन ब्रिटिश कमिश्नर हेनरी रैमसे को जाता है, जिन्होंने नालों की निर्माण प्रक्रिया की निगरानी की। समय के साथ ये नाले न केवल शहर की सुरक्षा दीवार बने, बल्कि नैनीताल के डिजास्टर मैनेजमेंट की प्रारंभिक मिसाल भी बने।
आज भी ये ब्रिटिशकालीन 62 नाले, नैनीताल की धमनियों की तरह कार्य करते हैं, जो शहर को हर साल होने वाली मूसलाधार बारिश और संभावित आपदाओं से सुरक्षित रखते हैं। खेद का विषय यह है कि इन ऐतिहासिक नालों पर जहां—तहां अतिक्रमण किया गया है। वर्तमान में डीएम वंदना सिंह के नेतृत्व में प्रशासन ने इस मामले को सख्ती से लेते हुए अतिक्रमण हटाने का निश्चय किया है।

