मासूम बच्ची भी पहुंची सलाखों के पीछे!
[विशेष रिपोर्ट: रुद्रपुर/दिनेशपुर] मर्डर मिस्ट्री: देवभूमि के उधम सिंह नगर जिले से एक ऐसी खौफनाक वारदात सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। दिनेशपुर के वार्ड नंबर 4 में मंगलवार की रात जो हुआ, उसने यह साबित कर दिया कि जब अपनों के बीच ‘अहम’ की दीवार खड़ी होती है, तो उसका अंत सिर्फ मातम और सलाखों पर जाकर ही होता है।
आधी रात का ‘खूनी खेल’: पति से बहस, मायके को बुलावा!
घटना की शुरुआत एक मामूली पारिवारिक कलह से हुई। प्रसन्नजीत साह और उनकी पत्नी सुरभि के बीच किसी बात को लेकर तीखी नोकझोंक हुई। अमूमन ऐसी बहसें शांत हो जाती हैं, लेकिन यहाँ सुरभि के भीतर प्रतिशोध की आग सुलग रही थी। उसने तुरंत फोन उठाकर अपने मायके वालों को ‘युद्ध’ का न्योता दे दिया।
आरोप है कि कुछ ही मिनटों में सुरभि के मायके से 5 लोग प्रसन्नजीत के घर पर धमक पड़े। घर की दहलीज पार करते ही गाली-गलौज और चीख-पुकार का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ कि पड़ोसी भी सहम गए।
70 वर्षीय बुजुर्ग की दर्दनाक मौत: बुझ गया घर का चिराग
देखते ही देखते विवाद ने हिंसक मोड़ ले लिया। आरोप है कि सुरभि, उसकी मां, भाई और साले के दोस्तों ने मिलकर प्रसन्नजीत पर हमला बोल दिया। जब घर की 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला संध्या साह ने अपने बेटे को बचाने की कोशिश की, तो हमलावरों का सारा गुस्सा उन पर फूट पड़ा।
बुजुर्ग संध्या साह के साथ इस कदर मारपीट की गई कि उनकी चीखें दीवारों में दबकर रह गईं। जब तक आसपास के लोग पुलिस को सूचना देते और पुलिस मौके पर पहुँचती, तब तक संध्या साह की सांसें थम चुकी थीं। जिस आंगन में खुशियां चहकती थीं, वहां अब एक मां की लाश पड़ी थी।
खाकी का एक्शन: 6 मुजरिमों का ‘जेल सफर’
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन घेराबंदी की। प्रसन्नजीत साह की तहरीर पर पुलिस ने धारा 302 (हत्या) के तहत मुकदमा दर्ज किया। बुधवार को कोर्ट के सामने पेश कर पुलिस ने इन 6 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया:
- सुरभि (पत्नी/मुख्य आरोपी)
- सुजाता (सास)
- दिशा (साली)
- अमन (साला)
- सुमित व पीयूष (साले के दोस्त)
दिल को चीर देने वाला दृश्य: ‘गुनाहगार’ माँ और ‘बेगुनाह’ बच्ची
इस पूरी वारदात में सबसे ज्यादा विचलित कर देने वाला पहलू एक 2 साल की मासूम बच्ची का है। जब न्यायालय ने आरोपियों को जेल भेजने का आदेश दिया, तो वहां एक अजीब सी स्थिति पैदा हो गई।
जेल की सलाखें और ममता का मोह: 2 साल की बच्ची अपनी मां सुरभि से अलग होने को तैयार नहीं थी। रिश्तेदारों ने बच्ची को गोद लेने की कोशिश की, पुलिस ने बहलाने का प्रयास किया, लेकिन बच्ची अपनी मां की साड़ी पकड़कर रोती रही। अंत में, आरोपी मां ने अदालत से गुहार लगाई कि बच्ची को उसके साथ जाने दिया जाए। कानून की मर्यादा और मां की ममता को देखते हुए न्यायालय ने मासूम को जेल जाने की अनुमति दे दी।
चर्चा का विषय: आज दिनेशपुर के हर चौराहे पर एक ही चर्चा है— वह बच्ची जिसका इस खूनी खेल में कोई हाथ नहीं था, आज वह भी अपनी मां के किए की सजा ‘सलाखों’ के पीछे रहकर काटेगी।
जांच जारी
एसपी सिटी उत्तम सिंह नेगी ने मीडिया को बताया कि आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या यह हमला पूर्व-नियोजित था या आवेश में लिया गया फैसला। बहरहाल, एक परिवार उजड़ चुका है और एक मासूम का बचपन जेल की चाहरदीवारी में कैद हो गया है।

