व्यापार मंडल ने निगम की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल—“क्या व्यापारी सिर्फ तहबाजारी और हाउस टैक्स देने के लिए हैं?”
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। अल्मोड़ा के मुख्य बाजार में खुलेआम घूम रहे आवारा सांड, गाय और बैल अब व्यापारियों और आम राहगीरों के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। बाजार की व्यस्त सड़कों पर झुंड में घूमते पशुओं के कारण कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के साथ ही रोजाना बाजार आने वाले लोगों में भय का माहौल है। व्यापार मंडल ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दो टूक कहा है कि यदि समय रहते आवारा पशुओं की समस्या का समाधान नहीं किया गया और किसी नागरिक की जान गई अथवा कोई गंभीर दुर्घटना हुई तो इसकी नैतिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी नगर निगम अल्मोड़ा की होगी।
अल्मोड़ा के मुख्य बाजार में सड़कों पर आवारा पशुओं की मौजूदगी कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन पिछले कुछ समय से स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। सांड और बैल कभी दुकानों के सामने तो कभी बाजार की मुख्य आवाजाही वाली सड़कों पर खड़े दिखाई देते हैं। कई बार ये पशु अचानक राहगीरों की ओर दौड़ पड़ते हैं, जिससे लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने को मजबूर हो जाते हैं।
व्यापारियों का कहना है कि बाजार में आने वाले बुजुर्ग और महिलाएं इन पशुओं के कारण विशेष रूप से असुरक्षित महसूस करते हैं। कई लोगों को पशुओं के हमले अथवा धक्का लगने से चोटें भी पहुंच चुकी हैं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
व्यापार मंडल ने निगम से पूछा—आखिर जिम्मेदारी किसकी?
अल्मोड़ा व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष सुशील साह ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर तीखा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि नगर क्षेत्र में नगर निगम के कर्मचारी और अधिकारी लगातार भ्रमण करते हैं, लेकिन बाजार की सड़कों पर खुलेआम घूम रहे आवारा पशु उन्हें दिखाई नहीं देते।
उन्होंने सवाल किया कि आखिर नगर निगम की जिम्मेदारी क्या है? “क्या व्यापारी सिर्फ तहबाजारी और हाउस टैक्स देने के लिए हैं?”
सुशील साह का कहना है कि जब नगर निगम व्यापारियों और नागरिकों से विभिन्न प्रकार के कर एवं शुल्क वसूलता है तो बाजार की मूलभूत व्यवस्थाओं और नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निगम की ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को उससे पहले ही प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
“किसी की जान गई तो जिम्मेदारी नगर निगम की होगी”
व्यापार मंडल जिलाध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि बाजार में आने वाले वरिष्ठ नागरिकों को आवारा पशुओं के कारण बार-बार चोट का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति इसी तरह बनी रही तो भविष्य में कोई गंभीर दुर्घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि भविष्य में किसी व्यापारी, नागरिक अथवा राहगीर की जान जाती है या कोई गंभीर हादसा होता है तो उसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी नगर निगम अल्मोड़ा की होगी। प्रशासन को इस समस्या को सामान्य मानकर नजरअंदाज करने के बजाय इसे गंभीर जनसुरक्षा का विषय मानना चाहिए।
बजट नहीं है तो व्यापारी सहयोग को तैयार
व्यापार मंडल ने समस्या के समाधान के लिए प्रशासन के सामने सहयोग का रास्ता भी खुला रखा है। सुशील साह ने कहा कि यदि नगर निगम के पास आवारा पशुओं को पकड़ने, उनके रखरखाव अथवा सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था के लिए पर्याप्त बजट नहीं है तो व्यापारी सहयोग करने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर व्यापार मंडल व्यापारियों से सहयोग राशि जुटाकर निगम को देने तक के लिए तैयार है, लेकिन इसके बदले समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए। व्यापारियों का कहना है कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाने को तैयार हैं, लेकिन नगर निगम भी अपनी वैधानिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता।
सिर्फ अभियान नहीं, स्थायी व्यवस्था की मांग
व्यापार मंडल ने नगर निगम से बाजार में तत्काल प्रभाव से आवारा पशुओं को हटाने की मांग की है। साथ ही पकड़े गए पशुओं के लिए सुरक्षित और स्थायी आश्रय की व्यवस्था किए जाने पर जोर दिया है।
व्यापार मंडल की प्रमुख मांगें हैं—
- मुख्य बाजार से आवारा सांड, गाय और बैलों को तत्काल हटाया जाए।
- पकड़े गए पशुओं के लिए सुरक्षित एवं स्थायी आश्रय की व्यवस्था की जाए।
- बाजार और आसपास के क्षेत्रों में नियमित पशु नियंत्रण अभियान चलाया जाए।
- आवारा पशुओं की दोबारा बाजार में पहुंच रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।
- किसी संभावित दुर्घटना से पहले जिम्मेदारी तय कर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
“कागजी कार्रवाई नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए”
सुशील साह ने कहा कि अब व्यापार मंडल केवल ज्ञापन और मांग तक सीमित नहीं रहेगा। नगर निगम को इस मामले में तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि बाजार में रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही होती है। ऐसे में आवारा पशुओं की समस्या को छोटी या सामान्य समस्या मानना लोगों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ होगा।
उन्होंने कहा कि व्यापारियों और जनता को आश्वासन नहीं, बल्कि बाजार की सड़कों पर दिखाई देने वाली कार्रवाई चाहिए। नगर निगम को यह सुनिश्चित करना होगा कि बाजार में आवारा पशुओं के कारण किसी व्यापारी, ग्राहक, बुजुर्ग, महिला या राहगीर की जान जोखिम में न पड़े।
व्यापार मंडल ने स्पष्ट किया है कि जनता और व्यापारियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।





