जाम के झाम से मिलेगी मुक्ति
ई-रिक्शा और पार्किंग को लेकर DM को सौंपी 4 सूत्रीय योजना
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा : सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में पिछले कुछ समय से यातायात की बदहाली और घरेलू गैस की किल्लत ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। शहर की इस नब्ज को पहचानते हुए स्थानीय विधायक मनोज तिवारी अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी (DM) को एक विस्तृत पत्र लिखकर न केवल समस्याओं से अवगत कराया, बल्कि शहर की सूरत बदलने के लिए 4 बड़े और क्रांतिकारी सुझाव भी दिए हैं।
1. ट्रैफिक का ‘इलेक्ट्रिक समाधान’: ई-रिक्शा से बदलेगी तस्वीर
शहर में बढ़ते वाहनों के बोझ और संकरी सड़कों पर लगने वाले जाम से निजात पाने के लिए विधायक ने इलेक्ट्रिक ऑटो रिक्शा को गेम-चेंजर बताया है। उन्होंने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख रूटों पर ई-रिक्शा चलाने का प्रस्ताव रखा है:
- रूट 1: होटल शिखर तिराहे से पाण्डेखोला तक।
- रूट 2: खत्याड़ी से पाण्डेखोला तक।
- रूट 3: रघुनाथ सिटी मॉल से सिकुड़ा बैंड तक।
विधायक का तर्क है कि इससे न केवल मध्यम वर्गीय परिवारों को सस्ता परिवहन मिलेगा, बल्कि पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा और मुख्य बाजार से पेट्रोल-डीजल वाहनों का दबाव कम होगा।
2. पार्किंग का पेच: केवल ढांचा खड़ा करने से काम नहीं चलेगा
अल्मोड़ा में पार्किंग की कमी एक नासूर बन चुकी है। मनोज तिवारी ने पत्र में स्पष्ट कहा कि नगर में जो पार्किंग स्थल बन चुके हैं, उन्हें नियमित और व्यवस्थित रूप से संचालित किया जाए। वर्तमान में अव्यवस्था के कारण लोग सड़कों पर वाहन खड़े करने को मजबूर हैं, जिससे जाम की स्थिति और विकराल हो जाती है।
3. गैस सिलेंडर के लिए मची ‘हाहाकार’ पर कड़ा रुख
ट्रैफिक के साथ-साथ विधायक ने शहर में गैस सिलेंडरों की अनियमित आपूर्ति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने प्रशासन को चेताया कि वर्तमान वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
“घरेलू उपभोक्ता से लेकर होटल व्यवसायी तक गैस के लिए दर-दर भटक रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी चिंताजनक है।” — मनोज तिवारी, विधायक
विधायक की प्रमुख मांगें:
- गैस वितरण के लिए एक पारदर्शी रोस्टर प्रणाली लागू हो।
- एजेंसियों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए ताकि कालाबाजारी पर अंकुश लगे।
- शिकायतों के समाधान के लिए एक प्रभावी तंत्र (Helpline) विकसित हो।
जनता की उम्मीदें और प्रशासन का रुख
स्थानीय निवासियों का मानना है कि यदि विधायक के इन सुझावों, विशेषकर ई-रिक्शा और पार्किंग प्रबंधन पर अमल होता है, तो अल्मोड़ा को जाम के झाम से बड़ी राहत मिल सकती है। व्यापारियों ने भी कमर्शियल गैस की आपूर्ति सुचारू करने की मांग का समर्थन किया है।
विधायक ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि इन बुनियादी जरूरतों से जुड़े मुद्दों पर बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अब गेंद जिला प्रशासन के पाले में है—क्या अल्मोड़ा को इन समस्याओं से मुक्ति मिलेगी?



