कम ऑक्सीजन, कठिन चढ़ाई और बर्फीली राहें…पढ़िये पूरी ख़बर
सीएनई रिपोर्टर, पिथौरागढ़। जहां ऊंचाई बढ़ने के साथ सांसें मुश्किल होने लगती हैं, ऑक्सीजन की कमी हर कदम पर परीक्षा लेती है और मौसम कब करवट बदल ले, इसका कोई भरोसा नहीं होता—वहीं पिथौरागढ़ के दो पर्वतारोहियों ने अपने साहस, तकनीकी दक्षता और अदम्य हौसले से सफलता की नई कहानी लिख दी। सीमांत जनपद की साहसिक खेल संस्था इंट्रिसिक क्लाइंबर्स एंड एक्सप्लोरर्स (आईस) के प्रशिक्षक मुकेश और लोकेश ने लद्दाख की तीन दुर्गम एवं ऊंची चोटियों पर सफल आरोहण कर जिले का नाम रोशन किया है।
दोनों पर्वतारोहियों ने अपने अभियान के दौरान 6,440 मीटर ऊंची माउंट कांग यातसे-I, 6,300 मीटर ऊंची माउंट ज़ोजोंगो वेस्ट और 6,250 मीटर ऊंची माउंट ज़ोजोंगो ईस्ट पर तिरंगा फहराकर अपनी पर्वतारोहण क्षमता का शानदार परिचय दिया। एक ही अभियान में तीन ऊंची चोटियों को सफलतापूर्वक फतह करना उनके अनुभव, शारीरिक क्षमता और मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है।
हर कदम पर चुनौती, फिर भी लक्ष्य से नहीं डिगे
लद्दाख की ऊंची पर्वत चोटियों तक पहुंचना सामान्य पर्वतारोहण से बिल्कुल अलग चुनौती माना जाता है। अत्यधिक ऊंचाई पर कम होती ऑक्सीजन, जमा देने वाला तापमान, कठिन और पथरीला-बर्फीला भूभाग तथा तकनीकी चढ़ाई पर्वतारोहियों की क्षमता की कड़ी परीक्षा लेते हैं। ऐसे हालात में मुकेश और लोकेश ने संयम और साहस के साथ अभियान को आगे बढ़ाया और निर्धारित लक्ष्य हासिल किया।
आईस संस्था के अध्यक्ष विश्वदेव पांडेय वासू और सचिव जगदीश कलौनी ने दोनों प्रशिक्षकों की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि मुकेश और लोकेश हाई-एल्टीट्यूड माउंटेनियरिंग में प्रशिक्षण एवं अनुभव रखने वाले दक्ष पर्वतारोही हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद दोनों ने जिस तरह अभियान को पूरा किया, वह संस्था और पूरे पिथौरागढ़ के लिए गौरव का विषय है।
तीन चोटियां, तीन बड़ी चुनौतियां
अभियान के दौरान दोनों पर्वतारोहियों ने क्रमशः माउंट कांग यातसे-I की 6,440 मीटर ऊंची चोटी, माउंट ज़ोजोंगो वेस्ट की 6,300 मीटर ऊंची चोटी तथा माउंट ज़ोजोंगो ईस्ट की 6,250 मीटर ऊंची चोटी पर सफल आरोहण किया।
इन चोटियों की ऊंचाई और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां इन्हें चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। यहां केवल शारीरिक क्षमता ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि रस्सी तकनीक, मार्ग चयन, मौसम की समझ, ऊंचाई पर शरीर को अनुकूलित करने की क्षमता और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने का अनुभव भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
प्रशिक्षक से पर्वत विजेता तक
मुकेश और लोकेश की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों आईस संस्था के प्रशिक्षक के रूप में युवाओं और अन्य साहसिक खेल प्रेमियों को पर्वतारोहण का प्रशिक्षण भी देते हैं। ऐसे में स्वयं कठिन चोटियों पर सफल आरोहण कर उन्होंने प्रशिक्षण और अनुभव की अपनी क्षमता को भी साबित किया है।
उनकी सफलता महज तीन पर्वत चोटियों के आरोहण तक सीमित नहीं है। यह उन युवाओं के लिए भी संदेश है, जो पहाड़ों और साहसिक खेलों की दुनिया में अपना भविष्य तलाश रहे हैं। कठिन लक्ष्य, अनुशासित तैयारी और लगातार प्रयास के बूते ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है—मुकेश और लोकेश की उपलब्धि इसका जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है।
अब साइकिल से दारमा घाटी की ओर निकलेंगे पवन और शुभम्
इधर, आईस संस्था ने प्रसिद्ध पर्वतारोही स्वर्गीय पुरमल सिंह धर्मशत्तू की स्मृति में एक और साहसिक अभियान की तैयारी की है। संस्था के दो अन्य प्रशिक्षक पवन और शुभम् साइकिल से दारमा घाटी क्षेत्र तक की यात्रा करेंगे।
यह यात्रा पिथौरागढ़ में लगभग 1,625 मीटर की ऊंचाई से शुरू होकर सीपू गांव में करीब 3,500 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचेगी। करीब 364 किलोमीटर लंबी इस साइकिल यात्रा को छह रात और सात दिन में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
नशे के खिलाफ संदेश और आपदा जागरूकता बनेगी यात्रा की आवाज
यह अभियान केवल साहसिक यात्रा नहीं होगा, बल्कि सामाजिक जागरूकता का संदेश भी लेकर चलेगा। यात्रा के लिए “नशे से रहें दूर, जीवन संवारें भरपूर” और “आपदा से आगे, उम्मीद की सवारी” जैसे संदेश निर्धारित किए गए हैं।
साइकिल के पहिए पहाड़ की कठिन राहों पर आगे बढ़ेंगे और साथ ही युवाओं को नशे से दूर रहने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा आपदा जैसी परिस्थितियों में जागरूक और तैयार रहने का संदेश भी देंगे। दारमा घाटी जैसे दुर्गम क्षेत्र में इस तरह का अभियान साहसिक खेलों के साथ सामाजिक सरोकारों को जोड़ने की एक सार्थक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
सीमित संसाधनों में साहसिक खेलों को दे रही नई पहचान
गौरतलब है कि आईस संस्था सीमित संसाधनों के बावजूद पिथौरागढ़ में साहसिक खेल, पर्वतारोहण, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में लगातार गतिविधियां आयोजित करती रही है। संस्था से जुड़े प्रशिक्षक और पर्वतारोही एवरेस्ट सहित कई दुर्गम पर्वत चोटियों का सफल आरोहण कर चुके हैं।
मुकेश और लोकेश का लद्दाख की तीन ऊंची चोटियों पर सफल आरोहण तथा पवन और शुभम् की प्रस्तावित दारमा साइकिल यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सीमांत क्षेत्र में संसाधनों की चुनौतियों के बीच भी यदि जुनून, प्रशिक्षण और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो पहाड़ों की ऊंचाइयों तक पहुंचने के साथ-साथ समाज तक सकारात्मक संदेश भी पहुंचाया जा सकता है।









