HomeUttarakhandAlmoraमंडुवा थ्रेशर-कम-पर्लर से घटेगी मेहनत, बढ़ेगा मुनाफा

मंडुवा थ्रेशर-कम-पर्लर से घटेगी मेहनत, बढ़ेगा मुनाफा

ADVERTISEMENTS

VPKAS के वैज्ञानिकों ने दिया प्रशिक्षण

VPKAS अल्मोड़ा ने किसानों को मंडुवा थ्रेशर-कम-पर्लर मशीन का प्रशिक्षण दिया। जानें कैसे यह मशीन कम लागत और कम मेहनत में रागी और मादिरा की मड़ाई व पर्लिंग कर किसानों का मुनाफा बढ़ाएगी।

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों की आय बढ़ाने और खेती की मेहनत कम करने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (VPKAS), हवालबाग के वैज्ञानिकों ने किसानों को मंडुवा थ्रेशर-कम-पर्लर मशीन का विशेष प्रशिक्षण दिया है।

इस आधुनिक मशीन के इस्तेमाल से मंडुवा (रागी) और मादिरा की मड़ाई व पर्लिंग (छिलका हटाना) का काम अब कम समय, कम लागत और कम मेहनत में हो सकेगा। यह प्रशिक्षण अनुसूचित जाति और गरीबी रेखा से नीचे के किसानों के लिए एक बड़ी राहत है।

65 साल के मैराथन मैन महिपाल सिंह
65 की उम्र में शुगर को दी मात!
देखें 'फिट दादाजी' की पूरी कहानी (आवाज़ के साथ)

प्रशिक्षण कार्यक्रम की मुख्य बातें

वीपीकेएएस संस्थान द्वारा यह महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम अल्मोड़ा के डुम्मिढ़ और डिगरा गांवों में आयोजित किया गया।

  • भागीदारी: डुम्मिढ़ गांव में 31 किसानों को, जबकि डिगरा गांव में 39 किसानों को इस मशीन के संचालन का प्रशिक्षण दिया गया।
  • प्रशिक्षण: संस्थान के तकनीशियन सुरेंद्र सिंह ग्वाल और ‘फसल कटाई उपरान्त इंजीनियरिंग व प्रौद्योगिकी पर अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना’ के स्टाफ ने किसानों को मशीन की खूबियाँ विस्तार से समझाईं।
  • मशीन की क्षमता:
    • मंडुवा/मादिरा की मड़ाई क्षमता: 40-60 किलोग्राम प्रति घंटा।
    • मंडुवा पर्लिंग क्षमता: 60-80 किलोग्राम प्रति घंटा।
    • मादिरा छिलका हटाने की क्षमता: 2.5-4 किलोग्राम प्रति घंटा।
  • आसान संचालन: इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिंगल फेज बिजली से आसानी से चलाई जा सकती है, जिससे इसे ग्रामीण क्षेत्रों में इस्तेमाल करना सरल हो जाता है।
  • अभ्यास: प्रशिक्षण के दौरान महिला किसानों सहित अन्य प्रतिभागियों ने स्वयं मंडुवा थ्रेशर चलाकर मशीन के उपयोग का सीधा अनुभव प्राप्त किया।

ग्राम प्रधान बिमल देवी भी इस दौरान मौजूद रहीं और उन्होंने संस्थान के इस कदम की सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मशीन के व्यापक उपयोग से किसानों की मेहनत में कमी आएगी और वे पारंपरिक मोटे अनाजों के उत्पादन से अधिक लाभ कमा सकेंगे।

ADVERTISEMENTS
Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
RELATED ARTICLES

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments