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महाकुंभ 2025 : बना विश्व रिकॉर्ड : 65 करोड़ से अधिक ने किया संगम स्नान

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महाकुंभ 2025 के अंतिम दिवस खास रिपोर्ट

सीएनई डेस्क। आज महाकुंभ का अंतिम दिवस है। विगत 13 जनवरी से शुरू हुए इस महाकुंभ में 25 फरवरी तक 65 करोड़ से अधिक लोग संगम में डुबकी लगा चुके हैं। मतलब यह कि अमेरिका की आबादी से दोगुने लोग स्नान कर गये, जो कि एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है।

महाकुंभ 2025 : बना विश्व रिकॉर्ड
महाकुंभ 2025 : बना विश्व रिकॉर्ड

बताना चाहेंगे कि 65 करोड़ से अधिक लोगों के स्नान को यदि आप रिकॉर्ड समझ रहे हैं तो यह अंतिम सत्य नहीं है। दरअसल, कुंभ में तो इससे भी कई बड़े रिकॉड कायम हुए हैं। इस आलेख में हम इन सभी पर प्रकाश डालने का प्रयास कर रहे हैंं।

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2019 के बाद आज की तारीख तक

उल्लेखनीय है कि साल 2019 में मात्र 24 करोड़ लोगों ने संगम में डुबकी लगाई थी, लेकिन वर्तमान साल 2025 में यह रिकॉर्ड टूट गया। इस साल तो 65 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की ​पुख्ता रिपोर्ट है।

यहां हम यह भी बताना चाहेंगे कि महाकुंभ से पूर्व उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मात्र 45 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने की कल्पना की थी, लेकिन यहां तो रिकॉर्ड ही टूट गया। पूरे महाकुंभ में यहां हर रोज करीब 1.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई है। संपूर्ण आयोजन में करीब 9 लाख साधु—संत और नागा तथा 10 लाख कल्पवासी मौजूद रहे।

इन विभूतियों ने भी किया स्नान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद मोदी, भूटान नरेश जिग्मे खेसर, नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ सहित पूरे विश्व से तमाम बड़ी हस्तियों ने कुंभ में स्नान किया। इस दौरान 73 देशों के राजनायिक और 50 लाख विदेशी नागरिक भी आयोजन का हिस्सा बने। यही नहीं, यदि वीवीआईपी प्रोटोकॉल की चर्चा करें तो इसकी संख्या 5 हजार से अधिक है।

4 हजार हेक्टियर रहा महाकुंभ क्षेत्र, दुनियां के सबसे बड़ी स्टेडियम को भी पछाड़ा

आपको हम बताना चाहेंगे कि सबसे बड़ा स्टेडियम वर्तमान में अहमदाबाद में 23 हेक्टियर में बना नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेयिम है, जो विश्व में सबसे बड़ा है। वहीं, दूसरी ओर महाकुंभ क्षेत्र की बात करें तो यह पूरे 4 हजार हेक्टिर में रहा। यानी इसने विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया। इसके अलावा श्रद्धालुओं के स्नान के लिए संगम किनारे 13 किमी में 42 घाट बनाये गये थे। इनमें 10 पक्के घाट थे।

​यह हुए निर्माण कार्य

गंगा—यमुना को पार करने के लिए 2213 से 30 पांटून पुल भी तैयार किये गये। वहीं, 2019 में मात्र 22 पुल थे। सड़क बिछाने के लिए 651 किमी की चकर्ड प्लेट बिछाए गये। इनमें से दो हाईवे और 200 नई सड़क बनाई गई। यही नहीं, 4 हजार 500 टन लोहे से बेला—कछार में एक अस्थाई स्टील ब्रिज भी बनाया गया। इसके अलावा यहां 4 लाख से अधिक तंबू और डेढ़ लाख शौचालय थे। अखाड़ों और साधु संतों के लिए 85 बड़े पंडाल और 50 से अधिक अस्थाई आश्रम बनाये गये। सन्यासियों के लिए तो 500 टेंट अलग से बने थे। मेले में 10 लाख कल्पवासियों के रहने के लिए 4 लाख तंबू बनाये गये थे। विद्युत सप्लाई हेतु 1532 किमी लंबी लाइन खींचकर 4.70 लाख कनेक्शन दिए गए। 67 हजार स्ट्रीट लाइट लगी। 85 अस्थाई बिजली घर बने। 170 सब स्टेशन बनाये गये।

यातायात की व्यवस्था

महाकुंभ के लिए 13 हजार 830 ट्रेनें चली थीं। जिनमें 30 करोड़ लोग प्रयागराज पहुंचे। देश के 50 शहरों से सीधी ट्रेनें प्रयागराज आईं। पूरी दुनिया में पहली बार ऐसा इंसानी मूवमेंट देखा गया। इसके अलावा प्रयागराज से 17 शहरों से सीधी हवाई उड़ान तथा 30 से कनेक्टिंग फ्लाइट थी। प्रयागराज पहुंचाने के लिए यूपी रोडवेज की बसों ने 1.32 लाख से ज्यादा चक्कर लगाए थे। बसों के जरिए तो 70 लाख श्रद्धालु आये। 13 रूटों पर 750 शटल सेवाएं चली। 27 लाख से अधिक लोगों ने शटल से यात्रा की। रोजाना करीब 50 हजार वाहन प्रयागराज पहुंचे।

सुरक्षा व्यवस्था

जहां तक सुरक्षा की बात है योगी सरकार ने इसमें भी कोई कोताही नहीं बरती। पूरे क्षेत्र में 50 हजार सुरक्षाकर्मी और 2700 कैमरे थे। मेले के दौरान अलग से 56 थाने और 144 चौकियां बनाई गईं। दो साइबर थाने अलग से बने।

उपचार व्यवस्था

इस मेला अवधि में 43 अस्पताल बने और 6 लाख लोगों का उपचार किया गया। 125 एंबुलेंसे के साथ ही एयर और रीवर एंबुलेंस भी तैनात थीं। केंद्रीय अस्पताल में 20 बच्चों को जन्म हुआ तथा 250 से अधिक मरीजों की जान बचाई गई।

सफाई व्यवस्था

मेला क्षेत्र में 4 लाख कूड़ेदान लगे थे और 11 हजार सफाई कर्मी नियुक्त रहे। दुनियां के सबसे बड़े इस धार्मिक आयोजन में 600 मीट्रिक टन कचरा निकला था। गंगा—यमुना की सफाई को देखने के लिए 1500 गंगा सेवा दूत भी तैनात रहे।

आर्थिक पक्ष

मेला क्षेत्र में करीब तीन लाख करोड़ रूपये का लेन—देन व्यापारिक माध्यमों से हुआ। यूपी सरकार को 25 हजार करोड़ से अधिक कमाने का सुअवसर मिला।

स्वच्छता से जुड़े गजब रिकॉर्ड

  • 24 फरवरी के दिन करीब 15 हजार स्वच्छता कर्मियों ने 10 किलोमीटर क्षेत्र में एक साथ सफाई का रिकॉर्ड बनाया। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड इसे लेकर 28 फरवरी को फैसला दे सकता है।
  • 14 फरवरी को नदी स्वच्छता का रिकॉर्ड बना गया था। उस दिन 300 कर्मचारियों ने नदी की सफाई का रिकॉर्ड बनाया था। गिनीज बुक ने इसे रिकॉर्ड में शामिल किया है।

    यहां देखिए दुनिया के किसी आयोजन में सबसे बड़े जुटाव का रिकॉर्ड —

    महाकुंभ 2025 : बना विश्व रिकॉर्ड : 65 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने किया संगम स्नान
    महाकुंभ 2025 : बना विश्व रिकॉर्ड : 65 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने किया संगम स्नान
    महाकुंभ 2025 : बना विश्व रिकॉर्ड
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    महाकुंभ 2025

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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