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Almora Breaking: तीन हत्यारोपियों को आजीवन कारावास की सजा

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➡️ लमगड़ा थाना क्षेत्र के डोल में एक नाले में मिला था शव
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा

हत्या के एक मामले सत्र न्यायाधीश अल्मोड़ा मलिक मजहर सुल्तान की अदालत ने तीन हत्यारोपियों को आजीवन कारावास तथा 5—5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामला अल्मोड़ा जिले के लमगड़ा थाना क्षेत्र का है।

मामले के मुताबिक 29 सितंबर 2018 को लमगड़ा ब्लाक अंतर्गत नागदेव विष्णु मंदिर डोल के पानी के नाले में शव बरामद हुआ था, जो पत्थरों से ढका हुआ था। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और जिसकी शिनाख्त भुवन चंद्र फुलारा पुत्र गोविंद बल्लभ फुलारा, निवासी ग्राम कौडार, तहसील धारी, जिला नैनीताल के रूप में हुई। पुलिस ने परिजनों को मौके पर बुलाने के बाद पुलिस ने नाले से शव निकालकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल अल्मोड़ा भेजा और पोस्टमार्टम के बाद उसका अंतिम संस्कार किया गया। इसी दिन मृतक के पिता गोविंद बल्लभ फुलारा पुत्र स्व. भवदेव फुलारा निवासी ग्राम कौडार, राजस्व क्षेत्र भद्रकोट, तहसील धारी जिला नैनीताल ने अल्मोड़ा जिले के थाना लमगड़ा में तहरीर दी।

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तहरीर में शिकायत दर्ज की कि उनके बेटे भुवन चंद्र फुलारा ने सन्यास ले लिया था और स्वयं का नाम त्रिभुवन चैतन्यपुरी रख लिया था। इसके साथ ही नागदेव विष्णु मंदिर डोल में रहकर वहीं पूजा—पाठ का काम शुरू कर लिया था। तहरीर में कहा गया कि उनके बेटे भुवन का लमगड़ा ब्लाक के डोल निवासी सूरज सिंह फर्तियाल पुत्र जोधा सिंह, दीपक सिंह पुत्र हर सिंह व यतेंद्र सिंह पुत्र स्व. नंदन सिंह निवासीगण डोल, थाना लमगड़ा जिला अल्मोड़ा के साथ पैसों को लेकर विवाद हुआ था। उन्होंने तहरीर में आरोप लगाया कि उनके बेटे की इन तीनों लोगों ने हत्या कर शव नाले में पत्थरों से ढक दिया। इस तहरीर के आधार पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली और उक्त तीनों आरोपियों को पुलिस ने​ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

इसके बाद विवेचनाधिकारी ने मामले की विवेचना पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। इस मामले का विचारण सत्र न्यायाधीश अल्मोड़ा के न्यायालय में चला। मामले में अभियोजन की ओर से 16 गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया गया। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी पूरन सिंह कैड़ा ने मामले में सबल पैरवी की और दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय में पेश किए। सत्र न्यायाधीश अल्मोड़ा की अदालत ने पत्रावली में मौजूद मौखिक व दस्तावेजी साक्ष्यों का परिशीलन कर उक्त तीनों आरोपियों को धारा—302 ता.हि. के तहत आजीवन कारावास और 5000—5000 रुपये का अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 201 सपठित धारा 34 के तहत तीनों को एक—एक माह की कठोर कारावास व सौ—सौ रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। साथ ही अर्थदंड जमा नहीं करने पर 15—15 दिन की अतिरिक्त कारावास का दंड दिया है।

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