HomeBreaking Newsअजीबोगरीब…इस कब्र में जिंदा होने के इंतजार में सोई है लेडी वैंपायर

अजीबोगरीब…इस कब्र में जिंदा होने के इंतजार में सोई है लेडी वैंपायर

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⏩ कंकाल ने पुरातित्वविदों को कर दिया हैरान

⏩ आगे के दांत नुकीले, गले-पैर में क्यों फंसाई है दरांती

Woman Vampire’s tomb found in Poland

क्या ड्रैकुला, वैंपायर, चुड़ैल जैसी बलाओं का कभी अस्तित्व रहा था, या यह सिर्फ कपोर कल्पित बातें हैं। कम से कम आज के युग में विज्ञान इन सब बातों को नहीं मानता और अधिकांश लोग ऐसी बातों पर यकीन नहीं करते होंगे। इसके बावजूद एक युग वह भी था, जब यह माना जाता था कि मानव रक्त पिपासू ड्रैकुला, Vampire, चुड़ैलों का अस्तित्व होता है।

दरअसल, पोलैंड में एक अजीबोगरीब कब्र मिली है। वैज्ञानिक बता रहे हैं कि तत्कालीन मान्यता के अनुसार यह किसी लेडी वैंपायर की कब्र है। वैज्ञानिकों की जांच में यह भी सामने आया कि यह 17वीं सदी की कब्र है। परीक्षण में पता चला है कि यह कंकाल किसी महिला का है।

तो क्या कब्र लेडी वैंपायर या किसी चुड़ैल की है

जांच में पाया गया है कि नर कंकाल के गले के चारों तरफ दरांती कुछ तरह से फंसाई गई है कि यदि यह चुड़ैल पुन: जीवित हो जाये तो उठने के प्रयास में इसकी तत्काल गर्दन कट कर अलग हो जाये और यह दोबारा मरे।

इस बात ने किया हैरान

हालांकि पहली ही नजर में यह कहा जा सकता है यह 17वीं सदी का कोई अंधविश्वास है, जिसका कहीं से कोई आधार ही नहीं बनता। चूंकि चुड़ैल, ड्रेकुला या वैंपायर जैसी कोई चीज होती ही नहीं है। इसके बावजूद पुरातत्वविद ने जब कंकाल की बारीकी से जांच की तो कई चीजों ने उन्हें भी हैरान कर दिया। बताया जा रहा है कि कंकाल के आगे के दांत नुकीले मिले हैं, जो सामान्य इंसानों के नहीं हो सकते।

इस तरह मिली यह प्राचीन कब्र

हुआ यूं कि पोलैंड (Poland) में पुरातत्वविद एक 17वीं सदी की कब्र की खुदाई कर रहे थे। इस बीच उन्हें ऐसी कब्र मिली, जिसको देख हर कोई हैरत में पड़ गया। यहां महिला का एक कंकाल मिला, जिसके गले के चारों तरफ दरांती थी। बता दें कि दरांती को स्थानीय भाषा में हंसिया या हंसुआ नाम से भी जाना जाता है, जिसकी मदद से फसल की कटाई होती है, लेकिन यह एक खतरनाक हथियार भी है।

महिला के रहे थे ड्रेकुला वाले दांत, सिल्क की पहनती थी टोपी

गहन जांच में जुटी पुरातत्वविदों की टीम के चीफ Doris Polinsky, Professor, Nicolaus Copernicus University ने बताया कि जब यह महिला जिंदा रही होगी तो बहुत भयानक दिखती होगी। इसके कंकाल की जांच में देखा गया है महिला के आगे के दांत खून पीने वाले किसी शिकारी जीव की तरह नुकीले हैं। यही नहीं, इस कब्र से टोपी के रेशे मिले हैं, जो सिल्क के हैं। जिससे यह भी पता चलता है कि उक्त महिला एक सिल्क की टोपी पहना करती होगी।

पूर्वी यूरोप का रहा है वैंपायरों पर विश्वास

Smithsonian Magazine में प्रकाशित एक लेख के अनुसार 11वीं सदी में पूर्वी यूरोप के लोग वैंपायरों से बहुत डरते थे। वहां लोग अपने मृतक रिश्तेदारों की कब्रों में वैंपायर से बचने के लिए जादू-टोने वाली वस्तुएं रखते थे। तत्कालीन लोगों की मान्यता था कि वैंपायर या ड्रेकुला मृत इंसानों की देह का भी इस्तेमाल कर जीवित हो सकते हैं। इसके अलावा तब जो ड्रेकुला या वैंपायर होने के शक में पकड़े जाते थे तो उन्हें मौत की सजा मिलती थी। मृत शरीर को कब्र में दफना इसी तरह से दरांती लगा दी जाती थी, ताकि वह कभी जिंदा होकर कब्र से सुरक्षित बाहर नहीं निकल सकें। सिर्फ गले के चारों तरफ ही नहीं कई कब्रों में तो हाथ-पैर में भी लगाई गई दरांतियां मिली हैं। यही नहीं, यह भी परंपरा थी कि वैंपायर या ड्रेकुला की मृत देह को सीधा नहीं, उलटा दफनाया जाये, ताकि उसे खाने के लिए सिर्फ मिट्टी ही मिले। शोध में यह भी पाया गया है कि कई कब्रों में पडे़ कंकालों में धातु की सलांखें घोंपी गई हैं। पोलेंड में जिस महिला का कंकाल मिला है, वह यही सिद्ध करता है कि यह किसी लेडी वैंपायर का है। कंकाल के न सिर्फ गले, बल्कि पैर में भी दरांती जैसे हथियार लगाये गये हैं। जब इस महिला को दफनाया गया होगा, तब लोग इस बात से बहुत डरे होंगे कि कभी यह पुन: जीवित हो गई तो क्या होगा।

यहां देखिये साइंस अलर्ट का पूरा आलेख –

https://www.sciencealert.com/vampire-in-poland-found-buried-with-a-sickle-to-prevent-the-rise-of-the-dead

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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