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लालकुआं न्यूज : वाह जी! लालकुआं के लोगों को जमीनों पर मिल रहा मालिकाना हक, बिंदुखत्ता के लोग ठन-ठन गोपाल

लालकुआं। लालकुआं से प्यार बिंदुखत्ता दर-किनार… जी हां…यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि सरकार का शासनादेश कह रहा है।
दरअसल बीते वर्ष नवंबर 2020 में सरकार ने लालकुआं वासियों को सौगात देते हुए मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और इतना ही नहीं 26 हेक्टेयर डिफॉरेस्ट भूमि को मालिकाना हक देने के अलावा लगभग इतनी ही और जमीन को मालिकाना हक देने की प्रक्रिया गतिमान है, आंकड़ों पर अगर गौर करें तो लालकुआं वर्ष 1978 के आसपास राजस्व ग्राम घोषित हुआ था मगर बिंदुखत्ता की बसासत की बात करें तो कुछ पुराने बाशिंदों का कहना है कि बिंदुखत्ता लगभग 60 वर्ष से अधिक पुराना एक आरक्षित वन क्षेत्र में बसा हुआ गांव है और यहां के निवासी आज भी राजस्व गांव की मांग करते आ रहे हैं मगर पीढ़ियां गुजर चुकी है कई नेता व आम जनता आंदोलन करते-करते दुनिया को अलविदा कह चुके हैं ।बावजूद इसके आज तक किसी भी सरकार ने इस गांव को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की दिशा में कोई ठोस पैरवी नहीं की है। वहीं दूसरी तरफ लालकुआं की बात करें तो सरकार ने नए शासनादेश के अनुसार लालकुआं वासियों को मालिकाना हक देने की सौगात दी है वहीं दूसरी ओर सदियों पुराने बसे गांव बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने तो दूर डी-फॉरेस्ट करने की भी जहमत नहीं उठाई गयी हैं । कई बुद्धिजीवियों का कहना है कि जब लालकुआं वासियों को सरकार सौगात दे सकती है तो आखिरकार ऐसी क्या मजबूरी है कि बिंदुखत्ता को दरकिनार किया जा रहा है यहां के स्थानीय निवासियों की मानें तो राजस्व गांव का दर्जा नहीं होने की वजह से राज्य एवं केंद्र की कई कल्याणकारी योजनाओं से लोग वंचित रह जाते हैं इसके अलावा ऋण प्राप्त करने के लिए भी सिर्फ और सिर्फ बैंकों के चक्कर लगाने पड़ते हैं मगर हासिल कुछ नहीं हो पाता। कहने को तो कई आंदोलन हुए और राजनीतिक पार्टियों ने सिर्फ और सिर्फ सत्ता की रोटियां सेकने के लिए यहां की जनता का इस्तेमाल किया मगर जनता की मांगों के अनुरूप बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाए जाने की दशा में कोई ठोस पैरवी तक नहीं की ऐसे में आज भी यहां के लोग अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

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