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अगर जंग लंबी चली तो दुनिया कितने दिन झेल पाएगी ईंधन की किल्लत?

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LPG से लेकर पेट्रोल तक संकट गहराया

जानिए, भारत सहित विश्व के तमाम देशों का हाल

इन चुनिंदा देशों में क्यों नहीं है एलपीजी की किल्लत ?

Delhi : वैश्विक ईंधन की किल्लत (ऊर्जा संकट) पर विशेष रिपोर्ट : मध्य-पूर्व में बढ़ता सैन्य तनाव अब केवल युद्ध का मुद्दा नहीं रह गया है—यह दुनिया की रसोई, उद्योग और अर्थव्यवस्था तक पहुंच चुका है। ईरान-अमेरिका टकराव के बाद दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग Strait of Hormuz बाधित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा संकट मंडरा रहा है।

विशेषज्ञों की चेतावनी है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो आने वाले हफ्तों में LPG, पेट्रोल और डीजल की भारी कमी देखने को मिल सकती है। दुनिया के कई देशों ने पहले ही आपात कदम उठाने शुरू कर दिए हैं—कहीं ईंधन की राशनिंग हो रही है तो कहीं उद्योगों को सप्लाई घटाई जा रही है।


दुनिया की ऊर्जा “धड़कन” क्यों है होर्मुज जलडमरूमध्य

वैश्विक ऊर्जा बाजार में यह समुद्री मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले लगभग 20–25% कच्चे तेल का परिवहन इसी मार्ग से होता है
  • प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल यहां से गुजरता है
  • खाड़ी देशों से निकलने वाली LPG और LNG का बड़ा हिस्सा भी इसी रास्ते से एशिया पहुंचता है

ऊर्जा विश्लेषकों और International Energy Agency के अनुसार अगर यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है तो वैश्विक बाजार में कुछ ही हफ्तों में गंभीर आपूर्ति संकट पैदा हो सकता है।


अगर संकट लंबा चला तो कितने दिन टिक पाएगी दुनिया?

ऊर्जा भंडार और आयात पर निर्भरता के आधार पर विशेषज्ञों ने एक अनुमानित समय-सीमा बताई है:

वैश्विक ऊर्जा भंडार की स्थिति

  • विकसित देशों के पास औसतन 60–90 दिन का रणनीतिक तेल भंडार
  • एशियाई देशों के पास लगभग 30–60 दिन का स्टॉक
  • गरीब देशों में कई जगह 2–3 हफ्ते का ही भंडार

यानी यदि आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो जाती है तो दुनिया के कई हिस्सों में एक से दो महीने में गंभीर ईंधन संकट पैदा हो सकता है।


LPG संकट क्यों सबसे ज्यादा चिंता का विषय

युद्ध का सबसे बड़ा असर घरेलू गैस यानी LPG पर पड़ सकता है।

  • एशिया दुनिया का सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है
  • भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में LPG आयात करते हैं
  • भारत अपनी 80–85% LPG जरूरत आयात से पूरी करता है

इसका मतलब है कि यदि आपूर्ति बाधित होती है तो सबसे पहले असर घरों की रसोई गैस पर दिख सकता है।


PM मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

भारत: घरेलू सप्लाई बचाने के लिए आपात रणनीति

भारत सरकार ने संभावित संकट को देखते हुए कई कदम उठाए हैं।

मुख्य कदम

  • उद्योगों को मिलने वाली गैस में कटौती
  • घरेलू LPG सप्लाई को प्राथमिकता
  • ऊर्जा बचत अभियान
  • वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संकट 2–3 महीने से ज्यादा चलता है तो परिवहन लागत, खाद्य महंगाई और बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है।


दुनिया के अलग-अलग देशों में आपात कदम

अमेरिका

  • कई देशों को 30 दिन तक रूस से तेल खरीदने की छूट
  • रणनीतिक तेल भंडार खोलने की तैयारी

पाकिस्तान

  • स्कूल अस्थायी रूप से बंद
  • सरकारी कार्यालयों में वर्क-फ्रॉम-होम
  • ऊर्जा बचत अभियान

बांग्लादेश

  • पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर लिमिट
  • लोगों से AC कम चलाने और गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील

ऑस्ट्रेलिया

  • राष्ट्रीय भंडार से 762 मिलियन लीटर ईंधन जारी
  • किसानों के लिए विशेष व्यवस्था

थाइलैंड

  • वर्क-फ्रॉम-होम को बढ़ावा
  • AC 26–27°C पर चलाने की सलाह

जापान

  • 80 मिलियन बैरल तेल रिजर्व से जारी करने का फैसला
  • यह लगभग 45 दिन की जरूरत के बराबर है

दक्षिण कोरिया

  • लगभग 30 साल में पहली बार ईंधन कीमतों पर कैप लागू

किन देशों में फिलहाल कम है संकट और क्यों?

हालांकि दुनिया के कई देश ईंधन संकट से जूझ रहे हैं, लेकिन कुछ देश ऐसे भी हैं जहां स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर है।

उदाहरण के लिए United States, Canada और Norway जैसे देश बड़े तेल उत्पादक हैं और अपनी जरूरत का अधिकांश ईंधन खुद ही पैदा करते हैं। इसी तरह Saudi Arabia और United Arab Emirates जैसे खाड़ी देश दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातकों में शामिल हैं, इसलिए वहां घरेलू ईंधन की कमी की संभावना कम रहती है। इसके अलावा China और Spain जैसे देशों ने पिछले वर्षों में सौर और पवन ऊर्जा में बड़े निवेश किए हैं, जिससे वे आंशिक रूप से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम कर पाए हैं।


क्या यह वैश्विक आर्थिक संकट में बदल सकता है?

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा चला और ऊर्जा आपूर्ति बाधित रही तो इसके प्रभाव व्यापक हो सकते हैं।

संभावित असर:

  • वैश्विक महंगाई में तेज उछाल
  • परिवहन लागत में वृद्धि
  • खाद्य उत्पादन महंगा
  • कई देशों में आर्थिक मंदी का खतरा

अलबत्ता इतना कहा जा सकता है कि ईरान-अमेरिका युद्ध ने दुनिया को यह याद दिला दिया है कि वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था कितनी नाजुक है। एक समुद्री मार्ग बाधित होने से दुनिया की रसोई, उद्योग और अर्थव्यवस्था तक संकट पहुंच सकता है।

सबसे बड़ा सवाल अब यही है—
अगर यह जंग लंबी चली तो क्या दुनिया अपने सीमित ऊर्जा भंडार के दम पर इसे झेल पाएगी, या आने वाले महीनों में ईंधन संकट वैश्विक आर्थिक तूफान बन जाएगा?

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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