HomeUttarakhandAlmoraअल्मोड़ा: ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों के आतंक से भारी आक्रोश

अल्मोड़ा: ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों के आतंक से भारी आक्रोश

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जिला पंचायत सदस्य ने डीएफओ को सौंपा ज्ञापन

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों, विशेषकर बंदरों के बढ़ते आतंक ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इसी गंभीर समस्या को लेकर सल्लाभाटकोट वार्ड की जिला पंचायत सदस्य शैलजा चम्याल ने प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ), सिविल सोयम वन प्रभाग, अल्मोड़ा से मुलाकात की और उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की।

प्रशासन पर गंभीर आरोप: शहरों के बंदरों को गांवों में छोड़ने का दावा जिला पंचायत सदस्य ने वन विभाग को अवगत कराया कि ग्राम पंचायत कुंजकिमोला, मल्ली नाली, तल्लीनाली और आसपास के क्षेत्रों में बंदरों का आतंक अपनी चरम सीमा पर है। क्षेत्र भ्रमण के दौरान कुंजकिमोला के ग्राम प्रधान देवी दत्त एवं स्थानीय ग्रामीणों ने लिखित पत्र के माध्यम से अपनी व्यथा साझा की।

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ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शहरी क्षेत्रों से पकड़े गए बंदरों को चोरी-छिपे ग्रामीण इलाकों में छोड़ा जा रहा है। इस आत्मघाती कदम से गांवों में कृषि कार्य करना अब लगभग असंभव हो गया है।

खेती चौपट और सुरक्षा का संकट

ज्ञापन में प्रमुखता से उठाया गया है कि बंदर न केवल फलों, सब्जियों और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि अब वे हिंसक भी हो चले हैं।

  • सुरक्षा पर खतरा: बंदरों द्वारा बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर हमले कर उन्हें घायल करने की घटनाएं निरंतर बढ़ रही हैं।
  • आजीविका का संकट: पलायन की मार झेल रहे इन गांवों में जो थोड़े-बहुत किसान अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर हैं, उनकी फसलें बंदरों द्वारा नष्ट की जा रही हैं। इससे उनके सामने रोजी-रोटी का गहरा संकट खड़ा हो गया है।
  • जंगली सुअरों का खौफ: बंदरों के साथ-साथ वर्तमान में जंगली सुअरों का भी भारी जमावड़ा है, जिससे ग्रामीण जंगलों के रास्तों से गुजरने में भयभीत हैं।

त्वरित कार्रवाई की मांग

शैलजा चम्याल ने वन विभाग के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों को बंदरों का “डंपिंग ग्राउंड” बनाना बंद किया जाए। उन्होंने मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें रखीं:

  1. चिह्नित ग्रामीण क्षेत्रों से तत्काल बंदरों को पकड़कर दूर घने जंगलों में छोड़ा जाए।
  2. भविष्य में शहरों से पकड़े जाने वाले बंदरों को आबादी वाले गांवों के बजाय निर्जन वन क्षेत्रों में विस्थापित किया जाए।
  3. जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान का उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाए।

जिला पंचायत सदस्य ने स्पष्ट किया कि यदि विभाग ने इस समस्या का शीघ्र समाधान नहीं निकाला, तो क्षेत्र की जनता आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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