HomeBreaking Newsहाय बिजली! पहले 5 बजे, फिर 10.30 बजे का इंतजार…

हाय बिजली! पहले 5 बजे, फिर 10.30 बजे का इंतजार…

8 बजे बाद भी चलता रहा आंख-मिचौली का खेल

कठघरिया बिजलीघर में मेंटेनेंस के चलते सुबह 9 बजे से बिजली संकट

गर्मी में बेहाल रहे लोग, ट्यूबवेल बंद होने से पानी को भी तरसे, कारोबार पर पड़ा असर

CNE REPORTER, हल्द्वानी। कठघरिया बिजलीघर में मेंटेनेंस कार्य के चलते शुक्रवार को बिजली उपभोक्ताओं को दिनभर भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह करीब 9 बजे गुल हुई बिजली के लिए पहले शाम 5 बजे तक आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद जताई गई, लेकिन 5 बजे भी बिजली नहीं आई। इसके बाद रात 8 बजे बिजली आने का समय बताया गया। लोग इस उम्मीद में इंतजार करते रहे कि अब उन्हें गर्मी और परेशानी से राहत मिलेगी, लेकिन रात 8 बजे के बाद भी बिजली आपूर्ति सामान्य नहीं हो सकी। कई बार बिजली आई और फिर चली गई। आंख-मिचौली का यह खेल चलता रहा और आखिरकार रात करीब 10:30 बजे बिजली आपूर्ति सामान्य हो सकी।

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इस तरह सुबह 9 बजे से रात करीब 10:30 बजे तक करीब 13.5 घंटे तक क्षेत्र के लोगों को बिजली संकट का सामना करना पड़ा। बीच में रात 8 बजे के बाद बिजली की आवाजाही जरूर हुई, लेकिन स्थायी रूप से आपूर्ति सामान्य नहीं होने के कारण लोगों की परेशानी बनी रही। उमस भरी गर्मी में पंखे-कूलर बंद रहे, इन्वर्टर जवाब दे गए और शाम के बाद कई घरों में अंधेरा छा गया। वहीं, बिजली आपूर्ति बंद रहने से ट्यूबवेल भी प्रभावित हुए, जिसके चलते कई क्षेत्रों में पेयजल संकट की स्थिति बन गई।

CNE MEDIA ने अधिकारियों को कई बार फोन किया, नहीं उठा फोन

विद्युत आपूर्ति बाधित होने को लेकर सीएनई मीडिया हाउस की ओर से कठघरिया बिजलीघर में चल रहे मेंटेनेंस कार्य, बिजली कटौती के कारण, आपूर्ति बहाल होने के संभावित समय और अन्य जानकारियों के लिए संबंधित अधिकारियों को कई बार फोन किया गया। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने फोन रिसीव नहीं किया।

ऐसे में बिजली कटौती के दौरान विभाग की ओर से वास्तविक स्थिति और मेंटेनेंस कार्य की प्रगति को लेकर आधिकारिक जानकारी समय पर सामने नहीं आ सकी।

बिजली आपूर्ति बाधित होने के पीछे चाहे जो भी तकनीकी या विभागीय कारण रहे हों, लेकिन जनहित से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मामले में जानकारी लेने के लिए मीडिया संस्थान की ओर से किए गए फोन कॉल को रिसीव नहीं करना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। बिजली और पेयजल जैसी आवश्यक सेवाओं से जुड़ी समस्या के दौरान जनता को सही और समयबद्ध जानकारी मिलना बेहद जरूरी है।


सुबह 9 बजे गुल हुई बिजली, 5 बजे का मिला इंतजार

जानकारी के अनुसार कठघरिया बिजलीघर में शुक्रवार को मेंटेनेंस कार्य किया जाना था। इसके चलते सुबह करीब 9 बजे विद्युत आपूर्ति बंद कर दी गई।

बिजली जाने के बाद उपभोक्ताओं को बताया गया कि मेंटेनेंस कार्य पूरा होने के बाद शाम करीब 5 बजे तक बिजली बहाल हो जाएगी। लोग इसी उम्मीद में दिनभर इंतजार करते रहे।

लेकिन शाम 5 बजे तक बिजली नहीं आई। गर्मी और उमस के बीच लोगों की परेशानी बढ़ती चली गई।

5 बजे नहीं आई तो बताया गया रात 8 बजे आएगी

शाम 5 बजे तक बिजली बहाल नहीं होने के बाद लोगों को रात करीब 8 बजे आपूर्ति बहाल होने का समय बताया गया।

इसके बाद उपभोक्ताओं ने एक बार फिर इंतजार शुरू किया। लेकिन इस दौरान घरों और दुकानों में बिजली आधारित तमाम काम ठप रहे।

पंखे और कूलर बंद होने से लोग गर्मी से परेशान रहे। कई घरों में इन्वर्टर भी लगातार चलने के कारण जवाब देने लगे।

रात 8 बजे के बाद भी खत्म नहीं हुई परेशानी

रात 8 बजे का समय बीतने के बाद बिजली कुछ स्थानों पर आई, लेकिन लोगों को स्थायी राहत नहीं मिली।

बिजली आती और कुछ समय बाद फिर चली जाती। फिर आती और दोबारा गुल हो जाती।

इस तरह रात 8 बजे के बाद भी बिजली की आंख-मिचौली चलती रही। इससे उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ गई। लोगों को यह समझ नहीं आ रहा था कि मेंटेनेंस का काम पूरा हो चुका है या अभी भी विद्युत आपूर्ति को सामान्य करने की प्रक्रिया चल रही है।

रात करीब 10:30 बजे जाकर मिली राहत

आखिरकार रात करीब 10:30 बजे बिजली आपूर्ति सामान्य हो सकी।

इस तरह सुबह 9 बजे से रात करीब 10:30 बजे तक लगभग 13 घंटे 30 मिनट तक क्षेत्र के लोगों को बिजली संकट का सामना करना पड़ा। हालांकि रात 8 बजे के बाद बीच-बीच में बिजली आती-जाती रही, लेकिन लगातार और सामान्य आपूर्ति के लिए लोगों को रात 10:30 बजे तक इंतजार करना पड़ा।


उमस भरी गर्मी में बेहाल रहे लोग

लंबे समय तक बिजली नहीं रहने से उमस भरी गर्मी में लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। घरों में पंखे और कूलर बंद रहे।

बुजुर्गों, बच्चों और घरों में रहने वाले लोगों को गर्मी से काफी परेशानी हुई। मोबाइल फोन चार्ज करने से लेकर रोजमर्रा के कई काम प्रभावित हुए।

जिन घरों में इन्वर्टर थे, वहां भी कई घंटे बाद बैटरी खत्म हो गई। इसके बाद लोगों के सामने गर्मी के साथ-साथ रोशनी की समस्या भी खड़ी हो गई।

बिजली गई तो ट्यूबवेल भी ठप, पानी का संकट

बिजली कटौती का असर केवल घरों और दुकानों तक सीमित नहीं रहा। ट्यूबवेल फीडरों की बिजली बंद रहने से ट्यूबवेल भी संचालित नहीं हो सके। इसका सीधा असर पेयजल आपूर्ति पर पड़ा।

कई क्षेत्रों में लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ा। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी जुटाने में लोगों को परेशानी हुई।

ऐसे में लोगों के सामने एक साथ बिजली और पानी, दोनों की समस्या खड़ी हो गई।


दमुवाढूंगा में ट्यूबवेल खराब, पहले से बना है पेयजल संकट

उधर दमुवाढूंगा क्षेत्र में ट्यूबवेल खराब होने से पहले से ही पेयजल संकट बना हुआ है। ट्यूबवेल खराब होने के कारण क्षेत्र में पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी जुटाना मुश्किल हो रहा है।

जल संस्थान के सहायक अभियंता हरीश पंत ने बताया कि खराब ट्यूबवेल को ठीक करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

जज फार्म में मैटमैले पानी की शिकायत

जज फार्म क्षेत्र में भी कई दिनों से मैटमैला पानी आने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार नलों में साफ पानी के बजाय मैटमैला पानी आने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

लोगों के अनुसार क्षेत्र में पुरानी और जर्जर पाइप लाइन के कारण यह समस्या उत्पन्न हो रही है।

अधिशासी अभियंता रविशंकर लोशाली ने समस्या का समाधान किए जाने की बात कही है।


लंबी बिजली कटौती पर भड़के लोग

करीब 13.5 घंटे तक सामान्य बिजली आपूर्ति नहीं होने से लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली।

वार्ड-52 मुखानी की पार्षद रेखा बिनवाल ने कहा कि उमस भरी गर्मी में दिनभर बिजली आपूर्ति बंद रहने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि मेंटेनेंस कार्य के लिए बिजली आपूर्ति बंद करना जरूरी हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक कटौती होने से आम जनता की मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता उमेश बिनवाल ने भी बिजली कटौती पर सवाल उठाते हुए कहा कि विद्युत कार्य जरूरी हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को लंबे समय तक बिजली के बिना परेशान होना पड़ता है।


इन्वर्टर जवाब दे गए, शाम को छाया अंधेरा

सुबह 9 बजे से बिजली बंद रहने के कारण शाम तक कई घरों में इन्वर्टर भी जवाब दे गए।

शाम होते ही बिजली नहीं होने से घरों और आसपास के क्षेत्रों में अंधेरा छाने लगा। लोगों को मोबाइल की रोशनी और अन्य वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा।

रात 8 बजे के बाद बिजली आने से लोगों को लगा कि अब समस्या खत्म हो गई है, लेकिन कुछ ही समय बाद बिजली फिर चली गई। इसके बाद लगातार आंख-मिचौली ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी।


रेस्टोरेंट, बेकरी समेत कारोबार पर भी पड़ा असर

लंबी बिजली कटौती का असर व्यापार पर भी पड़ा।

व्यापारी नेता विक्रांत गुप्ता ने बताया कि ऊर्जा निगम की कार्यप्रणाली के कारण व्यापारियों को परेशानी उठानी पड़ी।

बिजली नहीं होने से रेस्टोरेंट, बेकरी और अन्य बिजली आधारित कारोबार प्रभावित हुए। बिजली से चलने वाली मशीनों और उपकरणों का इस्तेमाल नहीं हो सका। कई कारोबारियों को काम रोकना पड़ा, जबकि ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।


कठघरिया बिजलीघर में बदले गए 11 केवी फीडरों के पैनल

ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता एसके गुप्ता के अनुसार कठघरिया बिजलीघर में 11 केवी फीडरों के पैनल बदले गए हैं।

मेंटेनेंस कार्य के दौरान पैनल बदलने सहित अन्य तकनीकी कार्य किए गए, जिसके चलते बिजली आपूर्ति बाधित रही।

हालांकि उपभोक्ताओं के लिए दिनभर सबसे बड़ी परेशानी यह रही कि पहले 5 बजे, फिर 8 बजे बिजली आने का इंतजार कराया गया और 8 बजे के बाद भी आपूर्ति सामान्य नहीं हो सकी। अंततः रात करीब 10:30 बजे जाकर लोगों को स्थायी राहत मिली।


कमलुवागांजा में भी दो घंटे बिजली बाधित

उधर, चौड़ीकरण कार्य के लिए पेड़ काटे जाने के कारण सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक कमलुवागांजा बिजलीघर के चंपापुर फीडर की बिजली आपूर्ति भी बंद रही।

इस दौरान संबंधित क्षेत्र के उपभोक्ताओं को करीब दो घंटे तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ा।


जनता के सामने उठे कई सवाल

कठघरिया बिजलीघर में मेंटेनेंस कार्य के दौरान सामने आई इस स्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

जब बिजली सुबह 9 बजे बंद की गई थी तो पहले 5 बजे तक आपूर्ति बहाल होने की बात क्यों कही गई? 5 बजे बिजली नहीं आई तो रात 8 बजे का समय क्यों बताया गया? रात 8 बजे के बाद बिजली आने-जाने का सिलसिला क्यों चलता रहा? सामान्य और स्थिर आपूर्ति रात करीब 10:30 बजे ही क्यों हो सकी?

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि इतनी लंबी बिजली कटौती के दौरान ट्यूबवेल और पेयजल व्यवस्था प्रभावित होने की जानकारी उपभोक्ताओं को किस स्तर पर दी गई और वैकल्पिक व्यवस्था क्या रही?

और जब इस पूरे मामले में जनहित के लिए काम कर रहा मीडिया विभाग का पक्ष जानने के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर रहा था, तब बार-बार फोन किए जाने के बावजूद अधिकारियों द्वारा फोन रिसीव नहीं किया जाना भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।

मेंटेनेंस कार्य आवश्यक हो सकते हैं, लेकिन जनता को स्पष्ट सूचना, वास्तविक समय की जानकारी और बिजली बहाली की सही स्थिति उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। शुक्रवार की लंबी कटौती के बाद कठघरिया क्षेत्र के उपभोक्ताओं को अब उम्मीद है कि भविष्य में आवश्यक कार्यों के दौरान उन्हें इस तरह घंटों अनिश्चितता और आंख-मिचौली का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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