सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी : नैनीताल जिले में गुलदार (Leopard) और बंदरों के आतंक से प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में वन विभाग ने सक्रियता दिखाते हुए जनता को बचाव के लिए आवश्यक जानकारी दी है। क्षेत्र में लगातार बढ़ रही वन्यजीवों की आवाजाही और उनके द्वारा उत्पन्न खतरे को देखते हुए, वन विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में गश्त कर रही हैं और निवासियों को सुरक्षा उपाय बता रही हैं।

वन विभाग की टीम ने किया गश्त
आज बृहस्पतिवार को उत्तरी गोला रेंज के वनक्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष गश्त दल ने गुलदार प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। इन क्षेत्रों में बड़ेत, सिरसा तोक, चौनीखेत और जवाहर नवोदय विद्यालय सुयालबाड़ी शामिल हैं। इन इलाकों के स्थानीय निवासियों ने गुलदार के साथ-साथ बंदरों के आतंक की भी शिकायत की थी, जिस पर यह कार्रवाई की गई।
गुलदार और बंदरों से बचाव के उपाय
गश्त के दौरान, नथुवाखान रेंज के क्षेत्राधिकारी नितिन पंत, अनुभाग अधिकारी बृजेश विश्वकर्मा, वाचर दिवान सिंह और वन आरक्षी वीरपाल ने सिरसा और चौनीखेत में जनता के बीच बचाव के कई महत्वपूर्ण उपाय साझा किए।
गुलदार से बचाव के लिए वन विभाग ने मुख्य रूप से निम्न बातों पर जोर दिया:
- सतर्कता: जनता को दिन और रात दोनों समय अत्यधिक सतर्क रहने को कहा गया है।
- रात में आवाजाही सीमित करें: लोगों से अपील की गई कि वे रात्रि के समय अपने घर के भीतर ही रहें और अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें।
- दूरी बनाए रखें: सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह दिया गया कि यदि गुलदार दिखाई दे, तो कतई भी उसके नजदीक न जाएं और तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं या शोर मचाकर उसे भगाने का प्रयास करें।
वन विभाग ने आश्वस्त किया है कि वे क्षेत्र में लगातार गश्त और मॉनिटरिंग जारी रखेंगे ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह पहल क्षेत्र में वन्यजीवों और मानव के बीच संघर्ष को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

