HomeUttarakhandAlmoraअसाधारण सेवा और उत्कृष्ट प्रदर्शन पर कुमाऊँ रेजिमेंट को 'राज्यपाल कप'

असाधारण सेवा और उत्कृष्ट प्रदर्शन पर कुमाऊँ रेजिमेंट को ‘राज्यपाल कप’

CNE REPORTER, रानीखेत। भारतीय सेना की ऐतिहासिक कुमाऊँ रेजिमेंट ने अपनी गौरवशाली परंपरा में एक और नया अध्याय जोड़ते हुए सेना दिवस 2026 के अवसर पर प्रतिष्ठित ‘राज्यपाल कप’ हासिल किया है।

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यह सम्मान रेजिमेंट को उसकी असाधारण सेवा, संस्थागत उत्कृष्टता और सैन्य प्रशिक्षण के क्षेत्र में किए गए अभूतपूर्व कार्यों के लिए प्रदान किया गया। उत्तराखंड के राज्यपाल से यह सम्मान कुमाऊँ रेजिमेंटल सेंटर (KRC) की ओर से ब्रिगेडियर संजय यादव, VSM और सूबेदार मेजर दिनेश सिंह यादव ने प्राप्त किया।


दो शताब्दियों का गौरवशाली इतिहास

कुमाऊँ रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी रेजिमेंटों में से एक है, जिसका इतिहास 200 वर्षों से अधिक पुराना है। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर आजादी के बाद के सभी प्रमुख संघर्षों—1947, 1962, 1965, 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध—में रेजिमेंट ने अदम्य साहस का परिचय दिया है।

रेजिमेंट की वीरता का प्रमाण उसके द्वारा अर्जित पदकों से मिलता है, जिनमें शामिल हैं:

  • 02 परमवीर चक्र
  • 11 महावीर चक्र
  • 04 अशोक चक्र
  • 82 वीर चक्र

इसके अतिरिक्त, रेजिमेंट को दो पद्म भूषण से अलंकृत किया गया है और इसे भारतीय सेना को तीन थल सेनाध्यक्ष देने का विशिष्ट गौरव भी प्राप्त है।

अग्निवीर प्रशिक्षण और आधुनिक अवसंरचना

कुमाऊँ रेजिमेंटल सेंटर (KRC) रानीखेत वर्तमान में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण का एक सुदृढ़ केंद्र बन चुका है। पिछले तीन वर्षों में सेंटर ने कुमाऊँ, नागा और अहीर क्षेत्रों के 5,500 से अधिक अग्निवीरों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित कर राष्ट्र सेवा के लिए तैयार किया है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर भी रेजिमेंट ने रानीखेत के कायाकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है:

  1. नर सिंह स्टेडियम का विकास और आधुनिकीकरण।
  2. म्यूज़ियम-कम-रिसर्च सेंटर की स्थापना।
  3. सार्वजनिक सुविधाओं जैसे आधुनिक शॉपिंग सेंटर, कैफेटेरिया और इन्फैंट्री चौक का निर्माण।

पूर्व सैनिकों का कल्याण और डिजिटल पहल

रेजिमेंट ने न केवल वर्तमान सैनिकों बल्कि पूर्व सैनिकों (Veterans) के लिए भी समर्पित कार्य किए हैं। विगत दो वर्षों में ₹26 करोड़ से अधिक के लंबित दावों का निपटारा किया गया है। साथ ही, उत्तराखंड विश्वविद्यालय के साथ MOU हस्ताक्षरित कर सैनिकों के कौशल विकास और शैक्षणिक उन्नयन की दिशा में दूरगामी कदम उठाए गए हैं।

30 से अधिक आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से 7,000 से अधिक पूर्व सैनिकों से सीधा संवाद स्थापित किया गया और लगभग 26,000 शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया गया। इन्हीं निरंतर प्रयासों और श्रेष्ठ संचालन प्रदर्शन के कारण सेंट्रल कमांड द्वारा वर्ष 2025 में रेजिमेंट को ‘यूनिट साइटेशन’ से भी सम्मानित किया गया था।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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