CNE REPORTER/अल्मोड़ा : शुक्रवार को मानसखंड विज्ञान केंद्र के पास चीड़ के घने जंगल में भीषण आग लग गई। सूखी चीड़ की पत्तियां (पिरूल) और तेज़ हवा के कारण आग की लपटें तेजी से विज्ञान केंद्र की ओर बढ़ने लगी थीं, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। हालांकि, फायर सर्विस की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए, दुर्गम क्षेत्र में भी पारंपरिक तरीकों का उपयोग कर, समय रहते आग पर पूरी तरह काबू पा लिया और एक बड़े संभावित खतरे को टाल दिया।
दोपहर 3:54 बजे फायर स्टेशन अल्मोड़ा को आग लगने की सूचना मिलते ही, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी के निर्देश पर एक यूनिट तुरंत मौके के लिए रवाना हुई। टीम ने घटनास्थल पर पहुँचकर पाया कि आग अल्मोड़ा-कोसी राजमार्ग से काफी दूर चीड़ के जंगल के उस हिस्से में लगी थी, जहाँ अग्निशमन वाहन का पहुँचना असंभव था।
मुख्य मार्ग से दूर होने और होज़रील की रेंज से बाहर होने के कारण, अग्निशमन कर्मियों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। विज्ञान केंद्र की दिशा में बढ़ रही आग को रोकने के लिए तुरंत कार्रवाई करना आवश्यक था।
हरी पत्तियों और शाखाओं से किया नियंत्रण
ऐसी विकट स्थिति में, फायर सर्विस की टीम ने सूझबूझ का परिचय दिया और पारंपरिक तरीकों को अपनाया। सभी कर्मियों ने हरी पत्तियों और शाखाओं को डंडों की तरह इस्तेमाल करते हुए आग को पीट-पीटकर नियंत्रित करने का जोखिम भरा काम शुरू किया।
काफी कड़ी मशक्कत के बाद, फायर सर्विस यूनिट आग को आगे फैलने से रोकने और उस पर पूरी तरह काबू पाने में सफल रही। इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से न केवल विज्ञान केंद्र को बल्कि आसपास की वन संपदा को भी बड़े नुकसान से बचा लिया गया।
अग्निशमन कार्य सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद, टीम पातालदेवी जल संस्थान से पानी भरकर वापस फायर स्टेशन लौट गई। इस महत्वपूर्ण अभियान में एलएफएम ओम प्रकाश, एफएस डीवीआर मुकेश सिंह, एफएम मोहम्मद अशरफ, तथा डब्ल्यूएफएम इंदु मेहता, भावना और बबीता ने अपनी जान जोखिम में डालकर योगदान दिया।

