गरुड़ (सीएनई रिपोर्टर)। हिंदी दिवस के अवसर पर तीन लेखकों की नई पुस्तकों का विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड पत्रकार एवं साहित्यकार समिति, गरुड़ द्वारा किया गया।

विमोचित की गई पुस्तकों में मोहन जोशी की ‘मोहन बाल कहानियां’, आशा बुटोला का काव्य संग्रह ‘प्रतीक्षा’, और सुरेंद्र वर्मा का काव्य संग्रह ‘जड़ों की छांव’ शामिल हैं।
साहित्यकार मोहन जोशी ने इस मौके पर कहा कि पितृ पक्ष में पितरों को याद करते हुए पुस्तक विमोचन करना एक सुखद अनुभव है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हिंदी दिवस मनाने की बजाय हमें इस भाषा को अपने जीवन में अपनाना चाहिए, क्योंकि यह केवल हमारी भाषा नहीं, बल्कि हमारी पहचान भी है।
वरिष्ठ साहित्यकार गोपाल दत्त भट्ट ने बताया कि हिंदी देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है और सबसे अधिक साहित्य भी इसी भाषा में लिखा गया है।

लेखक सुरेंद्र वर्मा ने अपनी कृति ‘जड़ों की छांव’ के बारे में बताया कि यह उन बुजुर्गों को समर्पित है, जिनका संघर्ष भरा जीवन अक्सर आश्रमों में बीतता है। यह उनकी दूसरी किताब है। वहीं, आशा बुटोला ने अपने काव्य संग्रह ‘प्रतीक्षा’ के बारे में कहा कि यह उनकी दूसरी पुस्तक है, जिसमें कुल 54 कविताएं हैं। इन कविताओं में नारी शक्ति और स्थानीय मुद्दों को उजागर करने का प्रयास किया गया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए रतन सिंह किरमोलिया ने कहा कि केवल हिंदी दिवस मनाने से हिंदी मजबूत नहीं होगी। आजादी के 70 साल से भी ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी हम सिर्फ दिवस मनाने तक सीमित हैं। हमें भाषा को अपने दैनिक जीवन में अपनाना होगा।
इस मौके पर जावेद सिद्दीकी, हरीश जोशी, आशा जोशी, प्रेमा भट्ट, अनिल पांडे, चंद्र शेखर, डॉ. हेम चंद्र दूबे, डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी, त्रिलोक बुटोला, डॉ. गिरीश अधिकारी, मनोज खोलिया सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

