सिंचाई विभाग की नहर के खुले स्लैब में गिरे मॉर्निंग वॉक पर निकले बुजुर्ग

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सिंचाई विभाग की नहर के खुले स्लैब में गिरे मॉर्निंग वॉक पर निकले बुजुर्ग
सिंचाई विभाग की नहर के खुले स्लैब में गिरे मॉर्निंग वॉक पर निकले बुजुर्ग

डीएम सख्त, अफसरों पर दर्ज होगा आपराधिक केस

CNE REPORTER, देहरादून। राजधानी की सड़कों पर सुबह की सैर अब सेहत नहीं, बल्कि जान जोखिम में डालने जैसा शगल बन गई है। अपर तुनवाला में सिंचाई विभाग की घोर लापरवाही के कारण एक बुजुर्ग मॉर्निंग वॉक के दौरान खुले पड़े नहर के स्लैब में जा गिरे।


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विभाग ने सफाई के नाम पर नहर को ‘मौत के कुएं’ में तब्दील कर दिया था, लेकिन सुरक्षा के नाम पर एक तिनका तक नहीं रखा। इस दर्दनाक हादसे के बाद जिला प्रशासन की क्यूआरटी ने कड़ा रुख अपनाते हुए सिंचाई विभाग के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर ली है।

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विकास या विनाश का गड्ढा?

सिंचाई विभाग के इंजीनियरों ने शायद यह मान लिया है कि जनता की आंखों में ‘नाइट विजन’ लगा है। कैनाल रोड पर पुरानी नहर की सफाई के लिए स्लैब तो हटा दिए गए, लेकिन न वहां बैरिकेडिंग की गई और न ही कोई रिफ्लेक्टर लगाया गया। नतीजा यह हुआ कि कोहरे की चादर में लिपटी सड़क पर बुजुर्ग को वह खुला हिस्सा नजर नहीं आया और वह सीधे नहर में समा गए।

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विभाग की कार्यशैली पर कुछ तीखे सवाल:

  • क्या विभाग को हादसे का इंतजार था कि कब कोई गिरे और तब फाइलें हिलें?
  • सड़क से डेढ़ फीट ऊंची नहर पर बिना चेतावनी बोर्ड के काम करना जनता की जान से खिलवाड़ नहीं तो क्या है?
  • क्या बजट केवल सफाई के लिए आता है, सुरक्षा उपकरणों के लिए विभाग की जेब खाली है?

जिलाधिकारी का ‘हंटर’: अब सीधे दर्ज होगी FIR

हादसे की खबर मिलते ही जिलाधिकारी सविन बंसल का पारा चढ़ गया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल नोटिस से काम नहीं चलेगा।

  • सीधा एक्शन: जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग के संबंधित अधिकारियों पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
  • ठेकेदारों को चेतावनी: सविन बंसल ने दो टूक कहा कि अगर सड़क कटिंग या निर्माण स्थल पर कोई भी व्यक्ति चोटिल हुआ, तो संबंधित ठेकेदार और विभाग के अफसर सीधे जेल जाएंगे।
  • बैरिकेडिंग अनिवार्य: अब शहर में कहीं भी काम होगा तो रात में चमकने वाले रिफ्लेक्टर और मजबूत बैरिकेडिंग अनिवार्य होगी, वरना काम रोक दिया जाएगा।

सीवर विभाग को मिली ‘क्लीन चिट’

अफवाहों के बाजार में यह चर्चा थी कि बुजुर्ग सीवर के गड्ढे में गिरे हैं, लेकिन प्रशासन ने साफ कर दिया कि सीवर लाइन का रेस्टोरेशन कार्य पूरा हो चुका है। यह विशुद्ध रूप से सिंचाई विभाग की लापरवाही है जिसने पुरानी नहर को बिना ढके छोड़ दिया था।

प्रशासन की इस सर्जिकल स्ट्राइक ने सो रहे विभागों की नींद उड़ा दी है। जनता अब सवाल पूछ रही है कि क्या हर हादसे के बाद ही सिस्टम जागेगा, या भविष्य में ऐसी ‘खूनी लापरवाही’ पर पहले ही अंकुश लगेगा?

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