पद से हटाये गये CMS, डॉक्टर–नर्स से लेकर एंबुलेंस चालक पर भी कार्रवाई
सीएनई रिपोर्टर : बागेश्वर जिला चिकित्सालय में मासूम की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। परिजनों के आक्रोश और जनभावनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत संज्ञान लिया और दोषियों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएम के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए न केवल मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को पद से हटा दिया, बल्कि कई डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों और कर्मचारियों को दोषी ठहराते हुए सख्त चेतावनी और दंडात्मक कार्रवाई की है।

दरअसल, मासूम की मौत के मामले में जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट और कारण बताओ नोटिस के जवाबों ने अस्पताल की लापरवाही को उजागर कर दिया। एंबुलेंस की व्यवस्था में लापरवाही, डॉक्टरों का संवेदनहीन रवैया और नर्सिंग स्टाफ की उदासीनता इस घटना की मुख्य वजह मानी गई।
जांच के आधार पर दोषियों पर निम्न कार्यवाही हुई—
- डॉ. तपन शर्मा – प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, को प्रशासनिक अक्षमता और असंवेदनशीलता का दोषी मानते हुए तत्काल पद से हटा दिया गया।
- ईश्वर सिंह टोलिया और लक्ष्मण कुमार – 108 एंबुलेंस चालक, को एक माह तक कार्य से विरक्त कर दिया गया है और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही होगी।
- नर्सिंग अधिकारी महेश कुमार, नर्सिंग अधिकारी श्रीमती हिमानी और कक्ष सेवक सूरज सिंह कन्नाल को संवेदनशीलता की कमी पर कठोर चेतावनी दी गई है।
- चिकित्साधिकारी डॉ. भूरेन्द्र घटियाल को कर्तव्य में उदासीनता बरतने पर चेतावनी जारी की गई।
- बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकित कुमार को संघर्षरत बच्चे के प्रति संवेदनहीन रवैये पर दोषी पाते हुए प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई।
स्वास्थ्य सचिव का बयान
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा—
“यह घटना अत्यंत दुखद है। मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर त्वरित और कठोर कार्रवाई की गई है। स्वास्थ्य विभाग का संदेश स्पष्ट है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी संवेदनशीलता के साथ अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएगा तो उसे कड़ी सजा भुगतनी होगी।”
प्रदेशभर में चर्चा का विषय
बच्चे की मौत के बाद हुई इस कार्रवाई ने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर प्रदेशभर में बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में आए दिन लापरवाही की शिकायतें मिलती रहती हैं, लेकिन पहली बार सरकार ने इतनी सख्ती दिखाई है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस कार्रवाई के बाद अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं सुधरेंगी और जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी अधिक सजग रहेंगे।
सरकार का संदेश
सीएम धामी की ओर से यह कदम साफ तौर पर संकेत देता है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही को किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेगी। साथ ही यह घटना अन्य जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों और अस्पताल प्रशासन के लिए भी चेतावनी है कि यदि उन्होंने अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभाई तो उन्हें भी इसी तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

