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ALMORA NEWS: जब बच्चों की कल्पना शक्ति और एकाग्रता ने पकड़ी बे-सिरपैर कहानी की नब्ज, आनलाइन कहानी लेखन में बच्चे हो रहे माहिर

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CNE REPORTER; ALMORA
बालप्रहरी तथा बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा द्वारा आयोजित 60वें वेबीनार में बच्चों को कहानी लेखन की जानकारी दी गई। वेबीनार के शुरू में बालप्रहरी के संपादक एवं बाल साहित्य संस्थान अल्मोड़ा के सचिव उदय किरौला ने बच्चों को कहानी बताकर कहानी के रूप में एक काल्पनिक प्रसंग सुनाया (जो वास्तव में कहानी थी नहीं)। इसके बाद बच्चों सेे कहानी की कमियां बताने के लिए कहा गया। बच्चों ने कहानी में घटना नहीं होने, एकमात्र पात्र होने, संवाद का अभाव होने, कहानी मजेदार नहीं होने, कोई शीर्षक नहीं होने तथा कोई सीख नहीं मिलने आदि-आदि कमियां गिना दी। इससे बच्चों का कहानी पर एकाग्रता और कहानी पर बच्चों की अच्छी पकड़ साफ-साफ झलकी। तत्पश्चात सभी बच्चों ने संयुक्त रूप से कहानी तैयार की और सीनियर वर्ग के कुछ बच्चों ने उस कहानी को अपने-अपने अंदाज में बयां किया।
वेबीनार के कहानी सत्र के अध्यक्ष प्रख्यात बाल साहित्यकार रमेश चंद्र पंत (द्वाराहाट) थे। उन्होंने बच्चों को बताया कि कहानी में यथार्थ के साथ कल्पना का समावेश होना चाहिए। उसमें अंसभव कल्पना को कहानी में नहीं जोड़ा जाना चाहिए। मुख्य अतिथि विदिशा (मध्य प्रदेश) से आनलाइन जुड़े कहानीकार राजेंद्र श्रीवास्तव ने बच्चों की प्रस्तुति को सराहा और कहा कि बच्चों में अथाह कल्पना शक्ति होती है। उन्होंने कहा कि कहानी ऐसी रोचक व मजेदार हो, जिससे पाठक पूरी कहानी पढ़ने को मजबूर हो जाए।
दूसरे सत्र में भूमिका मेनारिया (उदयपुर), आशिमा शर्मा, अभिषी गुप्ता (जम्मू), चित्रांशी लोहनी, प्रांजलि लोहनी (चंपावत), अर्जरागिनी सारस्वत (आगरा), पूर्वांशी ध्यानी (धूमाकोट), भूमि बिष्ट, कार्तिक जोशी, कार्तिक अग्रवाल, जिया जोशी, ऋषभ जोशी, अंशिक फुलारा (खटीमा), इधांत जोशी (देवीधूरा), प्रियदर्शिनी खोलिया, नंदिनी धौनी (हल्द्वानी), पवन पांडे, पिंकी पांडे (चैसाला), कोमल खेतवाल (करूली), नलिन अधिकारी (लमगड़ा) ने अपनी स्वरचित कहानियां सुनाई। अध्यक्ष मंडल में शामिल चित्रांशी लोहनी, पूर्वांशी ध्यानी, भूमि बिष्ट, आशिमा शर्मा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहानी विधा के बारे में बोलते हुए कहानी वाचन किया।
संचालन माउंट कार्मल स्कूल चंपावत की आठवीं की छात्रा प्रांजलि लोहनी ने किया। इस सत्र के मुख्य अतिथि गोवर्धन यादव (छिंदवाड़ा) ने बच्चों की कहानियां सुनने के बाद कहा कि नए बच्चों को साहित्य से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजन जरुरी हैं। अंत में बालप्रहरी के संरक्षक श्याम पलट पांडेय ने सभी का आभार व्यक्त किया और बाल साहित्य संस्थान की गतिविधियों की जानकारी दी। शिक्षा विभाग उत्तराखंड के उप निदेशक आकाश सारस्वत, डॉ. कुसुम नैथानी (देहरादून), शशि ओझा (भीलवाड़ा), हरीश सेठी (सिरसा), सुधा भार्गव (बंगलोर), रजत मिश्रा, हरवीर सिंह, दलीप बोरा, संजय जोशी, डॉ. प्रेम प्रकाश पुरोहित, देवसिंह राना, बलवंतसिंह, बृजमोहन जोशी आदि ने बच्चों की कहानियों को आनलाइन सुना।

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