THDC और GSI की टीम ने किया मलबे व भू-धंसाव वाले संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण
सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी। खैरना से क्वारब के बीच लगातार सामने आ रहे मलबा आने और जमीन धंसने की घटनाओं को लेकर आज महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। THDC (टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) और भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की संयुक्त टीम ने खैरना से क्वारब तक मार्ग के विभिन्न संवेदनशील स्थानों का स्थलीय सर्वेक्षण किया। टीम ने उन स्थानों का बारीकी से निरीक्षण किया, जहां पहाड़ी से मलबा आने के साथ ही सड़क और आसपास की जमीन के धंसने की स्थिति सामने आई है।
सर्वेक्षण के दौरान टीम ने प्रभावित क्षेत्रों की भौगोलिक एवं भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों का जायजा लिया और मलबा आने तथा जमीन धंसने वाले स्थानों का निरीक्षण किया। टीम के साथ एनएच के एई प्रकाश रौतेला, जेई पंकज कुमार तथा आल ग्रेस कंपनी के मैनेजर तय्यब खान सहित कई कर्मचारी एवं संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
जमीन के भीतर की स्थिति का भी होगा वैज्ञानिक अध्ययन
बताया गया कि इस सर्वेक्षण का उद्देश्य केवल सड़क पर दिखाई दे रहे मलबे और धंसाव का निरीक्षण करना ही नहीं, बल्कि प्रभावित क्षेत्र की भू-वैज्ञानिक स्थिति और जमीन के अंदर की संरचना को समझना भी है। विशेषज्ञ यह जानने का प्रयास करेंगे कि खैरना से क्वारब के बीच किन स्थानों पर भू-स्खलन अथवा भू-धंसाव की स्थिति अधिक गंभीर है तथा इसके पीछे प्राकृतिक अथवा भू-वैज्ञानिक कारण क्या हो सकते हैं।
विशेषज्ञों द्वारा यह भी देखा जा रहा है कि प्रभावित स्थानों की चट्टानों एवं मिट्टी की संरचना किस प्रकार की है और कहीं जमीन के भीतर किसी प्रकार की कमजोरी अथवा अस्थिरता तो विकसित नहीं हो रही है।
THDC के अनुभव से मिलेगी तकनीकी मदद
उल्लेखनीय है कि THDC को पहाड़ी क्षेत्रों में टनलिंग, ढलान स्थिरीकरण (Slope Stabilization) और विभिन्न प्रकार के इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग कार्यों का व्यापक अनुभव है। ऐसे में संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों की तकनीकी स्थिति का आकलन करने में THDC की विशेषज्ञता महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वहीं भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) देश की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाओं में शामिल है, जो चट्टानों की संरचना, भू-स्खलन, भू-धंसाव तथा जमीन की आंतरिक भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों का वैज्ञानिक अध्ययन करती है। संयुक्त टीम द्वारा किए जा रहे सर्वेक्षण से प्रभावित क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को वैज्ञानिक दृष्टि से समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।
क्या किसी बड़े खतरे का संकेत है?
सर्वेक्षण के दौरान विशेषज्ञों का विशेष ध्यान इस बात पर रहेगा कि खैरना से क्वारब के बीच जिन स्थानों पर मलबा आया अथवा जमीन धंसी है, वहां जमीन की आंतरिक स्थिरता कितनी है। साथ ही यह भी अध्ययन किया जाएगा कि मौजूदा धंसाव और मलबा आने की घटनाएं स्थानीय स्तर की समस्या हैं या इनके पीछे कोई व्यापक भू-वैज्ञानिक कारण मौजूद है।
इस जांच के माध्यम से संवेदनशील स्थानों को चिन्हित करने और भविष्य में वहां आवश्यक तकनीकी एवं सुरक्षा उपाय किए जाने में भी मदद मिल सकती है।
शासन को भेजी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट
टीम ने बताया कि सर्वेक्षण के बाद इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। रिपोर्ट में सर्वेक्षण के दौरान सामने आए तकनीकी एवं भू-वैज्ञानिक तथ्यों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद शासन स्तर से रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्रवाई और आवश्यक सुरक्षा उपायों को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
खैरना-क्वारब मार्ग क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में लगातार मलबा आने और जमीन धंसने की घटनाओं के कारण मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। वैज्ञानिक टीम के सर्वेक्षण के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट को इस लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल किन उपायों की आवश्यकता है और भविष्य में मार्ग को सुरक्षित एवं सुचारु बनाए रखने के लिए किस प्रकार के स्थायी कदम उठाए जाने चाहिए।
अब सभी की नजर THDC और GSI की सर्वेक्षण रिपोर्ट पर टिकी है। रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि खैरना-क्वारब मार्ग के संवेदनशील हिस्सों के लिए आगे किस प्रकार की तकनीकी और सुरक्षा कार्रवाई की जाती है।









