बार-बार धंस रहे मार्ग को मजबूत बनाने की कवायद
टीएचडीसी ने किया खतरनाक पहाड़ियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण
- अनूप सिंह जीना की रिपोर्ट
CNE REPORTER। अल्मोड़ा-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-109) पर क्वारब क्षेत्र में लगातार सड़क धंसने और पुरानी रिटेनिंग (सुरक्षा) वॉल में आई दरारों के चलते अब नए सिरे से मजबूत सुरक्षा दीवार का निर्माण शुरू कर दिया गया है। लंबे समय से इस स्थान पर सड़क धंसने की घटनाओं के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। नई रिटेनिंग वॉल बनने से सड़क को मजबूती मिलने के साथ ही यातायात भी अधिक सुरक्षित होने की उम्मीद है।

निर्माण कार्य से जुड़े कंपनी के प्रतिनिधि संजीव मिश्रा और मुनीफ ने सीएनई को बताया कि सुरक्षा दीवार का निर्माण तेजी से किया जा रहा है और इसे 15 से 20 दिनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि निर्माण पूरा होने के बाद सड़क की स्थिरता बढ़ेगी तथा भविष्य में धंसाव की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण मिल सकेगा।

इधर, भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार भूस्खलन और पहाड़ियों से पत्थर गिरने की घटनाओं को देखते हुए सुरक्षात्मक कार्यों की दिशा में भी पहल तेज हो गई है। टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (टीएचडीसी) के भू-वैज्ञानिकों की टीम ने राष्ट्रीय राजमार्ग के संवेदनशील और क्रॉनिक जोनों का विस्तृत निरीक्षण किया।
टीम ने मेढ़क पत्थर, भौर्या मोड़, लोहाली तथा क्वारब के दो स्थानों पर स्थित पहाड़ियों का स्थलीय सर्वेक्षण कर मिट्टी एवं चट्टानों के नमूने एकत्र किए। इन नमूनों के वैज्ञानिक परीक्षण के आधार पर पहाड़ियों के उपचार की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
राष्ट्रीय राजमार्ग के सहायक अभियंता प्रकाश सिंह रौतेला ने बताया कि टीएचडीसी के विशेषज्ञों ने सभी संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण कर आवश्यक नमूने लिए हैं। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इन खतरनाक पहाड़ियों का वैज्ञानिक उपचार किया जाएगा, जिससे बरसात के दौरान भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाओं में कमी आएगी तथा यात्रियों को सुरक्षित और निर्बाध यातायात की सुविधा मिल सकेगी।
निरीक्षण के दौरान टीएचडीसी की टीम के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के चंद्रशेखर कांडपाल एवं मोहन सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।
इन स्थानों को माना गया सबसे संवेदनशील
टीएचडीसी की टीम ने मेढ़क पत्थर, भौर्या मोड़, लोहाली और क्वारब के दो स्थानों को राष्ट्रीय राजमार्ग के सबसे संवेदनशील (क्रॉनिक) जोन के रूप में चिन्हित कर उनका निरीक्षण किया। इन स्थानों पर अक्सर भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं होती रहती हैं। वैज्ञानिक परीक्षण के बाद यहां स्थायी सुरक्षात्मक कार्य किए जाएंगे, ताकि विशेषकर मानसून के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात सुरक्षित और सुचारु बना रहे।



