सीएनई रिपोर्टर, रुद्रप्रयाग: एक ऐसा वीर जिसका परिचय सिर्फ़ उसकी बहादुरी है। 1991 में दो महिलाओं को एक खूंखार गुलदार (तेंदुए) के हमले से बचाकर तत्कालीन मुख्यमंत्री से ‘जीवन रक्षा पदक’ पाने वाले रुद्रप्रयाग के भरत सिंह चौधरी ने एक बार फिर मौत के सामने खड़े होकर जीवन की जीत हासिल की है।
यह असाधारण शख्स, जिसे पहले तेंदुए से लड़ने के लिए सम्मानित किया गया था, बुधवार सुबह अचानक एक भालू के जानलेवा हमले का शिकार हो गया। कोट-मल्ला के ग्रामीण भरत सिंह की यह नई और दिल दहला देने वाली भिड़ंत न केवल उनके अद्भुत साहस को दर्शाती है, बल्कि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते वन्यजीव आतंक की भयावह तस्वीर भी पेश करती है।

भालू से संघर्ष: ‘करो या मरो’ की स्थिति में पेड़ पर चढ़कर लात मारी
बुधवार सुबह करीब साढ़े सात बजे, पानी की लाइन खोलकर घर लौट रहे फीटर भरत सिंह चौधरी पर घात लगाकर बैठे एक भालू ने अचानक हमला कर दिया। अपनी जान बचाने के लिए, भरत ने बिना समय गंवाए पास के एक पेड़ पर चढ़ना शुरू कर दिया। मगर, भालू ने भी हार नहीं मानी और वह भी तेज़ी से पेड़ पर चढ़ने लगा।
मौत को सामने देख, भरत सिंह ने अपनी अंतिम शक्ति झोंक दी। उन्होंने नीचे से चढ़ रहे भालू को अपने पैर से ज़ोरदार लात मारी। पलटवार में, आक्रामक भालू ने उनके पैरों को अपने जबड़ों में कस लिया और उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। भरत सिंह की चीख-पुकार सुनकर आस-पास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे, जिसके बाद भालू जंगल की ओर भागा। गंभीर रूप से ज़ख़्मी भरत सिंह को ज़िला चिकित्सालय ले जाया गया, जहाँ से बेहतर उपचार के लिए उन्हें श्रीनगर रेफर कर दिया गया।
बहादुरी की मिसाल: 1991 में बचाया था गुलदार के हमले से
भरत चौधरी के लिए जंगली जानवरों से भिड़ना कोई नया अनुभव नहीं है। उनकी बहादुरी का प्रमाण 1991 की घटना से मिलता है, जब उन्होंने घास लेने गई दो महिलाओं पर झपटे गुलदार से अकेले संघर्ष किया और उनकी जान बचाई। उनके इस असाधारण साहस के लिए, उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री (स्वर्गीय) कल्याण सिंह ने उन्हें प्रतिष्ठित जीवन रक्षा पदक और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया था। तेंदुए से दो महिलाओं को बचाने के बाद अब भालू से उनकी यह साहसिक मुठभेड़, उन्हें सचमुच उत्तराखंड का ‘जीवन रक्षक’ बनाती है।
ग्रामीण परेशान, वन्यजीवों का आतंक चरम पर
इस घटना ने रानीगढ़ पट्टी के कोट-मल्ला समेत अन्य ग्रामीण इलाकों में भालू और गुलदार के आतंक से बनी दहशत को और गहरा कर दिया है।
- भरत सिंह चौधरी ने बताया कि ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे हैं, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधि और सरकार इस समस्या पर गंभीर नज़र नहीं आ रहे हैं। उन्होंने विधायक रुद्रप्रयाग भरत चौधरी के गृह क्षेत्र में भी इस ख़तरे के बने रहने पर चिंता ज़ाहिर की।
- पर्यावरण विशेषज्ञ देवराघवेन्द्र चौधरी ने चिंता जताते हुए कहा कि पिछले 5 से 10 सालों में जंगली जानवरों के हमलों में तेज़ी से वृद्धि हुई है। उन्होंने वन विभाग की ठोस कार्रवाई न होने पर सवाल उठाए और कहा कि अब ग्रामीण घरों के भीतर भी सुरक्षित नहीं हैं।
वन विभाग की रिपोर्ट: 10 भालू सक्रिय, खानपान में बदलाव
रुद्रप्रयाग प्रभागीय वनाधिकारी रजत सुमन ने स्वीकार किया कि जिले में भालू का आतंक बढ़ रहा है।
- उन्होंने बताया कि रानीगढ़ पट्टी का भुनका, कोट-मल्ला जैसे 7 से 8 क्षेत्र अति संवेदनशील हैं।
- अधिकारी के अनुसार, ज़िले में लगभग 9 से 10 भालू सक्रिय होकर मानवों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
- वन विभाग ने लोगों से सुबह और शाम के समय बाहर न निकलने की अपील की है।
- डीएफओ ने बताया कि मौसम में आए बदलाव और लंबे समय तक हुई बारिश के कारण जंगली जानवरों के व्यवहार और खानपान में भी बदलाव देखा जा रहा है, जिससे वे अपनी लोकेशन बदलकर नए क्षेत्रों में हमले कर रहे हैं।
उच्च चिकित्सा के निर्देश
गंभीर रूप से घायल भरत सिंह चौधरी का हालचाल जानने के लिए मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना स्वयं एक्स-रे रूम और इमरजेंसी में पहुंचे। उन्होंने भरत सिंह के शीघ्र और बेहतर उपचार के लिए चिकित्सकीय टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं।

