पर्यटन : ये वादियाँ ये फ़िज़ाएं बुला रही हैं तुम्हे ! चले आओ फूलों की घाटी
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सीएनई डेस्क
Valley of Flowers National Park
अगर आप पर्यटन के शौकीन हैं और प्रकृति से प्रेम करते हैं तो आपको जीवन में एक बार उत्तराखंड जनपद में स्थित फूलों की घाटी का दीदार जरूर करना चाहिए। अगर यह कहा जाये कि यह स्थान धरती के स्वर्ग से कम नहीं, तो अतिशियोक्ति नहीं होगी। यहां खिलने वाले 300 से अधिक प्रजातियों के फूलों की रंगत देख आपके चेहरे में अवश्यक मुस्कान खिल उठेगी।
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इस साल खूब खिला हल्दीय फूल
इस साल वर्ष 2022 में तो यहां पेडीकुलेरिस (हल्दीय फूल) भी खूब रंगत बिखेर रहा है। पिछले साल यह बहुत कम खिला था, लेकिन इस साल घाटी के गेट से लेकर पुष्पावती नदी के किनारे तक वातावरण को सुगंध से भर रहा है। हर साल यहां देश—विदेश से बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी व पर्यटक पहुंचते हैं।
कोरोना ने पैदावार बढ़ाने में दिया योगदान —
लोकल गाइड चंद्रशेखर चौहान का कहना है कि इस साल तो अधिकांश पर्यटक हल्दीय फूल को देखने ही पहुंच रहे हैं। Botanist Dr. Vinay Nautiyal के अनुसार यह एक औषधीय पौधा है। इसका उपयोग बुखार और इनफेक्शन रोकने के लिए भी किया जाता है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि कोरोना की वजह विगत दो सालों से सीमित संख्या में पर्यटकों के पहुंचने से इस पौध को फलने—फूलने का अवसर मिला है। चूंकि यह एक छोटा पौध है और अकसर पैरों तले कुचला जाता है, जिस कारण इसकी पैदावार नहीं बढ़ पा रही थी।
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बड़ी संख्या में पहुंच रहे पर्यटक
अधिकारियों के अनुसार इस साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं। घाटी को आने वाले मार्ग की दशा भी प्रशासन द्वारा सुधार दी गई है। टूरिस्ट दिनभर घाटी में घूमने के बाद रात्रि विश्राम के लिए मुख्य यात्रा पड़ाव घांघरिया पहुंच रहे हैं।
Valley of Flowers के बारे में यह भी जानिये —
⏩ देवभूमि उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल के चमोली जनपद में स्थित राष्ट्रीय उद्यान को फूलों की घाटी Valley of Flowers के नाम से जाना जाता है।
⏩ फूलों की घाटी World Organization, UNESCO द्वारा साल 1982 में विश्व धरोहर घोषित किया गया था।
⏩ यह अभ्यारण्य नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान का एक भाग है।
⏩ इसे हिमालय क्षेत्र पिंडर घाटी अथवा pindar valley के नाम से भी जाना जाता है।
⏩ यह उद्यान 87.50 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है। इसकी लंबाई 05 किलोमीटर और चौड़ाई दो किमी है।
⏩ इस खूबसूरत घाटी की खोज England के पर्वतारोही frank smite ने साल 1933 में की थी।
⏩ वर्ष 1939 में ब्रिटिश महिला John Margaret इस घाटी का दीदार करने आयी थीं। प्रवास के दौरान उन्होंने यहां से कई प्रजाति के फूलों को लंदन भेजा। August 1939 में उनकी यहां एक दुर्घटना में मौत हो गयी थी। यह घटना आज भी फूलों की घाटी के एक शिलालेख में अंकित है।
⏩ फूलों की घाटी भ्रमण के लिये July, August and September माह बढ़िया माना जाता है। सितंबर में यहां ब्रह्मकमल के दीदार किये जा सकते हैं।
⏩ Valley of Flowers आने के लिए चमोली जिले का आंखरी बस अड्डा गोविंदघाट है, जो कि फूलों की घाटी से 275 किमी दूर है।
⏩ जोशीमठ से गोविंदपुर की दूरी 19 किलोमीटर है। यहां से प्रवेश स्थल की दूरी लगभग 13 किमी है। यहां पहुंचने के बाद आपके पास तीन किमी के दायरे में घूमने का अवसर है।
⏩ November to May घाटी अकसर बर्फ की चादर ओढ़ लेती है। July and August के दौरान एल्पाइन जड़ी की छाल की पंखुडियों में रंग छिपे रहते हैं।
यहां मिलने वाली फूलों की मुख्य प्रजातियों में यह हैं शामिल —
एनीमोन, जर्मेनियम, मार्श, गेंदा, प्रिभुला, पोटेन्टिला, जिउम, तारक, लिलियम, हिमालयी नीला पोस्त, बछनाग, डेलफिनियम, रानुनकुलस, कोरिडालिस, इन्डुला, सौसुरिया, कम्पानुला, पेडिक्युलरिस, मोरिना, इम्पेटिनस, बिस्टोरटा, लिगुलारिया, अनाफलिस, सैक्सिफागा, लोबिलिया, थर्मोपसिस, ट्रौलियस, एक्युलेगिया, कोडोनोपसिस, डैक्टाइलोरहिज्म, साइप्रिपेडियम, स्ट्राबेरी एवं रोडोडियोड्रान।