16 दिसंबर को होगी सुनवाई
हाई अलर्ट पर रही पुलिस फोर्स, 17 से अधिक गिरफ्तार
CNE REPORTER, हल्द्वानी। बनभूलपुरा-गफूरबस्ती क्षेत्र में रेलवे की 31.87 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण हटाने के आदेश के विरुद्ध दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को होने वाली अंतिम सुनवाई टल गई है। अब इस संवेदनशील मामले पर मंगलवार, 16 दिसंबर को फैसला आने की संभावना है।

फैसले के संभावित दिन को देखते हुए, उत्तराखंड पुलिस और प्रशासनिक अमला बुधवार को दिन भर पूर्ण अलर्ट मोड पर रहा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में 400 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई और शांति भंग करने की कोशिश कर रहे 17 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। यह मामला लगभग 50 हजार की आबादी के भविष्य को प्रभावित करता है।
सुनवाई टलने के बावजूद प्रशासन की चौकसी बरकरार
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की तारीख टलने के बावजूद, रेलवे, राज्य सरकार और स्थानीय पुलिस-प्रशासनिक तंत्र ने कोई ढील नहीं बरती। नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. मंजुनाथ टीसी स्वयं पुलिस बल को फ्रंट से लीड करते हुए दिखाई दिए। उन्होंने सरकारी कार्यवाही के दौरान किसी भी प्रकार की कानून व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए।
कानून व्यवस्था बनाए रखने हेतु पुलिस की प्रभावी कार्यवाही:
- गिरफ्तारी और पाबंदी: संभावित उपद्रवियों और अवांछनीय तत्वों के विरुद्ध पुलिस ने प्रभावी कार्यवाही की। 17 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया, और 136 लोगों के विरुद्ध भारी धनराशि पर मुचलका पाबंद की कार्यवाही की गई, ताकि उन्हें शांति भंग करने से रोका जा सके।
- सुरक्षा व्यवस्था:
- 400 पुलिसकर्मी बनभूलपुरा क्षेत्र में मुस्तैद किए गए।
- पूरे क्षेत्र को जीरो जोन घोषित किया गया।
- जनपद की सीमाओं पर सघन चेकिंग की गई।
- संवेदनशील क्षेत्रों में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई।
- निगरानी और डोमिनेशन:
- सीसीटीवी और ड्रोन से पूरे क्षेत्र की लगातार निगरानी की गई।
- संदिग्धों पर विशेष निगरानी रखी गई।
- सोशल मीडिया पर भी पैनी नजर रखी गई, ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके।
- एरिया डोमिनेशन (Area Domination) की कार्यवाही सुनिश्चित की गई, जिसमें बिना पहचान पत्र या अनावश्यक घूमने वालों से सख्ती से पूछताछ की गई।
एसएसपी डॉ. मंजुनाथ टीसी ने जनता से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की और चेतावनी दी कि कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मामले की पृष्ठभूमि: 50 हजार की आबादी की किस्मत का सवाल
यह मामला लगभग 50 हजार की आबादी से जुड़ा हुआ है, जो रेलवे द्वारा चिन्हित 31.87 हेक्टेयर भूमि पर निवास करती है। इस भूमि पर 4365 घर हैं, साथ ही यहाँ 25 के करीब धार्मिक स्थल (मंदिर और मस्जिद), पाँच सरकारी स्कूल, और एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी बना है।
- रेलवे का तर्क है कि अतिक्रमण के कारण रेलवे विस्तार की योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है।
- इस मामले में हाई कोर्ट में जनहित याचिका वर्ष 2016 में सामाजिक कार्यकर्ता रविशंकर जोशी द्वारा दायर की गई थी।
- वर्ष 2021 में निचली अदालत ने बेदखली नोटिस के विरुद्ध दायर 33 अपीलों को खारिज किया।
- मंगलवार, 20 दिसंबर 2022 को नैनीताल हाई कोर्ट ने रेलवे की भूमि से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट में पहले यह सुनवाई 2 दिसंबर को समयाभाव के चलते टल गई थी, और अब बुधवार को होने वाली सुनवाई टलकर मंगलवार, 16 दिसंबर को होगी, जहाँ इस मामले पर अंतिम निर्णय होने की संभावना है।

