बागेश्वर : राज्य आंदोलनकारियों का सही चिन्हीकरण नहीं होने पर इंस्पेक्टर कोरंगा ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

बागेश्वर। पुलिस की नौकरी छोड़कर उत्तराखंड राज्य आंदोलन में कूदे इंस्पेक्टर दरवान सिंह कोरंगा ने जिलाधिकारी को सोमवार को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों का सही चिन्हीकरण नहीं होने से असल आंदोलनकारियों की उपेक्षा हो रही है।
उत्तर प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात लीती गांव निवासी दरवान सिंह कोरंगा पुत्र पान सिंह कोरंगा ने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन में शामिल होने के लिए छह वर्ष पहले उन्होंने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और स्वैच्छिक सेवानिवृत्त हो गए। कपकोट तहसील बनाओ, बागेश्वर जिला और उत्तराखंड राज्य बनाओ आंदोलन में तीन सूत्रीय मांगों को लेकर वह भी आंदोलन मे कूद गए थे। 1993 में सेवानिवृत्त हुए और आंदोलन में सक्रिय रहे। जबकि उनकी सेवानिवृत्ति 1999 में थी। उनकी तीनों मांगें पूरी हो गई और वह प्रसन्न थे। लेकिन उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियो का सही चयन नहीं होने पर उन्हें दुख होता है। जो लोग उत्तराखंड राज्य का विरोध में रहते थे, वहां के लोग अधिक संख्या में राज्य आंदोलनकारी घोषित किए गए हैं।
उन्हें लाभ भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि उनके जैसे तमाम ऐसे लोग हैं, जिन्होंने राज्य आंदोलन के दौरान नौकरी और अन्य काम छोड़ दिए थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सूची में उनका नाम 11 नंबर पर अंकित है। हाइकोर्ट की सूची में आठ नंबर पर है। उन्होंने कहा कि असली आंदोलनकारियों का चिह्निकरण करने में जिला प्रशासन पूरी तरफ असफल रहा है।
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