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प्रेरणादायी : राष्ट्रीय स्तर पर ‘ढाई आंखर’ लेखन उत्तराखंड के नाम रहे तीन पुरस्कार, अल्मोड़ा के डा. ललित जलाल व पवनेश ठकुराठी और हरिद्वार की वंदना ने किया राज्य का नाम रोशन

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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा
भारत सरकार संचार मंत्रालय, उत्तराखंड डाक परिमंडल द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पत्र लेखन प्रतियोगिता ”ढाई आंखर—2019” में राष्ट्रीय स्तर पर तीन पुरस्कार उत्तराखंड के नाम रहे। इन तीनों में से भी दो विजेता अल्मोड़ा के हैं। जिन्होंने पत्र लेखन के जरिये उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। पुरस्कृतों में अल्मोड़ा के पवनेश ठकुराठी, डा. ललित जलाल व हरिद्वार की वंदना शामिल हैं।
गौरतलब है कि ‘प्रिय बापू आप अमर हैं’ विषयक इस राष्ट्रीय पत्र लेखन प्रतियोगिता में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 150वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आयोजित की गई। जो 1 अगस्त 2019 से 31 जनवरी, 2020 तक चली। इसका लक्ष्य पत्र लेखन को बढ़ावा देना था। जिसे हिंदी, अंग्रेजी या स्थानीय भाषा में लिखने की छूट थी। दो वर्गों में हुई इस प्रतियोगिता में दो श्रेणियां थीं, एक अंतरदेशीय पत्र लेखन व दूसरा लिफाफा श्रेणी। उत्तराखंड डाक परिमंडल के अंतर्गत प्र​तियोगिता के तहत ​कुल 8029 प्रविष्टियां प्राप्त हुई थी। जिनमें से राज्य स्तर पर 12 सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियों का चयन उन्हें पूर्व में पुर​स्कृत किया था और इन नामों को राष्ट्रीय स्तर पर चयन के लिए डाक महानिदेशालय को भेजा गया था। अब राष्ट्रीय स्तर पर चुने गए प्रतिभागियों में से तीन पुरस्कार उत्तराखंड के नाम रहे हैं। जिनमें राष्ट्रीय स्तर पर अंतर्देशीय वर्ग में 18 वर्ष तक की आयुवर्ग में हरिद्वार देहरादून की वंदना शर्मा एवं 18 वर्ष से अधिक उम्र एवं लिफाफा वर्ग में अल्मोड़ा के शिक्षक पवनेश ठकुराठी ने द्वितीय स्थान पाया है। श्री ठकुराठी जिले के ताकुला ब्लाक अंतर्गत जीआईसी नाई में हिंदी प्रवक्ता हैं। इसके अतिरिक्त उनकी साहित्य व लेखन में अत्यधिक रुचि है। श्री ठकुराठी के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लेख, समालोचना और कविताएं बहुतायत प्रकाशित होते रहे हैं। इनके अलावा 18 वर्ष से अधिक अंतर्देशीय वर्ग में अल्मोड़ा के शिक्षक डा. ललित मोहन सिंह जलाल ने राष्ट्रीय स्तर पर तृतीय स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने राज्य स्तर पर प्रथम स्थान पाया था। डा. जलाल वर्तमान में जीआईसी अल्मोड़ा में विज्ञान अध्यापक हैं। श्री जलाल जीआईसी अल्मोड़ा में स्थापित स्वामी विवेकानंद अध्ययन एवं शोध केंद्र के प्रभारी भी हैं। इनमें राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय पुरस्कार 25 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार 10 हजार रुपये प्रदान किया जा रहा है।

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