पीएसी कॉन्स्टेबल के पति की रहस्यमयी मौत ने उठाए कई सवाल
सीएनई रिपोर्टर, रुद्रपुर। उधम सिंह नगर जिले में न्याय व्यवस्था की सुस्त चाल और संवेदनहीनता की एक और मार्मिक तस्वीर सामने आई है। पीएसी कॉन्स्टेबल के पति आकाश दुबे की संदिग्ध मौत के मामले में पूरे दो साल बाद कोर्ट के हस्तक्षेप पर जाकर पुलिस ने मुकदमा (FIR) दर्ज किया है। इस दौरान मृतक के पिता विश्वामित्र दुबे न्याय की आस में दर-दर भटकते रहे, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई।
यह मामला सिर्फ एक मौत का नहीं, बल्कि न्याय की राह में खड़ी व्यवस्था की दीवारों का आईना बन गया है।
प्रेम विवाह बना मौत की वजह?
आदर्श कॉलोनी, घास मंडी निवासी आकाश दुबे का लगभग सात वर्षों से नैना तिवारी से प्रेम संबंध था। नैना तिवारी 31वीं वाहिनी पीएसी, रुद्रपुर में कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात है। दोनों ने 13 मार्च 2023 को उपनिबंधक कार्यालय रुद्रपुर में प्रेम विवाह किया, लेकिन यह विवाह नैना के परिजनों को स्वीकार नहीं था।
परिजनों के अनुसार, विवाह के बाद भी नैना की मां गीता तिवारी और मामा गिरीश चंद्र पांडे लगातार दंपत्ति के जीवन में हस्तक्षेप करते रहे। आकाश को जान से मारने और पूरे परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाने की खुली धमकियां दी जाती रहीं।
20 अप्रैल की वह रात, जो सब कुछ बदल गई
20 अप्रैल 2024 की रात करीब 8 बजे अचानक कुछ लोग आकाश के घर पहुंचे। इसके बाद घर से विवाद की आवाजें आने लगीं। जब परिवार ने कमरे में जाकर देखा तो आकाश दुबे मृत अवस्था में पड़ा था।
परिवार का आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित हत्या है, जिसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। 21 अप्रैल को पोस्टमार्टम हुआ, लेकिन परिवार का कहना है कि जांच की दिशा शुरू से ही भटकाई गई।
तहरीर, शिकायत और निराशा का सिलसिला
विश्वामित्र दुबे ने तुरंत कोतवाली रुद्रपुर में तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद 11 मई 2024 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को रजिस्ट्री डाक से शिकायत भेजी गई, फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई।
लगभग दो वर्षों तक थाने, अधिकारियों और कार्यालयों के चक्कर काटने के बाद थक-हार कर उन्होंने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रुद्रपुर की अदालत का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट का हस्तक्षेप, तब जाकर हरकत में आई पुलिस
कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। इसके बाद कोतवाली रुद्रपुर में आईपीसी की धारा 302, 201, 34, 120बी और 506 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया।
पुलिस की सफाई
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार रतूड़ी का कहना है कि
“मामला पुराना है, कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है। विवेचना जारी है, जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।”
सबसे बड़ा सवाल — अगर कोर्ट न जाता पिता, तो क्या मिलती न्याय की उम्मीद?
यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है—
- क्या पीड़ित परिवार की सुनवाई तभी होती है जब वे अदालत की शरण लें?
- क्या वर्दी से जुड़े मामलों में पुलिस जांच पर दबाव काम करता है?
- दो साल तक एफआईआर दर्ज न करना क्या लापरवाही नहीं, बल्कि न्याय से इनकार है?
एक पिता की टूटी उम्मीदें और अधूरा इंसाफ
विश्वामित्र दुबे का दर्द उनकी आंखों में साफ झलकता है। उनका कहना है —
“मैंने अपने बेटे को खो दिया, अब सिर्फ न्याय चाहिए। अगर अब भी सच सामने नहीं आया, तो सिस्टम पर से भरोसा उठ जाएगा।”
अब सबकी निगाहें जांच पर
अब जबकि मामला दर्ज हो चुका है, पूरे प्रदेश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि—
क्या आकाश दुबे को इंसाफ मिलेगा या यह फाइल भी जांच के ढेर में दफन हो जाएगी?

