सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा
उत्तराखंड पेंशनर आर्गनाइजेशन की अल्मोड़ा शाखा ने स्वास्थ्य गोल्डन कार्ड योजना के नाम पर भारी कटौती करने का सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने घोर विरोध किया है। आपत्ति इस बात पर है कि सेवारत कर्मचारियों के समान ही सेवानिृत्त कर्मचारियों से भी कटौती का प्रावधान किया है। वर्चुअल तरीके से हुई इस बैठक में तय हुआ कि यदि संगठन की मांग नहीं मानी गई, तो वह अदालत की शरण लेगा।
आर्गनाइजेशन की बैठक में पेंशनरों ने कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा पेन्शनर्स हेतु स्वास्थ्य गोल्डन कार्ड योजना लागू की गई है। इसके लिए पेन्शनर्स की पेन्शन से क्रमशः 250 रुपये, 450 रुपये, 650 रुपये व 1000 रुपये की कटौती का प्रावधान किया गया है। यह कटौती सेवारत कर्मचारियों के समान ही है। जो अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सेवारत तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों की स्थिति अलग-अलग है। इसी क्रम में उत्तराखण्ड पेंशनर आर्गनाइजेशन ने यह मांग दोहराई कि पेंशनर्स की पेंशन से सेवारत कर्मचारियों के बराबर ही कटौती नहीं की जानी चाहिए। बैठक में पेंशनर्स को यह विकल्प देने की मांग की गई कि वे इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं अथवा नहीं। यदि जबरन योजना के नाम पर पेंशनर्स की पेंशन से कटौती की गई, तो पेंशनरों को न्यायालय की शरण में जाना पडे़गा। साथ ही गोल्डन कार्ड बनाने की अवधि बढ़ाये जाने की मांग भी की गई।
बैठक में संगठन के प्रान्तीय कार्यकारिणी सदस्य चन्द्रमणी भट्ट, विनोद जोशी, मोहन चन्द्र काण्डपाल, यशवंत परिहार, जेसी दुर्गापाल, रीता दुर्गापाल, पीएस बोरा, पीएस सत्याल, गोकुल रावत, आनन्द सिंह बगडवाल, आनन्द सिंह ऐरी, आनन्द बल्लभ लोहनी, लक्ष्मण सिंह ऐठानी, मथुरादत्त मिश्रा, लीला खोलिया, नवीन चन्द्र पाठक, पुष्पा कैड़ा, सुनयना मेहरा, पान सिंह बिष्ट, मोहन सिंह नेगी, भगवत सिंह बिष्ट, आनंद बल्लभ जोशी, सीएस बनकोटी, बालादत्त काण्डपाल, नवीन पाठक आदि सम्मिलित हुए। बैठक की अध्यक्षता गिरीश चंद्र तिवारी और संचालन हेम जोशी ने किया।
अल्मोड़ा न्यूजः पेंशन से जबरन व मनमानी कटौती बंद नहीं हुई, तो न्यायालय की शरण लेंगे पेंशनर, गोल्डन कार्ड का मसला
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