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हल्द्वानी न्यूज : आदर्श जीवन नशा मुक्ति केंद्र या यातना सेंटर, केंद्र संचालक को बंधक बना कर भागे सात मरीज

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हल्द्वानी। आदर्श जीवन नशा मुक्ति केंद्र की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही है। इससे पहले कि पिथौरागढ़ निवासी प्रवीण की मौत की कहानी ठंडी होती शु​क्रवार की रात केंद्र में भर्ती सात मरीजों ने केंद्र के संचालक को बंधक बना कर उनसे मोबाइल फोन व मुख्य द्वार की चाबियां छीन कर केंद्र से दौड़ लगा दी। बाद में मरीजों के परिजनों ने दोनों चीजें केंद्र संचालक को लौटा दीं। इस नए प्रकरण से नशा मुक्ति केंद्र में मरीजों को दी जाने वाली यातनाओं की बहस और लंबी हो गई ​है। इस नए घटनाक्रम के बाद पुलिस की सलाह पर केंद्र के संचालक ने शेष बचे आठ अन्य मरीजों को भी उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।
केंद्र के संचालक राजीव जोशी के अनुसार शुक्रवार की देर रात केंद्र में भर्ती सात मरीजों ने उन्हें जगाकर गेट की चाबियां मांगी। इनकार करने पर सभी ने संचालक का मोबाइल फोन, टॉर्च और चाबी छीन ली।
इसके बाद गेट खोलकर भाग गए। मरीज संभवत उनका मोबाइल इस लिए ले गए थे ताकि वे पुलिस को सूचना न दे दें। केंद्र संचालक ने कलल पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने मौका मुआयना कर अन्य आठ मरीजों को भी उनके घर छोड़ने की सलाह दी। इस पर परिजनों को बुलवाकर सभी मरीजों को उनके सुपुर्द कर दिया गया। जांच में लगभग साफ हो चला है कि शुक्रवार की रात जो मरीज भागे थे वे केंद्र के कर्मचारियों की प्रताड़ना से तंग आकर भागे थे। इनमें दो युवक दमुवाढूंगा निवासी, एक मुखानी निवासी, एक रामनगर निवासी और दो बेलबाबा मंदिर के पास रहने वाले हैं। मुखानी थानाध्यक्ष भगवान सिंह महर ने कहा कि सभी मरीजों को उनके घर भेज दिया गया है। केंद्र संचालक राजीव जोशी ने बताया कि मरीजों के परिजनों ने उनका मोबाइल और टॉर्च वापस कर दिया है।चार दिन पहले पिटाई से बने घाव हरे, छोटी गलती होने पर तीन लोग खंभे से बांधकर आंतकियों की तरह पीटते थे
हल्द्वानी। नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती गौलापार का युवक बेरहमी की दास्तां बताते बताते रो पड़ा। उसने बताया कि केंद्र में बर्तन मांजने, झाड़ूू लगाने और खाना बनाने का काम दिया जाता था। छोटी सी छोटी गलती पर केंद्र के तीन लोग पीयूष के इशारे पर उन्हें खंभे से बांधकर पीटते थे। पिटाई के बाद इलाज भी नहीं कराया जाता था। गौलापार निवासी युवक के भाई ने बताया कि उसने भर्ती कराते समय 15 हजार रुपये दिए थे। इसके बाद प्रतिमाह दस हजार रुपये के अलावा डेढ़ हजार रुपये फल और दूध के लिए दिए जाते थे। इसके बाद भी भर्ती मरीजों के साथ क्रूरतापूर्ण व्यवहार किया जाता था। पीड़ित युवक ने बताया कि चार दिन पहले बर्तन साफ करने में हुई गड़बड़ी पर जेल भेजे गए पीयूष कौशिक, अभिषेक समेत तीन लोगों ने उसे खंभे से बांधकर पीटा था। चार दिन बाद भी युवक के आठ घावों के निशान अब भी नहीं मिटे हैं। आरोप लगाया कि उन्होंने उसके सिर और पेट में भी डंडे मारे थे। सुबह नाश्ते में संस्थान की ओर से मैक्रोनी दी जाती थी। रविवार को सिर्फ पराठा दिया जाता था। दोपहर में प्रतियोगिताएं होती थीं। शाम को खाना बनाने के लिए सभी की अलग-अलग जिम्मेदारी पीयूष तय करता था। नए मरीजों के आने पर एक दिन सिर्फ डॉक्टर देखने के लिए आते थे। पिटाई के बाद भी किसी का इलाज नहीं कराया जाता था।

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