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हल्द्वानी न्यूज : रवींद्र नाथ टैगोर जयंती पर आज रामगढ़ से हो रहा आन लान वेबनार

क्रिएटिव न्यूज एक्सप्रेस ब्यूरो

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हल्द्वानी। एशिया में साहित्य का पहला नोबेल पुरस्कार पाने वाले राष्ट्रगान के रचयिता गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर का जन्मदिवस विगत 6 वर्षों से “शान्तिनिकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया” द्वारा 7 मई को रामगढ़ में मनाया जाता रहा, परंतु इस वर्ष कोरोना वाइरस के संक्रमण से बचाव हेतु किये गए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण 7 मई 2020 को शान्तिनिकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया द्वारा गुरूदेव रबींद्रनाथ टैगोर का जन्मदिवस समारोह ऑनलाइन आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ मानव संसाधन मंत्री डा. रमेश पोखरियाल “निशंक” द्वारा किया जा गया। शान्ति निकेतन ट्रस्ट फॉर हिमालया के अध्यक्ष पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विधायक जागेश्वर गोविंद सिंह कुंजवाल ने ऑनलाइन जन्म दिवस समारोह समिति में प्रतिभाग किया और अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व समिति के अध्यक्ष कुंजवाल ने की
इस समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय उच्चायुक्त, बांग्लादेश रिवा गांगुली दास द्वारा अपना आशीर्वचन प्रदान किया गया। समारोह में कुलपति, विस्वा-भारती केन्द्रीय विश्वविद्यालय के साथ अध्यक्ष, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे।
उन्होंने बताया कि रामगढ़ (नैनीताल) स्थित गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की कर्मस्थली टैगोर टॉप को साहित्यिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने हेतु प्रथम प्रयास भी वर्तमान में मानव संसाधन विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल “निशंक” द्वारा ही किया गया था। उत्तर प्रदेश के संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री के रूप में रहते हुए 17 अप्रैल, २००० को उमागढ़ (रामगढ़) स्थित महादेवी साहित्य संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम में गुरुदेव की स्मृति में रवीन्द्र संग्रहालय की स्थापना के साथ सम्पर्क मार्ग की मरम्मत तथा आसपास के क्षेत्र के सौंदर्यीकरण हेतु 50 लाख रुपए के अनुदान की घोषणा की थी। इस अनुदान की प्रथम किस्त के रूप में 22 लाख रुपये कार्यदायी संस्था ग्रामीण अभियत्रंण सेवा को अवमुक्त भी कर दिये गये थे। गुरुदेव टैगोर की कर्मस्थली टैगोर टॉप को अन्तर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने हेतु डा. निशंक हमेशा से प्रयासरत रहे हैं।
उन्होंने बताया कि माननीय मंत्री, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार की प्रेरणा से इस बार राष्ट्रीय संगोष्ठी को ऑनलाइन (वेबनार) मनाया जा रहा है।

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