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अल्मोड़ा : वेबिनार के जरिये नई शिक्षा नीति पर हुई बहस, नई नीति में निरक्षरों के लिए कोई प्रावधान नहीं होने की बात खास तौर से अखरी

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सीएनई संवाददाता, अल्मोड़ा
दिनांक — 9 सितंबर, 2020

भारत ज्ञान विज्ञान समिति तथा बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा ने संयुक्त रूप से अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के उपलक्ष्य में ‘शिक्षा नीति 2020’ विषयक ऑनलाइन वेबिनार आयोजित किया। जिसमें शिक्षा नीति पर काफी बहस हुई। कई लोगों ने अपने विचार रख अपने—अपने तरीके से नई नीति के गुण—दोषों पर मंथन किया। खास बात ये अखरी कि नई शिक्षा नीति में निरक्षरों के लिए कोई प्रावधान नहीं है।
वेबिनार को संबोधित करते हुए भारत ज्ञान विज्ञान समिति के प्रांतीय अध्यक्ष एवं दून साइंस फोरम के महासचिव विजय भट्ट ने कहा नई शिक्षा नीति में वर्ष 2030 तक देश में शत—प्रतिशत साक्षरता का लक्ष्य रखा गया है, परंतु लक्ष्य प्राप्त करने के प्रावधानों का उल्लेख नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या 2005 के प्रावधानों का समावेश नहीं है। नई शिक्षा नीति में बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा पाने का अधिकार है। यह स्वागत योग्य है, लेकिन समूचे देश में एक पाठ्यक्रम होने से बच्चों को अपने परिवेश, संस्कृति से दूर रखने का प्रयास किया जा रहा है। शिक्षा का अधिकार कानून 2009 में परीक्षा के स्थान पर सतत मूल्यांकन एवं भयमुक्त शिक्षा की बात करते हुए अब कक्षा 3, 5 व 8 की परीक्षा जिला स्तर पर गठित प्राधिकरण के माध्यम से होंगी। इससे एक ओर बच्चों में परीक्षा का भय बनेगा, वहीं दूसरी तरफ शिक्षकों व स्कूलों की स्वायत्ता पर प्रश्नचिह्न लगेगा। उन्होंने कहा कि नया अधिनियम जातिगत व्यवस्था को बढ़ाने का काम करते हुए बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से दूर करेगा। नई शिक्षा नीति में गांवों की अशिक्षित व निरक्षर जनता के लिए साक्षरता कार्यक्रमों का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि इस दूसरी ओर आंगनबाड़ी कार्यकर्ती पर अतिरिक्त बोझ डाला गया है।
अध्यक्षीय भाषण में एसएसजे विश्वविद्यालय अल्मोड़ा की शिक्षा संकाय की प्रो. विजया ढौढियाल ने नई शिक्षा नीति का स्वागत करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति में लड़कियों की सुरक्षा तथा स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान तथा राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान में बालिकाओं को आगे बढ़ाने की बात कही गई है, परंतु धरातल पर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा यदि नई शिक्षा लागू होती है तो इसका क्रियान्वयक अपने आप में एक बड़ी चुनौती होगी। कार्यक्रम का संचालन करते हुए भारत ज्ञान विज्ञान समिति के पूर्व सचिव तथा बालप्रहरी के संपादक उदय किरौला ने कहा कि भारत ज्ञान विज्ञान समिति 1994 से हर साल अल्मोड़ा में रतन सिंह सांगा एवं पनुली देवी सांगा स्मृति जनपद स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के माध्यम से सम-सामयिक विषयों पर बच्चों को अपनी अभिव्यक्ति का मौका दे रही है। इस वर्ष कोरोना की वजह से कार्यक्रम नहीं हो पाया। उन्होंने आगामी वर्षों से प्रतियोगिता नियमित चलाने की बात कही।
वेबिनार में भारत ज्ञान विज्ञान समिति से जुड़े कमलेश खेतवाल, प्रमोद तिवारी, गरिमा राना, कृपाल सिंह शीला, गीता जोशी, डॉ. विनीत पपने, विशनराम, दीपा पांडेय, दुर्गा सिंह, बीआर शैल, भावना भंडारी, डॉ. विभा कुमारी, ओमप्रकाश शिव, मीरा सिंह ‘मीरा’, सुधा गोस्वामी, भावना पांडे, महालक्ष्मी जोशी, गौरांश जोशी सहित देश के विभिन्न राज्यों के लगभग 4 दर्जन प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

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