दो बार खिताब जीतने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बने अल्मोड़ा के लाल
CNE REPORTER, अल्मोड़ा। जब हौसले बुलंद हों, इरादे फौलादी हों और रैकेट में जीत का जुनून हो, तो चोटें भी रास्ता नहीं रोक पातीं। अल्मोड़ा की माटी के लाल और भारत के स्टार शटलर लक्ष्य सेन ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। जर्मनी के सारब्रूकेन में आयोजित प्रतिष्ठित HYLO OPEN BADMINTON CHAMPIONSHIP-2026 का खिताब अपने नाम कर लक्ष्य ने न केवल तिरंगे का मान बढ़ाया, बल्कि बैडमिंटन के इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करा दिया। वह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का खिताब दूसरी बार जीतने वाले विश्व के पहले खिलाड़ी बन गए हैं।
27 अक्टूबर से 1 नवंबर तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में लक्ष्य सेन ने जिस अंदाज में अपना खेल दिखाया, उसने दुनिया के दिग्गज शटलरों को भी अपनी प्रतिभा का अहसास करा दिया। साल की शुरुआत में प्रतिष्ठित ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर अपनी काबिलियत साबित करने वाले लक्ष्य पिछले कुछ समय से चोटों की चुनौतियों से जूझ रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे अपनी लय हासिल की, खेल में धार लौटाई और हाल ही में इंडिया ओपन के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचकर अपनी वापसी के संकेत दिए। लेकिन जर्मनी में उन्होंने जो कर दिखाया, वह उनके Champion Mindset का शानदार प्रमाण बन गया।
कोर्ट पर चला लक्ष्य का जादू, एक के बाद एक धुरंधर पस्त
HYLO OPEN-2026 में लक्ष्य सेन का सफर आसान नहीं था, लेकिन हर मुकाबले के साथ उनका आत्मविश्वास और आक्रामक खेल निखरता चला गया।
क्वार्टर फाइनल: लक्ष्य ने फिनलैंड के काले कोल जोनेन (Kalle Koljonen) के खिलाफ शुरुआती गेम गंवाने के बाद जबरदस्त वापसी की। उन्होंने 14-21, 21-17, 21-13 से मुकाबला जीतकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। यह जीत उनके जुझारूपन और दबाव में बेहतरीन प्रदर्शन करने की क्षमता का परिचायक थी।
सेमीफाइनल: अब सामने थे फ्रांस के मजबूत खिलाड़ी टोमे जूनियर पोपोव (Toma Junior Popov)। लेकिन लक्ष्य के इरादों के सामने उनकी चुनौती भी ज्यादा देर नहीं टिक सकी। लक्ष्य ने शानदार नियंत्रण, सटीक शॉट्स और बेहतरीन कोर्ट कवरेज का प्रदर्शन करते हुए 21-17, 21-13 से सीधे गेम में जीत दर्ज की और फाइनल का टिकट हासिल कर लिया।
फाइनल: चैंपियन का चैंपियन अंदाज!
खिताबी मुकाबले में लक्ष्य सेन के सामने इंडोनेशिया के दिग्गज शटलर जोनाथन क्रिस्टी (Jonatan Christie) थे। मुकाबले पर पूरी दुनिया की नजरें थीं, लेकिन लक्ष्य ने शुरुआत से ही अपने इरादे साफ कर दिए। आक्रामक स्मैश, शानदार डिफेंस और बेहतरीन नेट प्ले के दम पर उन्होंने क्रिस्टी को संभलने का मौका नहीं दिया। लक्ष्य ने 21-17, 21-10 से सीधे गेम में फाइनल जीतकर HYLO OPEN-2026 की ट्रॉफी अपने नाम कर ली।
2019 से 2026 तक… सात साल बाद फिर वही बादशाहत, अब इतिहास में दर्ज हुआ नाम
लक्ष्य सेन इससे पहले वर्ष 2019 में भी HYLO OPEN का खिताब जीत चुके हैं। उस समय उन्होंने लगातार पांच अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। अब सात साल बाद एक बार फिर इसी टूर्नामेंट में चैंपियन बनकर उन्होंने एक अनूठा विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। HYLO OPEN का खिताब दो बार जीतने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बनने की उनकी यह उपलब्धि उनके शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ती है।
उत्तराखंड में जश्न, बैडमिंटन जगत ने दी बधाइयां
लक्ष्य सेन की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर उत्तराखंड में खुशी की लहर है। उत्तराखंड बैडमिंटन संघ की अध्यक्ष डॉ. अलकनंदा अशोक, सचिव बी.एस. मनकोटी, कोषाध्यक्ष रामावतार अग्रवाल सहित संघ के समस्त पदाधिकारियों ने लक्ष्य सेन को इस शानदार सफलता पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
वहीं अल्मोड़ा बैडमिंटन संघ के अध्यक्ष सुरेश कर्नाटक, उपाध्यक्ष गोकुल सिंह मेहता एवं राकेश जायसवाल, सचिव बी.एस. मनकोटी, कोषाध्यक्ष रामावतार अग्रवाल, जिला क्रीड़ा अधिकारी महेशी आर्या, नंदन रावत, अमरनाथ सिंह रजवार, विजय प्रताप सिंह, डी.के. जोशी, संजय नज्जौंन, शेखर लखचौरा, संजय अग्रवाल, हेम तिवाड़ी सहित अल्मोड़ा बैडमिंटन परिवार के समस्त पदाधिकारियों, सदस्यों एवं खिलाड़ियों ने लक्ष्य सेन और उनके परिजनों को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
सभी ने उम्मीद जताई कि लक्ष्य सेन अपनी इसी शानदार फॉर्म और जीत के सिलसिले को आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी बरकरार रखेंगे तथा देश और उत्तराखंड को गौरवान्वित करते रहेंगे।
बेशक, लक्ष्य सेन की यह जीत एक बार फिर साबित करती है कि अल्मोड़ा की पहाड़ियों से निकलकर विश्व बैडमिंटन के शिखर तक पहुंचने का सपना देखने वाला यह युवा खिलाड़ी अब सिर्फ मुकाबले नहीं जीत रहा, बल्कि इतिहास लिख रहा है। लक्ष्य का लक्ष्य अब और बड़ा है और दुनिया की निगाहें उनकी अगली उड़ान पर टिकी हैं।









