इंसानियत शर्मसार! मानसिक रूप से कमजोर युवती से गैंगरेप

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इंसानियत शर्मसार! मानसिक रूप से कमजोर युवती से गैंगरेप
इंसानियत शर्मसार! मानसिक रूप से कमजोर युवती से गैंगरेप

गर्भवती होने पर खुली दरिंदगी की पोल

सीएनई रिपोर्टर, रामनगर। नैनीताल जिले के रामनगर से सामने आई एक घटना ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। मानसिक रूप से कमजोर 25 वर्षीय युवती के साथ कथित दुष्कर्म का मामला तब सामने आया, जब वह गर्भवती अवस्था में असहनीय पेट दर्द से तड़पती हुई मिली। आरोप है कि होली के आसपास रामनगर में ही दो-तीन लोगों ने उसके साथ दरिंदगी की। यदि युवती के आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक जघन्य अपराध नहीं, बल्कि उस सामाजिक संवेदनहीनता का भी भयावह उदाहरण है, जिसमें एक असहाय महिला की पीड़ा लंबे समय तक अनदेखी होती रही।


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जानकारी के अनुसार, करीब आठ से नौ महीनों से यह 25 वर्षीय युवती रामनगर के अलग-अलग इलाकों में भटकती हुई दिखाई दे रही थी। मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण वह अपनी सुरक्षा, जरूरतों और परिस्थितियों को लेकर बेहद असहाय स्थिति में थी। लेकिन इस दौरान उसकी सुध लेने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी, यह सवाल अब गंभीरता से उठ रहा है।

अचानक यह युवती काशीपुर में रोडवेज बस अड्डे के समीप दिखाई दी। वह पेट में तेज दर्द के कारण बुरी तरह तड़प रही थी। उसकी दयनीय हालत देखकर किसी व्यक्ति ने समाजसेवा के कार्यों में सक्रिय रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश सुयाल को सूचना दी।

सूचना मिलते ही मुकेश सुयाल अपनी टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। युवती की गंभीर हालत को देखते हुए उसे चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया गया। जांच के दौरान डॉक्टरों ने जो जानकारी दी, उसने सभी को स्तब्ध कर दिया। युवती गर्भवती थी।

इसके बाद मुकेश सुयाल ने बिना देरी किए युवती को हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया और पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी। समय रहते उसे उपचार उपलब्ध कराने की यह पहल बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।

दर्द के बीच युवती ने सुनाई दरिंदगी की दास्तां

मुकेश सुयाल के अनुसार, बातचीत के दौरान युवती ने स्वयं को पौड़ी गढ़वाल का निवासी बताया। उसकी मानसिक स्थिति और शारीरिक पीड़ा के बीच सामने आया घटनाक्रम बेहद गंभीर है। युवती ने आरोप लगाया कि होली के आसपास रामनगर में दो-तीन लोगों ने उसके साथ दुष्कर्म किया था।

एक मानसिक रूप से कमजोर और अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर युवती के साथ ऐसी वारदात का आरोप कई गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर वह किन परिस्थितियों में रामनगर में भटक रही थी? उसके साथ कथित अपराध कहां और कब हुआ? आरोपियों की पहचान कौन करेगा और इतने समय तक इस घटना का पता क्यों नहीं चल पाया? इन सभी सवालों के जवाब अब पुलिस जांच से ही सामने आ सकेंगे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए रामनगर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। रामनगर कोतवाल सुशील कुमार ने बताया कि प्रकरण की गहनता से पड़ताल की जा रही है। नियमानुसार महिला सेल को भी मामले से अवगत कराया जा रहा है। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस अमानवीय घटना को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश सुयाल ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उनका कहना है कि युवती के साथ हुई कथित दरिंदगी के जिम्मेदार लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए। आरोपियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी असामाजिक तत्व किसी असहाय महिला की मजबूरी का फायदा उठाने की हिम्मत न कर सके।

सबसे बड़ा सवाल—आखिर कब सुरक्षित होंगी ऐसी महिलाएं?

यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामले की जांच तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मानसिक रूप से कमजोर, बेसहारा और असुरक्षित महिलाओं की सुरक्षा को लेकर व्यवस्था की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। आठ-नौ महीने तक एक युवती का अलग-अलग क्षेत्रों में भटकना और फिर गर्भवती अवस्था में दर्द से तड़पते हुए मिलना हमारी सामाजिक व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल है।

अब जरूरत केवल आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की नहीं, बल्कि युवती को समुचित चिकित्सा, सुरक्षा, संरक्षण और न्याय दिलाने की भी है। उसकी आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और जांच ऐसी होनी चाहिए कि कोई भी दोषी कानून के शिकंजे से बच न सके।

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